''विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस'' हर तहसील तक मनाया जाए, तभी इतिहास से जुड़ेगी नई पीढ़ी: ईश सरना
punjabkesari.in Friday, Jul 31, 2026 - 04:39 PM (IST)
चंडीगढ़( चन्द्र शेखर धरणी ): समाजसेवी व पंजाबी नेता ईश सरना ने कहा कि 1947 का भारत विभाजन केवल देश की सीमाओं का बंटवारा नहीं था, बल्कि लाखों पंजाबी परिवारों के जीवन, संस्कृति, सम्मान और अस्तित्व पर सबसे बड़ा मानवीय आघात था। विभाजन की त्रासदी में लाखों लोगों ने अपने घर, कारोबार और परिजनों को खोया, जबकि असंख्य परिवार हमेशा के लिए बिछड़ गए।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 14 अगस्त को 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' घोषित करना उन करोड़ों पीड़ित परिवारों के सम्मान में लिया गया ऐतिहासिक निर्णय है। यह दिवस केवल अतीत को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को इतिहास की वास्तविकता से परिचित कराने का राष्ट्रीय संकल्प भी है।
ईश सरना ने कहा कि यदि इस स्मृति दिवस का उद्देश्य समाज के हर वर्ग तक पहुंचना है, तो इसके आयोजन केवल राज्य और जिला मुख्यालयों तक सीमित नहीं रहने चाहिए। प्रत्येक तहसील स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, ताकि हर शहर और कस्बे के लोग अपने पूर्वजों के संघर्ष और बलिदान को श्रद्धापूर्वक याद कर सकें।
उन्होंने कहा कि आज जरूरत केवल औपचारिक कार्यक्रमों की नहीं, बल्कि व्यापक जन-जागरण की है। जब हर तहसील में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया जाएगा, तब समाज अपने इतिहास से और अधिक मजबूती से जुड़ेगा तथा युवा पीढ़ी भी उस त्रासदी को समझ सकेगी, जिसकी कीमत लाखों लोगों ने अपने जीवन से चुकाई।
ईश सरना ने केंद्र और राज्य सरकारों से आग्रह किया कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस को प्रत्येक तहसील स्तर पर आयोजित करने की स्थायी नीति बनाई जाए, ताकि यह अभियान पूरे देश में जनभागीदारी के साथ एक व्यापक जनआंदोलन का रूप ले सके।