आज के बच्चे ही कल के निर्माता और देश के भविष्य के आधार- सीएम सुक्खू
punjabkesari.in Wednesday, Jun 10, 2026 - 12:44 PM (IST)
चंडीगढ़ (धरणी) : राजनीति और प्रशासनिक व्यस्तताओं के बीच जब कोई जनप्रतिनिधि बच्चों के प्रति अपना स्नेह और अपनापन प्रदर्शित करता है तो वह केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं रह जाती, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणादायक संदेश बन जाती है। ऐसा ही एक भावुक और यादगार क्षण उस समय देखने को मिला जब हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हरियाणा के कुरुक्षेत्र से आए नन्हे दिग्विजय सिंह राणा को स्नेहपूर्वक अपनी गोद में उठाकर बच्चों के प्रति अपने विशेष लगाव का परिचय दिया। मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित इस आत्मीय मुलाकात के दौरान वातावरण में औपचारिकता से अधिक अपनापन और स्नेह दिखाई दिया। मुख्यमंत्री के साथ नन्हे दिग्विजय की सहज मुस्कान और उनके चेहरे पर झलकता आत्मविश्वास इस बात का प्रतीक था कि बच्चों के प्रति प्रेम और सम्मान का भाव किसी भी बड़े पद से कहीं अधिक महत्वपूर्ण होता है।
इस अवसर पर रिसर्च स्कॉलर चेतना राणा, रिप्सिका कपूर और रितिका राणा ने भी मुख्यमंत्री के साथ स्मृति चित्र खिंचवाए। यह केवल एक फोटो सत्र नहीं था, बल्कि पीढ़ियों के बीच विश्वास, प्रेरणा और स्नेह का एक सुंदर संगम था। मुख्यमंत्री ने बच्चों और युवाओं से बातचीत करते हुए देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की उस भावना को दोहराया, जिसके कारण उन्हें बच्चों का "चाचा नेहरू" कहा जाता था। मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि "आज के बच्चे ही कल के नेता हैं। आने वाले भारत का भविष्य इन्हीं के हाथों में सुरक्षित है।" उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे के भीतर असीम संभावनाएं छिपी होती हैं। कोई बच्चा भविष्य में मुख्यमंत्री बन सकता है, कोई प्रधानमंत्री, कोई वैज्ञानिक, कोई प्रोफेसर और कोई समाज सुधारक। इसलिए समाज का दायित्व है कि वह बच्चों को केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि अच्छे संस्कार, नैतिक मूल्य और सकारात्मक वातावरण भी प्रदान करे।
यह दृश्य केवल एक फोटो अवसर नहीं था, बल्कि बच्चों के प्रति मुख्यमंत्री के विशेष लगाव और उनके उज्ज्वल भविष्य के प्रति उनकी गंभीर सोच का प्रतीक बन गया। दिग्विजय सिंह राणा अपनी बहनों रितिका राणा, रिप्सिका तथा रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में शोध कार्य कर रही रिसर्च स्कॉलर चेतना राणा के साथ मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे थे। इस दौरान खिंचवाई गई तस्वीर में मुख्यमंत्री का स्नेह और बच्चों के प्रति उनका अपनापन सहज रूप से दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि बच्चों के व्यक्तित्व का निर्माण परिवार और समाज दोनों की संयुक्त जिम्मेदारी है। यदि बचपन में उन्हें सही मार्गदर्शन, स्नेह और प्रेरणा मिले तो वे देश और समाज के आदर्श नागरिक बनकर उभर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से भी आह्वान किया कि वे बच्चों के साथ समय बिताएं, उनकी भावनाओं को समझें और उन्हें अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित करें।
इस आत्मीय मुलाकात ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि बच्चों के प्रति प्रेम और विश्वास ही किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी है। जब देश और प्रदेश के नेतृत्वकर्ता बच्चों को सम्मान और महत्व देते हैं, तब उनके मन में भी बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का आत्मविश्वास पैदा होता है। नन्हे दिग्विजय को गोद में उठाए मुख्यमंत्री सुक्खू का यह भावुक क्षण केवल एक तस्वीर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस सोच का प्रतीक है जिसमें हर बच्चा भविष्य का निर्माता माना जाता है। यह दृश्य मानो कह रहा था कि बच्चों की मुस्कान में ही देश का उज्ज्वल कल बसता है और उनके सपनों को संवारना ही सच्चे अर्थों में राष्ट्र निर्माण है।