नर्सिंग कैडर ने मुख्यमंत्री सैनी से मिल ऑनलाइन तबादला नीति वापस लेने की रखी मांग

punjabkesari.in Thursday, Feb 19, 2026 - 05:45 PM (IST)

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी) : हरियाणा सरकार द्वारा स्वास्थ्य विभाग में लागू की गई ऑनलाइन तबादला नीति को लेकर बुधवार को नर्सिंग कैडर ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात की। उन्हें इस तबादला नीति को रद्द करने के लिए मांग पत्र सौंपा। साथ ही नीति में बदलाव के लिए सुझाव भी दिए। क्योंकि नर्सिंग कैडर में 95 प्रतिशत महिलाएं ही हैं।

हरियाणा के विभिन्न जिलों से आईं नर्सिंग ऑफिसर्स की ओर से संत कबीर कुटीर में मुख्यमंत्री नायब सिंह से मुलाकात की गई। उन्हें मांग पत्र सौंपकर अनुरोध किया कि कहा गया कि नर्सिंग विभाग के कर्मचारियों पर ऑनलाइन तबादला नीति के कार्यान्वयन पर रोक लगाई जाए। यदि यह नीति नर्सिंग विभाग के कर्मचारियों पर लागू की जाती है, तो इससे कर्मचारियों के साथ-साथ उनके परिवारों को भी कठिनाई होगी। नर्सिंग कैडर में कार्यरत अधिकांश कर्मचारी महिला कर्मचारी हैं। यदि उनका स्थानांतरण होता है तो इससे उन्हें और उनके परिवारों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। क्योंकि उन्हें अपने परिवार के सदस्यों की देखभाल करनी होती है। 

अनेक महिला कर्मचारियों के परिवार वहीं बसे हुए हैं, जहां उनकी वर्तमान में तैनाती है। स्थानांतरण की स्थिति में कर्मचारी को अपने परिवार को छोडक़र दूसरे स्टेशन पर अपना कर्तव्य निभाना होगा। महिला कर्मचारियों के लिए परिवार से दूर रहकर काम करना कठिन होगा। साथ ही यह कहा गया कि जो नर्सिंग कर्मचारी किसी स्टेशन पर लंबे समय से तैनात होते हैं, वे उस स्टेशन के इलाके से अच्छी तरह परिचित होते हैं। जिससे उन्हें नए स्थानांतरित कर्मचारी की तुलना में अपने कर्तव्यों का अधिक प्रभावी ढंग से निर्वहन करने में मदद मिलती है। 

कोविड-19 महामारी के दौरान नर्सिंग स्टाफ ने पूरी क्षमता से अपने कर्तव्यों का निर्वाह किया और महामारी के प्रसार को रोकने में उत्कृष्ट योगदान दिया। वे अपने परिवार के सहयोग से ऐसा कर पाए हैं। यदि उनका तबादला किसी अन्य स्टेशन पर हो जाता है तो उनके लिए इस तरह से कार्य कर पाना बहुत मुश्किल/असंभव होगा। उन्हें कोविड-19 महामारी के खिलाफ लड़ाई में अग्रिम पंक्ति के नायकों के रूप में नामित किया गया है। ऐसे में ऑनलाइन तबादला नीति से उनका जीवन प्रभावित होगा।

इसके अलावा नर्सिंग कार्डर का काम चौबीसों घंटे सातों दिन का होता है। उन्हें काम के घंटों के बाद भी किसी भी आपातकालीन कॉल के लिए तैयार रहना पड़ता है, जो एक महिला कर्मचारी के लिए निभाना बहुत मुश्किल होगा। अगर उनका तबादला उनके परिवार से दूर किसी स्टेशन पर हो जाता है तो उन्हें अकेले रहना पड़ेगा।

यह भी ध्यान में लाया जा रहा है कि अधिकांश प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और नैदानिक स्वास्थ्य केंद्र दूरदराज के स्थानों पर स्थित हैं। एक पुरुष के लिए समय पर वहां पहुंचकर अपना कर्तव्य निभाना मुश्किल होता है, इसलिए एक महिला के लिए यह और भी कठिन होगा। महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों के कारण परिवार के संरक्षण के बिना अकेले रहना महिलाओं के लिए बेहद मुश्किल है। परिवार से अलग रहकर महिला कर्मचारियों के काम के प्रदर्शन और मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ेगा।

मांग पत्र में यह भी कहा गया कि नर्सिंग विभाग के कर्मचारियों के तबादलों से उनके बच्चों के भविष्य पर गहरा असर पड़ेगा। क्योंकि कई नर्सिंग कर्मचारियों के बच्चे उन स्कूलों या कॉलेजों में पढ़ रहे हैं जो वर्तमान में उनकी तैनाती वाले स्थानों पर ही हैं। यदि उनका तबादला हो जाता है तो उनके बच्चों की शिक्षा प्रभावित होगी। उनके शैक्षणिक प्रदर्शन पर बुरा असर पड़ेगा और उन्हें अनावश्यक तनाव होगा। इसलिए निवेदन है कि नर्सिंग कैडर की स्थानांतरण नीति के कार्यान्वयन से छूट दी जाए। 

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Content Editor

Krishan Rana

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