संयुक्त किसान मोर्चा ने एमएसपी बढ़ोतरी को ढकोसला करार दिया, कहा- ये कागज पर ही रहेगी

punjabkesari.in Wednesday, Sep 08, 2021 - 08:43 PM (IST)

सोनीपत (दीक्षित): संयुक्त किसान मोर्चा ने रबी फसलों की एमएसपी में बढ़ोतरी को ढकोसला करार दिया। इस बारे मोर्चा ने कहा कि कानूनी गारंटी के बिना सरकार द्वारा घोषित एमएसपी किसानों के लिए कागज पर ही रहेगी। आलम यह है कि कमजोर मंडी प्रणाली वाले राज्यों में बड़ी संख्या में किसानों को अपनी फसल एमएसपी से नीचे बेचनी पड़ती है।

कुंडली बॉर्डर पर बुधवार को पंजाब की 32 जत्थेबंदियों की बैठक में केंद्र सरकार द्वारा घोषित एमएसपी पर चर्चा के बाद इसे सरकार का ढकोसला करार दिया। उनका कहना था कि सरकार ने वास्तविक रूप से रबी फसलों के एमएसपी को कम कर दिया है। खुदरा मुद्रास्फीति 6 प्रतिशत है जबकि गेहूं और चना के एमएसपी में सिर्फ 2 प्रतिशत और 2.5 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। इसका मतलब है कि वास्तविक रूप से गेहूं और चना के एमएसपी में क्रमश: 4 प्रतिशत और 3.5 प्रतिशत की कमी हुई है। उन्होंने कहा कि आरएमएस 2022-23 के लिए गेहूं के लिए घोषित 2015 रूपये का नया एमएसपी मुद्रास्फीति के लिए समायोजित होने पर 1901 रूपये के बराबर है, जो कि आरएमएस 2021-22 के लिए गेहूं के लिए घोषित 1975 रूपये से 74 रूपये कम है। 

इसी तरह चना का एमएसपी वास्तविक रूप में 5100 रूपये से घटाकर 4934 रूपये कर दिया गया है। एक ओर जहां किसान डीजल, पेट्रोल, कृषि आदानों और दैनिक आवश्यकताओं की बढ़ी कीमतों का खामियाजा भुगत रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनकी आय कम होने के कारण वे गरीब होते जा रहे हैं।

जत्थेबंदियों ने कहा कि सरकार व्यापक लागत शब्द का भी धोखे से दुरुपयोग कर रही है जिसका उपयोग हमेशा उत्पादन की सी2 लागत को संदर्भित करने के लिए किया जाता रहा है। जैसा कि 2018 से किसान संगठनों द्वारा बताया गया है, सरकार कम लागत (ए2+एफएल) का उपयोग करके किसानों और देश को धोखा दे रही है। इतना ही नहीं सरकार दावा कर रही है कि वह व्यापक लागत से 50 प्रतिशत अधिक एमएसपी प्रदान कर रही है। उदाहरण के लिए, 2021-22 में गेहूं के लिए व्यापक उत्पादन लागत (सी2) 1467 रुपये थी जो सरकार द्वारा उपयोग की जाने वाली 960 रुपये की कम लागत से 50 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि किसान पूरी ताकत के साथ सरकार के खेल को खारिज कर रहे हैं।

जत्थेबंदियों ने कहा कि देश में भारत बंद की तैयारियां जोरों पर हैं। किसान संगठनों द्वारा तैयारी बैठकें और सभाएं की जा रही हैं। 10 सितंबर को शाहजहांपुर बॉर्डर पर किसान संगठनों की बैठक होगी जिसमें 33 जिलों के लोग शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि देश की प्रमुख ट्रेड यूनियनों द्वारा समर्थन दिए जाने से इस बार का भारत बंद ऐतिहासिक होगा। 
 

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Content Writer

vinod kumar

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