राज्यसभा चुनाव: क्रास वोटिंग करने वाले किसी भी दल के सदस्य के खिलाफ दल बदल कानून के तहत कोई कार्यवाही नहीं हो सकती
punjabkesari.in Monday, Mar 09, 2026 - 03:50 PM (IST)
चंडीगढ़ (धरणी) : राज्यसभा के चुनावों में स्पीकर, मुख्यमंत्री, मंत्री भी एक जन प्रतिनिधि (विधायक) होने के नाते मतदान करने की व्यवस्था है। हरियाणा में भी 90 के 90 विधायक एक सदस्य के रूप में मतदान करने की प्रथा है। राज्यसभा के चुनाव विधानसभा की कार्यवाही नहीं होती। स्वतंत्र रूप से यह प्रक्रिया चुनाव आयोग के अधीन होती है।
राज्यसभा में क्रास वोटिंग करने वाले किसी भी दल के सदस्य के खिलाफ दल बदल कानून के तहत कोई कार्यवाही भी नहीं हो सकती।केवल किसी भी राजनैतिक दल द्वारा राज्यसभा चुनावों के लिए अंदर नियुक्त प्रतिनिधि को जन प्रतिनिधि अपना वोट दिखाकर डालने का प्रावधान है। राज्यसभा में क्रास वोट डालने वाले किसी भी राजनैतिक दल के विधायक पर दलबदल कानून लागू नहीं होता।हरियाणा में राज्यसभा चुनाव सीधे जनता द्वारा नहीं बल्कि विधानसभा के 90 विधायकों द्वारा होते हैं। इसलिए कई बार विधायकों की क्रॉस वोटिंग के कारण चुनाव परिणाम बदल जाते हैं। 2022 हरियाणा राज्यसभा चुनाव (सबसे चर्चित क्रॉस वोटिंग) जून 2022 में हुई, तब 2 सीटें थी।कांग्रेस के अजय माकन व भाजपा के कृष्ण लाल पंवार उम्मीदवार थे।निर्दलीय जेजेपी व भाजपा समर्थित कार्तिकेय शर्मा मैदान में उतरे।परिणामो में भाजपा के कृष्ण लाल पंवार जीते घोषित हुए।दूसरे विजेता कार्तिकेय शर्मा बने।कांग्रेस के अजय माकन क्रॉस वोटिंग की स्थिति के कारण पराजित हो गए।
कांग्रेस के पास जीत के लिए पर्याप्त 31 विधायक थे।लेकिन तब कांग्रेस के एक विधायक ने क्रॉस वोटिंग की। एक वोट तकनीकी कारण से रद्द हो गया। इसके कारण अजय माकन से हार गए और कार्तिकेय शर्मा जीत गए। तब कांग्रेस ने एक विधायक को पार्टी पदों से निष्कासित कर दिया था। हरियाणा की राजनीति में सबसे बड़ा क्रॉस वोटिंग का उदाहरण माना जाता है 2016 हरियाणा राज्यसभा चुनाव।जब निर्दलीय व भाजपा समर्थित सुभाष चंद्रा जीते,तब इनेलो,कांग्रेस समर्थित आर के आनंद हार गए।कांग्रेस के पास पर्याप्त विधायक थे। फिर भी एक कांग्रेस विधायक का वोट गलत तरीके से दिखाने के कारण रद्द हो गया।कुछ विधायकों ने क्रॉस वोटिंग भी की।इससे सुभाष चंद्र जीत गए। लेकिन यह चुनाव भी हरियाणा में रणनीतिक वोटिंग और भीतरघात का बड़ा उदाहरण माना जाता है।
2016 में हरियाणा का राज्यसभा चुनाव देश भर में चर्चा का विषय बन गया था। इस चुनाव में एक वोट “पेन प्रकरण” के कारण रद्द हो गया, जिसने पूरे चुनाव का परिणाम बदल दिया।उस समय हरियाणा विधानसभा में इनेलो,कांग्रेस के पास पर्याप्त विधायक थे और माना जा रहा था कि आनंद आसानी से चुनाव जीत जाएंगे।
क्या था “पेन प्रकरण”
राज्यसभा चुनाव में ओपन बैलेट सिस्टम लागू होता है। इसमें विधायक अपना वोट दिखाकर पार्टी एजेंट को दिखा सकते हैं, लेकिन वोट चुनाव आयोग द्वारा दिए गए पेन से ही डालना होता है।
इस चुनाव में कांग्रेस के तब के एक विधायक ने मतदान करते समय: बैलेट पेपर पर वोट दूसरे पेन से डाल दिया।बाद में वह वोट पार्टी एजेंट को दिखाया गया। लेकिन नियम के अनुसार निर्धारित पेन के अलावा किसी अन्य पेन से डाला गया वोट अमान्य माना जाता है।इसलिए रिटर्निंग ऑफिसर ने वह वोट रद्द कर दिया।परिणाम पर असर पड़ा तथा वोट रद्द होने के बाद चुनाव का समीकरण बदल गया। सांवैधानिक जानकारियां रखने वाले बताए है कि निर्दलीय के रूप में जीतने वाले के पास 6 माह का समय होता है।जिसमें वह किसी भी राजनैतिक दल में चाहे तो शामिल भी हो सकता है।