स्वामी विवेकानंद युवाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत थे- विस अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता

punjabkesari.in Monday, Jul 04, 2022 - 06:56 PM (IST)

चंडीगढ़(चंद्रशेखर धरणी): हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने युवाओं से स्वामी विवेकानंद के दिखाए मार्ग पर चलने का आह्वान करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद का लगभग सवा सौ वर्ष पूर्व दिया संदेश ‘‘उठो, जागो और तब तक न रूको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए’’ आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना उस समय था। गुप्ता ने कहा कि स्वामी विवेकानंद युवाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत थे और उन्होंने युवाओं को ‘मेहनत करो और भगवान पर भरोसा रखो’ का मूल मंत्र दिया था। उन्होंने कहा था कि डर से भागे नहीं बल्कि उसका सामना करें और जो भी कार्य करें, उसे पूरी मेहनत और लग्न के साथ करें, सफलता अवश्य मिलेगी। 

ज्ञानचंद गुप्ता आज स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि के अवसर पर सामुदायिक केंद्र सेक्टर 12ए में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि  के रूप में संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने सामुदायिक केंद्र सेक्टर 12ए का नामकरण स्वामी विवेकानंद सामुदायिक केन्द्र के नाम पर कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद अपने-आप में एक चलते-फिरते एन्साइक्लोपीडिया थे और विश्व में जहां भी गए, वहां अपने ज्ञान का लोहा मनवाया। मानवता उनमें फूट-फूट कर भरी थी। गरीब व्यक्ति की सेवा को वे अपना यश मानते थे। गुप्ता ने बताया कि रबिन्द्रनाथ टैगोर ने कहा था कि यदि आप भारत के बारे में जानना चाहते हैं तो स्वामी विवेकानंद की जीवनी को पढ़ें और उनके विचारों को सुनें। स्वामी विवेकानंद ने आपसी भाईचारे का संदेश दिया और कहा कि व्यक्ति अपने अहम को त्याग कर ही जीवन में सफलता की नई ऊंचाइयां छू सकता है। 

गुप्ता ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 में हुआ और 4 जुलाई 1902 का उनका स्वर्गवास हो गया। मात्र 39 वर्ष की आयु में उन्होंने विश्व में मानवता और भाईचारे का संदेश देने के साथ-साथ भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का प्रचार-प्रसार किया। स्वामी जी ने 11 सितंबर 1893 को उस समय विश्व में ख्याति प्राप्त की जब उन्होंने अमेरिका के शिकागो में विश्व धर्म सम्मेलन के दौरान हिन्दू धर्म पर अपने भाषण की शुरुआत ‘अमरीका के बहनो और भाईयो’ से की। यह दो शब्द सुन कर लगभग 7 हजार लोगों की क्षमता वाला वह हाॅल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उन्होंने विश्व में भारतीय अध्यात्म को नई पहचान दिलवाई। 

उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी ने 1 मई 1897 को कलकत्ता में रामकृष्ण मिशन तथा 9 दिसंबर 1898 को कलकत्ता के निकट गंगा के किनारे बेलूर में रामकृष्ण मठ की स्थापना की। 4 जुलाई 1902 को इसी रामकृष्ण मठ में ध्यानमग्न अवस्था में उन्होंने महासमाधि धारण की। श्री गुप्ता ने कहा कि आज देश के अनेक शहरों में रामकृष्ण मिशन द्वारा स्थापित आश्रमों के माध्यम से मानवता की सेवा के साथ-साथ युवाओं को आगे बढ़ने के लिए नये-नये अवसर प्रदान किए जाने पर कार्य किया जा रहा है।  

नगर निगम महापौर श्री कुलभूषण गोयल ने कहा कि स्वामी विवेकानंद महान् व्यक्तित्व के धनी थे और आज का युवा उनके दिखाए मार्ग पर चल कर अपने जीवन में नयी उचाईयों को छू सकता है। उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष श्री ज्ञानचंद गुप्ता के निर्देशानुसार पंचकूला के सभी सामुदायिक केन्द्रों का नाम देश के शहीदों व महापुरूषों के नाम पर रखे जा रहे हैं। इसी कड़ी में आज यह 9वां सामुदायिक केन्द्र है। आने वाले समय में बाकी बचे सामुदायिक केन्द्रों का नाम भी ऐसी महान विभूतियों के नाम पर रखा जाएगा। 

इस अवसर पर नगर निगम के संयुक्त आयुक्त संयम गर्ग, अधीक्षक अभियंता विजय गोयल, कार्यकारी अभियंता सुमित मलिक, बीजेपी के पूर्व जिला अध्यक्ष दीपक शर्मा, पार्षद गुरमेल कौर, हरेन्द्र मलिक, जय कौशिक, सुरेश वर्मा, सलीम खान, सुनीत सिंगला, नरेन्द्र लुबाणा, अक्षदीप चौधरी, मंडल अध्यक्ष संदीप यादव और युवराज कौशिक, साहित्यकार एमएमए जुनेजा, शहर के प्रतिष्ठित व्यक्ति राजेन्द्र बेनीवाल, एसपी गुप्ता, राकेश अग्रवाल, डीपी सिंघल, महिपाल चौसाला सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

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Content Writer

Vivek Rai

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