बड़ा झटका: सुप्रीम कोर्ट ने रोकी HCS अधिकारियों की 'IAS' बनने की राह, जानें क्यों लिया गया ये फैसला
punjabkesari.in Wednesday, Mar 25, 2026 - 05:53 PM (IST)
चंडीगढ़: हरियाणा सिविल सेवा (HCS) के करीब एक दर्जन अधिकारियों के लिए भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में पदोन्नत होने का सपना फिलहाल अधर में लटक गया है। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के उस फैसले पर रोक (Stay) लगा दी है, जिसमें अधिकारियों के विरुद्ध दर्ज FIR और चार्जशीट को रद्द (Quash) कर दिया गया था।
यह विवाद 2001-2002 बैच के HCS अधिकारियों की भर्ती और कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। राज्य के सतर्कता ब्यूरो (Vigilance Bureau) ने इन अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों में FIR दर्ज की थी। फरवरी 2026 में, पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने इन अधिकारियों को बड़ी राहत देते हुए कहा था कि 18-20 साल पुराने मामले में बिना किसी ठोस जांच के चार्जशीट दाखिल करना 'अवैध' है। कोर्ट ने FIR को रद्द कर दिया था, जिससे उनके IAS प्रमोशन का रास्ता साफ हो गया था।

राज्य सरकार/शिकायतकर्ता की अपील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत का मानना है कि ऐसे गंभीर मामलों में मेरिट के आधार पर विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता है।
IAS प्रमोशन पर 'ताला' क्यों?
प्रशासनिक नियमों के अनुसार, किसी भी अधिकारी को IAS कैडर में प्रमोट करने के लिए 'विजिलेंस क्लीयरेंस' अनिवार्य होती है। चूंकि अब FIR और कानूनी कार्यवाही फिर से जीवित हो गई है, इसलिए इन अधिकारियों को 'दागी' (Tainted) की श्रेणी में रखा जाएगा। जब तक मामला कोर्ट में लंबित है, UPSC इन अधिकारियों के नाम पदोन्नति के लिए स्वीकार नहीं करेगा। प्रमोशन लिस्ट में नाम होने के बावजूद, अब ये अधिकारी फिलहाल HCS के रूप में ही कार्य करते रहेंगे। इस कानूनी प्रक्रिया से प्रभावित होने वाले अधिकारियों में मुख्य रूप से जगदीप ढांडा, कुलधीर सिंह, सुरेंद्र सिंह, वीणा हुड्डा, जग निवास, कमलेश भादू, वत्सल वशिष्ठ और सरिता मलिक जैसे नाम शामिल हैं।