बीजेपी को लगा बड़ा झटका, दो बार विधानसभा चुनाव लड़ने वाले पवन बेनीवाल ने छोड़ी पार्टी

4/20/2021 3:55:29 PM

ऐलनाबाद (सुरेंद्र सरदाना): ऐलनाबाद से भाजपा को बड़ा झटका लगा है। दो बार विधानसभा चुनाव लड़ने वाले पवन बेनीवाल ने  भाजपा को अलविदा कह दिया है। उन्होंने मंगलवार को किसानों के बीच पहुंचकर ये ऐलान किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि गत चार महीनों से वह तीन कृषि कानूनों को लेकर आहत हैं और बीजेपी की ऐसी किसान विरोधी नीतियों से वह ऊब चुके है।

उन्होंने कहा कि बेशक प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल की नियत व नीति बहुत ही अच्छी है, लेकिन तीन कृषि कानूनों पर उनकी सुनवाई नहीं हुई और न ही भाजपा ने उनके विधानसभा क्षेत्र में करवाए जाने वाले विकास कार्य की तरफ ध्यान दिया, इसलिए वह बीजेपी में रह कर घुटन महसूस करने लगे और बीजेपी से उनका मोह भंग हो गया है। आज उन्होंने बीजेपी से नाता तोड़ लिया है। 

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वहीं ऐलनाबाद विधानसभा उपचुनाव लडऩे के सवाल पर बेनीवाल ने कहा कि उनकी तीन पीढ़ियां चुनाव लड़ती आ रही हैं और वह आगे भी चुनाव लड़ते रहेंगे। उन्होंने कहा कि ऐलनाबाद उपचुनाव निश्चित रूप से लड़ेंगे। किसानों के साथ मिलकर व किसानों को साथ ले कर यह चुनाव लड़ेंगे। इस प्रकार स्पष्ट हो गया है कि बेशक दो बार पहले भी पवन बेनीवाल को ऐलनाबाद विधानसभा चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा, बावजूद भी वह किसी भी पार्टी से चुनाव लड़े, लेकिन ऐलनाबाद विधानसभा उपचुनाव जरूर लड़ेंगे। 

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पवन बेनीवाल का कांग्रेस में शामिल होना लगभग तय है। अब पते की बात यह है कि अगर पवन बैनीवाल कांग्रेस में शामिल होते हैं तो उनकी इस बात से की वह ऐलनाबाद विधानसभा चुनाव जरूर लड़ेंगे, ऐसे में कांग्रेस से उन्हें टिकट मिलना तय है। अगर कांग्रेस से उन्हें टिकट मिल जाती है तो कांग्रेस की टिकट से तीन बार हारे भरत सिंह बेनीवाल जो रिश्ते में पवन बेनीवाल के चाचा लगते हैं, राजनीतिक रूप से एक दूसरे के धुरविरोधी हैं। यदि यह विरोध जारी रहा तो इनेलो को एक बार फिर ऐलनाबाद से जितने का मौका मिल सकता है और अगर यह इकट्ठा हो कर ऐलनाबाद उपचुनाव लड़ते है तो ऐलनाबाद का उपचुनाव लड़ना इनेलो व भाजपा-जजपा के  उम्मीदवारों के लिए एक कांटो भरा ताज होगा। 

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अभी चुनाव आयोग द्वारा चुनाव की डेट तय करना शेष है, लेकिन ऐलनाबाद का यह उपचुनाव एक ऐतिहासिक चुनाव होगा और किसी के लिए भी आसान नहीं होगी डगर पनघट की। अब क्या समीकरण बनते हैं यह कह पाना तो बहुत मुश्किल है, लेकिन इस चुनाव का ऐतिहासिक परिणाम भविष्य के गर्भ में है।
 

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Content Writer

vinod kumar

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