सभी किसानों को आदेश, फसल की कटाई के बाद खेत में बचे अवशेषों काे न जलाएं

punjabkesari.in Tuesday, Apr 21, 2020 - 03:41 PM (IST)

पलवल(दिनेश)- पलवल उप कृषि निदेशक डा. महावीर सिहं ने बताया कि जिलाधीश ने आदेशों में स्पष्ट किया है कि जिला की सीमा के भीतर किसान गेंहू की फसल की कटाई के बाद खेत में बचे अवशेषों (पराली) को जला देते हैं, जिनके जलने से होने वाले प्रदूषण से जनजीवन के स्वास्थ्य, संपति की हानि, तनाव व मानव जीवन को भारी खतरे की संभावना बनी रहती है। जबकि इन अवशेषों से पशुओं के लिए भूसा बनाया जा सकता है परन्तु इनके जलाने के कारण पशुओं के लिए चारे की कमी हो जाती है तथा जमीन के मित्र कीट भी नष्ट हो जाते हैं, जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति कम होने से फसल की पैदावार पर भी प्रभाव पड़ता है।

जिलाधीश द्वारा जारी इन आदेशों की अवहेलना करने पर दोषी व्यक्ति के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा-188 सपंठित वायु एवं प्रदूषण नियन्त्रण अधिनियम-1981 के तहत दंड का भागी होगा। उन्होंने बताया कि होडल क्षेत्र के गांव भुलवाना के किसान गिर्राज व छोटे लाल तथा पलवल क्षेत्र के गांव छज्जू नगर के किसान जगदीश, रमेश व कर्ण द्वारा अपने खेतों में गेंहू की फसल के अवशेषों को जलाने पर संबंधित थानों में राष्ट्रीय हरित अधिकरण के नियमों के दृष्टिïगत मुकदमा दर्ज करने की अनुशंसा की गई है। 

एनजीटी के आदेशों की अनुपालना के अंतर्गत जिला में फसल अवशेष जलाने पर धारा 144 के तहत किसी भी प्रकार के फसल अवशेषों को जलाने पर पूर्णतय: प्रतिबंध है। संज्ञान में आया है कि प्रतिबंध होने के वाबजूद भी कुछ किसान गेंहू की कटाई के बाद फसलों के अवशेषों को खेतों में जला रहे हैं। उन्होंने जिला के सभी किसानों से आह्वïान किया है कि कोविड-19 की विषम परिस्थितियों में अपने फसल अवशेषों को न जलाएं इसकों खेतों में ही जोतकर डीकम्पोस्ट अथवा आधा कट्टा यूरिया डालकर गलाया जा सकता है, जिसमें पर्यावरण के साथ-साथ मित्र कीटों का बचाव होगा और मृदा का स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा।


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Isha

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