हरियाणा से बिहार जाना होगा आसान: 12 नए अंतरराज्यीय बस रूट प्रस्तावित, अंबाला से पूर्णिया तक चलेगा 1470 KM का सबसे लंबा सफर

punjabkesari.in Monday, Nov 02, 2026 - 06:47 PM (IST)

चंडीगढ़(चन्द्र शेखर धरणी): हरियाणा से बिहार जाने वाले यात्रियों के लिए आने वाले समय में लंबी दूरी का सफर पहले से अधिक सुविधाजनक हो सकता है। दोनों राज्यों के बीच सार्वजनिक परिवहन की कनेक्टिविटी बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 12 अंतरराज्यीय बस मार्गों का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके तहत हरियाणा के गुरुग्राम, पानीपत और अंबाला से बिहार के पटना, गया, पूर्णिया और मधुबनी तक बस सेवाएं शुरू करने की योजना है। प्रस्तावित मार्गों में सबसे लंबा सफर अंबाला से पूर्णिया का होगा, जिसकी दूरी करीब 1470 किलोमीटर निर्धारित की गई है।

हरियाणा सरकार ने इस संबंध में अंतरराज्यीय परिवहन समझौते का मसौदा अधिसूचित कर दिया है। आम लोगों, संबंधित पक्षों और अन्य हितधारकों से 30 दिन के भीतर सुझाव एवं आपत्तियां मांगी गई हैं। इस प्रक्रिया के पूरा होने और अंतिम समझौते के प्रकाशन के बाद ही बस संचालन का रास्ता साफ होगा। फिलहाल इन सेवाओं के शुरू होने की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है।

तीन शहरों से बिहार के चार प्रमुख गंतव्यों तक पहुंचेगी बस सेवा

प्रस्तावित परिवहन नेटवर्क में हरियाणा के तीन प्रमुख शहरों को बिहार के चार महत्वपूर्ण शहरों से जोड़ने की योजना बनाई गई है। इससे न केवल बिहार जाने वाले यात्रियों को सीधा परिवहन विकल्प मिल सकेगा, बल्कि रास्ते में पड़ने वाले उत्तर प्रदेश के कई शहरों की कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी।

पटना के लिए गुरुग्राम से 1044 किलोमीटर, पानीपत से 1069 किलोमीटर और अंबाला से 1274 किलोमीटर के तीन अलग-अलग मार्ग प्रस्तावित हैं। गुरुग्राम से चलने वाली बस सोहना, पलवल, अलीगढ़, लखनऊ, आजमगढ़, बक्सर और आरा होते हुए पटना पहुंचेगी। पानीपत से प्रस्तावित मार्ग दिल्ली, नोएडा, आजमगढ़, बक्सर और आरा से होकर जाएगा। वहीं अंबाला से पटना जाने वाली बस करनाल, मेरठ, बुलंदशहर, एटा, लखनऊ, अयोध्या, बस्ती, गोरखपुर, कुशीनगर और गोपालगंज के रास्ते पहुंचेगी।

पूर्णिया के लिए भी तीनों शहरों से बस कनेक्टिविटी का प्रस्ताव है। गुरुग्राम से पूर्णिया की दूरी 1267 किलोमीटर, पानीपत से 1361 किलोमीटर और अंबाला से 1470 किलोमीटर रखी गई है। इन मार्गों में लखनऊ, गोरखपुर, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर और दरभंगा जैसे महत्वपूर्ण शहर शामिल होंगे।

गया और मधुबनी के लिए भी अलग-अलग मार्ग

गया के लिए गुरुग्राम से दो वैकल्पिक मार्ग प्रस्तावित किए गए हैं। इनकी लंबाई क्रमश: 1081 और 1099 किलोमीटर होगी। दोनों मार्गों में दिल्ली, अलीगढ़, फिरोजाबाद, कानपुर, प्रयागराज, मुगलसराय, भभुआ, सासाराम और औरंगाबाद क्षेत्र को शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त अंबाला से गया तक 1224 किलोमीटर का मार्ग प्रस्तावित है।

मधुबनी के लिए गुरुग्राम से 1183 किलोमीटर, पानीपत से 1264 किलोमीटर और अंबाला से 1378 किलोमीटर की दूरी वाले मार्ग निर्धारित किए गए हैं। इन रास्तों में लखनऊ, गोरखपुर, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर और दरभंगा जैसे प्रमुख पड़ाव शामिल रहेंगे।

बसों की टाइमिंग और किराया बाद में होगा निर्धारित

समझौते के मसौदे में फिलहाल बसों के मार्ग और उनकी दूरी का विवरण दिया गया है। बसें किस समय रवाना होंगी, प्रतिदिन कितने चक्कर लगाएंगी और उनका किराया कितना होगा, इसका निर्धारण बाद में संबंधित परिवहन प्राधिकरण करेंगे। इसके लिए दोनों राज्यों के परिवहन उपक्रमों से विचार-विमर्श किया जाएगा।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत एक्सप्रेस, डीलक्स, डीलक्स एसी और एसी स्लीपर जैसी विभिन्न श्रेणियों की बसें संचालित की जा सकेंगी। बसों पर गंतव्य का नाम हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में अंकित करना अनिवार्य होगा। जरूरत के अनुसार दोनों राज्यों के परिवहन प्राधिकरण नए मार्ग जोड़ने और पहले से निर्धारित मार्गों पर बसों के फेरों की संख्या बढ़ाने का फैसला भी कर सकेंगे।

बसों की उम्र और तकनीकी मानकों पर भी सख्ती

यात्रियों की सुविधा और परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के लिए बसों की उम्र को लेकर भी नियम प्रस्तावित किए गए हैं। मसौदे में 10 वर्ष तक की उम्र वाली बसों के संचालन की अनुमति का प्रावधान है। वाहनों को बदलने की स्थिति में नए और उच्चतर मॉडल के वाहन को प्राथमिकता देनी होगी। नए स्थायी परमिट और पुराने वाहन के स्थान पर नया वाहन लगाने के लिए संबंधित राज्यों में स्वीकृत बस बॉडी कोड के अनुरूप वाहन होना जरूरी होगा।

टैक्स बकाया होने पर नहीं मिलेगा नया परमिट

दोनों राज्यों के बीच टैक्स चोरी और परमिट संबंधी अनियमितताओं को रोकने के लिए इलेक्ट्रॉनिक निगरानी व्यवस्था भी प्रस्तावित की गई है। स्थायी बस परमिट और दूसरे राज्य से प्रतिहस्ताक्षरित परमिटों का विवरण प्रत्येक तीन महीने में साझा किया जाएगा।

किसी राज्य में जारी स्थायी परमिट को दूसरे राज्य में मान्यता दिलाने के लिए संबंधित परिवहन प्राधिकरण का प्रतिहस्ताक्षर जरूरी होगा। यदि किसी आवेदक पर दूसरे राज्य का परिवहन टैक्स बकाया है तो उसे नया परमिट जारी नहीं किया जाएगा। परमिट के नवीनीकरण, वाहन बदलने और परमिट सरेंडर करने के दौरान भी दोनों राज्यों के राजस्व हितों का ध्यान रखना होगा।

पर्यटक बसों के लिए 15 दिन की समय सीमा

अनुबंध पर संचालित होने वाली यात्री बसों और पर्यटक वाहनों के लिए अलग नियम रखे गए हैं। अस्थायी परमिट के तहत एक बस को एक ही पक्ष किराये पर ले सकेगा और उसका उपयोग एक निर्धारित आने-जाने की यात्रा के लिए किया जा सकेगा। ऐसे परमिट की अवधि एक बार में अधिकतम 15 दिन होगी।

परमिट में आगे जाने और वापसी की तारीख दर्ज करनी होगी। पर्यटक बसों के मामले में यात्रा कार्यक्रम, अलग-अलग स्थानों पर पहुंचने और वहां से रवाना होने की तारीख तथा यात्रियों की सूची देना भी अनिवार्य होगा।

जीपीएस और इमरजेंसी बटन के बिना नहीं चलेगी बस

यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित समझौते में बसों के भीतर वाहन लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस और कम से कम एक आपातकालीन बटन लगाने की शर्त रखी गई है। विशेष छूट प्राप्त वाहनों को इस प्रावधान से बाहर रखा जा सकता है। इसके अलावा बस चालकों का पुलिस सत्यापन भी जरूरी होगा।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से होकर गुजरने वाले वाहनों को लागू प्रदूषण मानकों का पालन करना होगा। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी अधिकृत एजेंसियों के निर्देश भी बाध्यकारी होंगे। रास्ते में बस खराब होने पर दोनों राज्यों को एक-दूसरे के वाहनों को प्राथमिकता के आधार पर सहायता उपलब्ध करानी होगी। संबंधित राज्य अपने क्षेत्र में चलने वाली बसों और उनके चालक-परिचालकों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।

एनसीआर के लिए पहले से लागू समझौता रहेगा प्रभावी

मसौदे में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के परिवहन संचालन को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई है। दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के बीच एनसीआर में यात्री, मालवाहक और अनुबंधित वाहनों के संचालन के लिए पहले से लागू साझा परिवहन समझौता प्रभावी रहेगा।

हरियाणा और बिहार के बीच प्रस्तावित समझौता उन वाहनों के संचालन को नियंत्रित करेगा जो एनसीआर के बाहर से शुरू होते हैं, वहां समाप्त होते हैं अथवा एनसीआर से होकर गुजरते हैं। दोनों राज्यों के प्रतिनिधियों की सालाना बैठक में समझौते के क्रियान्वयन की समीक्षा भी की जा सकेगी। नए सार्वजनिक परिवहन मार्ग को शामिल करने के लिए दोनों राज्यों की सहमति अनिवार्य होगी।

अभी इंतजार करना होगा अंतिम मंजूरी का

हरियाणा और बिहार के बीच प्रस्तावित यह परिवहन समझौता लंबी दूरी की बस कनेक्टिविटी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। हालांकि 12 मार्गों का खाका तैयार होने के बावजूद यात्रियों को बस सेवा शुरू होने के लिए अभी इंतजार करना पड़ेगा। पहले 30 दिन तक सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं। इनके निस्तारण और अंतिम अधिसूचना के बाद ही परमिट, समय-सारिणी, किराया और बसों के संचालन से जुड़ी पूरी व्यवस्था सामने आएगी।


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Isha

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