बोर्ड-निगम नियुक्तियों से नायब सिंह सैनी का बड़ा सियासी संदेश, संगठन के ‘वेटिंग रूम’ को मिला सत्ता में स्थान
punjabkesari.in Sunday, May 31, 2026 - 04:36 PM (IST)
चंडीगढ़( चन्द्र शेखर धरणी): हरियाणा सरकार द्वारा बोर्डों, निगमों और विभिन्न संस्थाओं में की गई ताजा नियुक्तियां केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति के रूप में देखी जा रही हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इन फैसलों के जरिए भाजपा संगठन के उन नेताओं और कार्यकर्ताओं को सत्ता की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया है, जो लंबे समय से राजनीतिक जिम्मेदारियों की प्रतीक्षा कर रहे थे।
प्रदेश में विधानसभा चुनावों और उसके बाद के राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच भाजपा के अनेक नेता स्वयं को सरकार में प्रतिनिधित्व मिलने की उम्मीद लगाए बैठे थे। अब एक साथ कई महत्वपूर्ण पदों पर हुई नियुक्तियों ने यह संकेत दे दिया है कि सरकार संगठन में कार्य करने वालों को भी सत्ता में सम्मानजनक हिस्सेदारी देने के पक्ष में है।
संगठन को साधने की शुरुआत
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नायब सरकार के गठन के बाद यह पहला बड़ा अवसर है जब विभिन्न बोर्डों और निगमों में व्यापक स्तर पर नियुक्तियां की गई हैं। इससे भाजपा नेतृत्व ने दोहरे उद्देश्य साधने की कोशिश की है—एक ओर लंबे समय से सक्रिय नेताओं को जिम्मेदारी देकर उनका मनोबल बढ़ाना और दूसरी ओर संगठन के भीतर संतुलन बनाए रखना।
इन नियुक्तियों को आगामी राजनीतिक चुनौतियों और भविष्य के चुनावी समीकरणों की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
महत्वपूर्ण संस्थानों की कमान भरोसेमंद नेताओं को
सरकार ने रोहतास जांगड़ा को हरियाणा लेबर वेलफेयर बोर्ड का चेयरमैन बनाकर श्रमिक कल्याण क्षेत्र में बड़ा दायित्व सौंपा है। हाल के वर्षों में विवादों और सुधारों के केंद्र में रहे इस बोर्ड की भूमिका आने वाले समय में और अधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसी प्रकार वरिष्ठ भाजपा नेता एडवोकेट वेदपाल को हरियाणा स्टेट एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड की जिम्मेदारी दी गई है। मंडियों के संचालन के साथ-साथ ग्रामीण संपर्क सड़कों के निर्माण एवं रखरखाव में भी यह बोर्ड अहम भूमिका निभाता है, जिससे इसकी प्रशासनिक और राजनीतिक उपयोगिता दोनों बढ़ जाती हैं।
किसान और सहकारिता क्षेत्र पर विशेष नजर
सरकार ने किसान और ग्रामीण विकास से जुड़े क्षेत्रों में भी अपने राजनीतिक समीकरण मजबूत करने का प्रयास किया है। राजपाल बैनीवाल को हरियाणा किसान कल्याण प्राधिकरण में सदस्य बनाया गया है, जबकि गुरनाम सैनी को हरियाणा भूमि सुधार एवं विकास निगम का चेयरमैन नियुक्त किया गया है।
सहकारिता क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण नियुक्तियां हुई हैं। सुभाष कलसाना को राज्य सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक की प्रबंध समिति में सरकार का प्रतिनिधि बनाया गया है, वहीं भारत भूषण जुयाल को हरको बैंक की कमान सौंपकर सरकार ने सहकारिता तंत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने का संकेत दिया है।
महिला नेतृत्व को भी मिला अवसर
ताजा नियुक्तियों में महिला प्रतिनिधित्व को भी प्रमुखता दी गई है। सुनीता दांगी को हरियाणा महिला विकास निगम की चेयरपर्सन बनाकर सरकार ने यह संदेश दिया है कि महिलाओं की भागीदारी केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन्हें प्रशासनिक और संस्थागत नेतृत्व में भी अवसर मिलेगा।
चुनावी मैदान में सक्रिय नेताओं का सम्मान
जुलाना विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ चुके कैप्टन योगेश बैरागी को हरियाणा राज्य सोशल वेलफेयर बोर्ड का चेयरमैन बनाया गया है। इसे उन नेताओं के सम्मान के रूप में देखा जा रहा है जिन्होंने चुनावी संघर्ष में पार्टी का प्रतिनिधित्व किया और संगठन के लिए सक्रिय भूमिका निभाई।
सांस्कृतिक क्षेत्र में भी साधे गए समीकरण
सरकार ने केवल राजनीतिक नियुक्तियों तक स्वयं को सीमित नहीं रखा है। कला और संस्कृति के क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण चेहरे जिम्मेदारियों से जोड़े गए हैं। लोक गायक बिंदर दनोदा, महेश जोशी, अमित सैनी और गगन हरियाणवी को कला परिषद से जुड़ी जिम्मेदारियां देकर सरकार ने सांस्कृतिक जगत के प्रभावशाली वर्ग को भी अपने साथ जोड़ने का प्रयास किया है।
अभी बाकी है दूसरा चरण?
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि बोर्डों, निगमों और आयोगों में नियुक्तियों का यह सिलसिला अभी आगे भी जारी रह सकता है। कई महत्वपूर्ण संस्थानों में पद अभी खाली हैं और संगठन के अनेक नेताओं की नजरें अगले दौर की नियुक्तियों पर टिकी हुई हैं।
राजनीतिक संदेश साफ
बोर्ड-निगमों में हुई ये नियुक्तियां केवल पद वितरण की कवायद नहीं हैं। इनके माध्यम से नायब सिंह सैनी सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि संगठन में काम करने वालों को सत्ता में भागीदारी मिलेगी, क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधा जाएगा तथा भाजपा के भीतर संगठनात्मक एकजुटता को मजबूत रखा जाएगा। राजनीतिक दृष्टि से इसे सरकार और संगठन के बीच समन्वय मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।|