Haryana: ‘चिराग’ योजना के तहत दाखिले से वंचित छात्रों को राहत, सरकार ने लिया बड़ा फैसला
punjabkesari.in Wednesday, Jan 21, 2026 - 11:30 AM (IST)
डेस्क: हरियाणा में ‘चिराग’ योजना के तहत दाखिले से वंचित रह गए छात्रों को बड़ी राहत दी गई है। स्कूल शिक्षा निदेशालय ने लंबित और अपात्र घोषित किए गए निजी स्कूलों के लिए चेकिंग पोर्टल दोबारा खोलने का फैसला लिया है। यह पोर्टल 23 से 30 जनवरी तक खुला रहेगा।
निदेशालय द्वारा सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को जारी आदेश में बताया गया है कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 के दौरान 10वीं कक्षा के परिणाम घोषित होने में देरी हुई। जहां दाखिला प्रक्रिया पहली से 30 अप्रैल 2025 तक निर्धारित थी, वहीं 10वीं का परिणाम 15 जून, 2025 को घोषित किया गया। इस कारण कई पात्र छात्र ‘चिराग’ योजना के तहत तय समय में दाखिला नहीं ले सके।
आदेश के अनुसार, ऐसे छात्र जिन्होंने 15 जुलाई, 2025 तक 10वीं से 11वीं में दाखिला ले लिया, लेकिन ‘चिराग’ योजना के तहत उनका डेटा अपलोड नहीं हो पाया, अब वे पोर्टल खुलने के दौरान अपनी मार्कशीट, छात्र विवरण और अन्य आवश्यक दस्तावेज अपलोड कर सकेंगे। शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे वास्तविक रूप से पात्र छात्रों को योजना का लाभ मिल सकेगा। शिक्षा निदेशालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि 276 निजी स्कूलों को कुछ कक्षाओं के लिए पात्र और कुछ के लिए अपात्र पाया गया है। इसका मुख्य कारण स्कूलों द्वारा मान्यता से संबंधित अधूरे दस्तावेज अपलोड करना बताया गया है। कई स्कूल सीनियर सेकेंडरी तक मान्यता प्राप्त होने के बावजूद केवल सेकेंडरी स्तर तक के दस्तावेज अपलोड कर रहे थे।
ऐसे सभी निजी स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपना पूर्ण और सही मान्यता प्रमाण-पत्र पोर्टल पर अपलोड करें। जिला शिक्षा अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि उनके जिलों के संबंधित स्कूल तय समयसीमा के भीतर सभी लंबित दस्तावेज जमा करें। निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में स्थित निजी स्कूलों से समन्वय स्थापित कर पोर्टल खुलने की अवधि में सभी लंबित छात्र डेटा और मान्यता दस्तावेज समय पर अपलोड करवाएं।
शिक्षा विभाग के इस निर्णय से उन छात्रों और अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो समयसीमा के कारण ‘चिराग’ योजना से बाहर हो गए थे। विभाग का कहना है कि यह कदम योजना के उद्देश्य के अनुरूप है, ताकि किसी भी पात्र छात्र को तकनीकी कारणों से लाभ से वंचित न रहना पड़े।