राजन बोले- सरकार अपने अड़ियल रुख पर कायम तो वार्ता का ढोंग क्यों ?

1/19/2021 2:39:39 PM

गुरुग्राम (गौरव): हरियाणा प्रदेश कांग्रेस समिति की अध्यक्षा, कुमारी शैलजा के राजनीतिक सचिव व दक्षिण हरियाणा के प्रभारी राजन राव ने भाजपा की मोदी सरकार को लोकतंत्र का कलंक करार देते हुए इसे लोकतंत्र को शर्मसार करने वाला बताया है। उन्होंने कहा कि 26 जनवरी को दिल्ली की सड़कों पर किसान तिरंगे के साथ ट्रैक्टर यात्रा करना चाहते हैं लेकिन सरकार के नुमाइंदे इस यात्रा को देश की बदनामी से जोड़कर भावनात्मक ब्लैकमेलिंग करना चाहती है। 

सरकार बताए की करीब दो महीनों से कड़कती ठंड और बरसात आदि में खुले आसमान के नीचे सड़कों पर डेरा डाले 122 किसानों की शहादत पर देश की, सरकार की बदनामी नहीं हुई। अपने हकों के लिए सरकारी अत्याचार झेल रहे किसानों के मामले पर सरकार और देश शर्मसार क्यों नहीं हुआ। अगर किसान दिल्ली की सड़कों पर तिरंगा यात्रा निकाल लेगा तो अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर देश की बदनामी हो जाएगी? गणतंत्र दिवस का उत्सव हर देशवासी को मनाने का अधिकार है। राव ने कहा किसान अगर तिरंगा यात्रा करना चाहता है तो इसमें बुराई क्या है। 

उन्होंने कहा कि कहा कि मोदी सरकार का रिमोट कंट्रोल चंद पूंजीपतियों के हाथ है। कृषि कानूनों पर सरकार की मंशा से साफ है कि प्रधानमन्त्री मोदी पूंजीपतियों के हाथ की कठपुतली हैं। देश में सरकार नाम की कोई चीज कायम नहीं है, देश को अंबानी और अडानी जैसे पूंजीपति चला रहे हैं। कोई भी फैसला लेने से पहले आमजन से रायशुमारी करने या अपने विवेक का इस्तेमाल करने की बजाय मोदी सरकार पूंजीपतियों से पूछती है। तीनों काले कृषि कानून भी पूंजीपतियों की शह पर ही बनाए गए हैं। इन कानूनों से पूंजीपतियों के अलावा किसी को भी लाभ नहीं है। उन्होंने कहा कि जब सरकार का कानून वापिस नहीं लेने का अडियल रुख कायम है तो बार बार किसानों के साथ वार्ता का ढोंग क्यों किया जा रहा है। 

केंद्रीय कृषि मंत्री हर वार्ता से पहले और बाद में एक ही बयान देते हैं कि सरकार कानून वापिस नहीं लेगी। दसवें दौर की वार्ता से पहले भी कृषि मंत्री का बयान निराशाजनक है। एक तरफ सरकार गतिरोध टूटने की उम्मीद लगाए है तो दूसरी तरफ खुद गतिरोध का कारण बन रही है। सरकार वार्ता का स्वांग रचा किसानों को तोड़ने का प्रयास कर रही है, लेकिन किसान किसी भी कीमत पर टूटने और झुकने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि किसान एक ही मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और वह है तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की। जब तक सरकार तीनों कानूनों को रद्द नहीं करती तब किसान घर वापसी नहीं करेंगे।

उन्होंने कहा कि सरकार के इशारे पर कुछ तथाकथित किसान नेता दूसरे समर्पित किसान नेताओं को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका नाम कांग्रेस से जोड़कर उन्हें आंदोलन से अलग थलग करने की साजिश हो रही है। पूरा देश किसानों के साथ खड़ा है। कांग्रेस शुरू से ही इन कृषि कानूनों का विरोध कर रही है। कांग्रेस का स्टैंड शुरू से इन कृषि कानूनों के प्रति एकदम साफ है। कांग्रेस काले कानूनों को किसी भी कीमत पर किसानों पर थोपने नहीं देगी। कांग्रेस किसानों के साथ उनकी हर लड़ाई में शरीक थी, है और रहेगी। सत्ता के नशे में चूर मोदी सरकार के किसी देश विरोधी फैसले का कांग्रेस पुरजोर विरोध करेगी।


vinod kumar

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