हरियाणा में केवल दावों की सरकार: शैलजा

7/27/2021 8:48:52 AM

चंडीगढ़ (धरणी) : हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुमारी शैलजा ने कहा है कि हरियाणा में केवल दावों की सरकार है। मूलभूत सुविधाओं का जिक्र आते ही वह मुंह फेर लेती है, लोगों को भगवान भरोसे छोड़ देती है।कोरोना काल इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं का हाल सबसे खराब और चिंताजनक है। जींद जिले का उदाहरण इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। कुमारी शैलजा ने कहा कि जींद जिले के मुआना स्वास्थ्य केंद्र पर गर्भवती महिला तीन घंटे बेंच पर तड़पती रही। न डॉक्टर मिला, न नर्स। कोई अन्य स्वास्थ्यकर्मी भी नहीं था। फोन करने के बावजूद एम्बुलेंस समय पर नहीं आई। बेंच पर ही प्रसव हो गया और नवजात की मृत्यु हो गई। स्वास्थ्य केंद्र में केवल दो सफाईकर्मी थे।

उन्होंने कहा कि इस घटना ने बेहतर सेवाओं का ढिंढोरा पीटने वाली सरकार की पोल खोल दी है। सरकार जुमलों से हट कर आकलन करे कि स्वास्थ्य  सेवाओं की वास्तविक तस्वीर क्या है? हर बार तथ्यों को छिपा कर हकीकत पर झूठ का आवरण चढ़ाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मानकों के अनुसार ग्रामीण इलाकों में पांच हजार की आबादी पर एक उप स्वास्थ्य केंद्र, 30 हजार पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र  और 80 हजार से 1.20 लाख की आबादी पर एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र होना चाहिए। मानकों का पालन नहीं हो रहा। बड़ी संख्या में उपस्वास्थ्य, प्राथमिक और  सामुदायिक केंद्रों की कमी है।

कुमारी शैलजा ने कहा कि जो स्वास्थ्य केंद्र चालू हैं उनमें भी मेडिकल स्टाफ की भारी कमी है। स्पेशलिस्ट डाक्टरों के 90 प्रतिशत पद खाली हैं। सुपर स्पेशलिस्ट डाक्टर एक भी सरकारी अस्पताल में दिखाई नहीं देता। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों के 60 फीसद तक पद रिक्त हैं। स्टॉफ नर्स, रेडियोग्राफर, फार्मासिस्ट, लैब तकनीशियन और मल्टीपर्पज हेल्थ वर्कर्स के पद भी बड़ी संख्या में खाली पड़े हैं लेकिन सरकार को कोई चिंता नहीं। वह मुंगेरी लाल के सपनों से बाहर ही नहीं आना चाहती। लगता है किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है। डब्ल्यूएचओ के मानकों के अनुसार एक सीएचसी में छह विशेषज्ञ डॉक्टर (एक सर्जन, एक स्त्री रोग, एक फिजिशियन, एक शिशु रोग, एक हड्डी रोग और एक बेहोशी देने वाला) होने चाहिए। सरकार बताए कि क्या एक भी सीएचसी में इतने चिकित्सक नियुक्त हैं? उन्होंने कहा कि सरकार केवल दावों में ही मशगूल न रहे, दायित्व निभाना भी सीखे।

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Content Writer

Manisha rana

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