केंद्रीय मंत्री खट्टर ने मैट्रो में किया सफर, बोले- लास्ट माइल कनैक्टिविटी से यात्रा को सरल व सुगम बनाना ही हमारा लक्ष्य

punjabkesari.in Friday, Mar 06, 2026 - 09:25 PM (IST)

नई दिल्ली (संजय अरोड़ा): केंद्रीय ऊर्जा एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर अपने अनूठे अंदाज व कार्यशैली को लेकर भी अपनी एक खास पहचान रखते हैं और नई योजनाओं को धरातल पर उतारने की वजह से भी वे अक्सर सुर्खियों में नजर आते हैं। शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल दिल्ली स्थित अपने आवास से ऑटो के जरिए मैट्रो स्टेशन पर पहुंचे। उन्होंने मैट्रो में आम यात्रियों के साथ सफर किया। यात्रियों से मैट्रो के सफर व सुविधा के बारे में जानकारी ली। उन्होंने यात्रियों से परिवहन सेवा को और अधिक सशक्त बनाने के लिए सुझाव भी मांगे। 

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मनोहर लाल खट्टर ने मैट्रो रेल की कमियों के बारे में पूछा, सुविधा के बारे में जानकारी ली। यात्रियों से उनका अनुभव भी जाना। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने मैट्रो स्टेशन पर सफाई व्यवस्था व यात्रियों को दी जा रही सुविधाओं को लेकर भी मैट्रो अधिकारियों से बातचीत की और उन्हें आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने फेसबुक पर लिखा कि लास्ट माइल कनैक्टिविटी’ हमारे लिए महज एक शब्द नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आम जनमानस के जनजीवन को आसान, तेज और बेहतर बनाने की हमारी प्रतिबद्धता भी है। हमारा लक्ष्य है कि नागरिकों को मैट्रो के माध्यम से घर से गंतव्य तक कनैक्टिविटी मिले, जिससे जो लोग अपने रोजाना के जीवन में मैट्रो का उपयोग करते हैं, उनका सफर और भी सहज, सरल व सुगम बन सके।  

 इसी विजन को आगे बढ़ाते हुए आज मैंने स्वयं ‘लास्ट माइल कनैक्टिविटी’ का अनुभव किया और दिल्ली मैट्रो रेल कॉर्पोरेशन के अधिकारियों के साथ एक विस्तृत समीक्षा बैठक कर मैट्रो के माध्यम से घर से गंतव्य तक कनैक्टिविटी को मजबूत करने, एकीकृत और बेहतर करने लिए दिशा-निर्देश दिए। हमारा प्रयास मैट्रो को केवल यात्रा का माध्यम बनाने का नहीं है, बल्कि हर नागरिक के लिए घर से गंतव्य तक भरोसेमंद सारथी बनाने का है।’ गौरतलब है कि जून 2024 में केंद्रीय ऊर्जा एवं शहरी विकास मंत्री बनने के बाद से ही मनोहर लाल खट्टर लगातार अपनी विभागीय परियोजनाओं को गति दे रहे हैं। खासकर वे दिल्ली, कोलकत्ता, भोपाल, मुम्बई जैसे महानगरों में गतिशील शहरी परिवहन सुविधा उपलब्ध करवाने को लेकर संजीदा नजर आते हैं। मैट्रो स्टेशन से घर जाने की वीडियो भी सामने आई है।   

वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के मकसद से लोगों को घर से गंतव्य तक बेहतर मैट्रो परिवहन सेवा देने के लिए भी गंभीर नजर आते हैं। यही वजह है कि शुक्रवार को उन्होंने खुद ऑटो के जरिए यात्रा की। मैट्रो स्टेशन पहुंचे। स्टेशन पर यात्रियों से संवाद किया और बाद में मैट्रो में आमजन की तरह ही सफर भी किया। खास बात यह है कि दिल्ली मैट्रो का विस्तार हो रहा है। यह प्रोजेक्ट 12 हजार करोड़ रुपए का है। दिल्ली मैट्रो से हर दिन 65 लाख लोग सफर करते हैं। अब मैट्रो का नेटवर्क 395 किलोमीटर से बढ़कर 400  किलोमीटर से ज्यादा हो जाएगा। इस विस्तार में 13 नए स्टेशन बनेंगे। इनमें 10 स्टेशन जमीन के नीचे होंगे और 3 स्टेशन ऊपर बने होंगे। इस प्रोजैक्ट को पूरा होने में 3 साल लगेंगे। यह 16 किलोमीटर लंबा होगा। इस पर 12015 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

विश्व का तीसरा सबसे बड़ा मैट्रो नेटवर्क देश बना भारत

खास बात यह है कि भारत का परिचालन मैट्रो नेटवर्क 2014 में 5 शहरों में फैले 248  किलोमीटर से बढक़र अब 26 शहरों में 1,013  किमी हो गया है, जो मात्र 12 वर्षों में 763  किमी की वृद्धि दर्शाता है। प्रतिदिन यात्रियों की औसत संख्या 28 लाख (2013-14) से बढक़र 1.12 करोड़ से अधिक हो गई है , जो शहरी आवागमन में एक परिवर्तनकारी बदलाव का संकेत है। नई लाइनों के चालू होने की गति में नौ गुणा वृद्धि हुई है। 2014 से पहले यह 0.68  किलोमीटर प्रति माह थी, जो आज बढक़र लगभग 6  किलोमीटर प्रति माह हो गई है। 2026-27 के लिए मैट्रो का वार्षिक बजट 34,807 करोड़ है, जो 2013-14 के 5,798 करोड़ से छह गुणा से भी अधिक है।  

खास बात यह है कि केंद्रीय शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल की पहल के बाद शहरी आवागमन को गति देने और टिकाऊ परिवहन समाधान सुनिश्चित करने के लिए, भारत सरकार ने कई परिवर्तनकारी कदम उठाए हैं। इन कदमों का उद्देश्य मैट्रो परियोजनाओं को टिकाऊ, आर्थिक रूप से व्यवहार्य और तकनीकी रूप से उन्नत बनाना है। दूरदर्शी नीतियों, साहसिक निवेशों और स्मार्ट साझेदारियों के माध्यम से, सरकार एक स्वच्छ, तेज और अधिक संयोजी शहरी भविष्य की नींव रख रही है। खास बात यह है कि भारत की मैट्रो रेल प्रणालियां हरित नवाचारों को अपना रही हैं।  

दिल्ली मैट्रो ने ओखला विहार स्थित एक ऊंचे पुल पर ऊर्ध्वाधर द्वि-आयामी सौर ऊर्जा संयंत्र और खैबर पास डिपो पर 1 मैगावाट का छत पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया है , जो भूमि-मुक्त नवीकरणीय ऊर्जा उपयोग में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। पुनर्योजी ब्रेकिंग सिस्टम जैसी अन्य हरित पहलें, जिन्हें मैट्रो स्टेशनों में व्यापक रूप से अपनाया गया है, ब्रेकिंग ऊर्जा को बिजली में परिवर्तित करके बिजली बचाने और कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद करती हैं। इसके अतिरिक्त, दिल्ली, कोच्चि, नागपुर और पुणे जैसे शहरों के कई मैट्रो स्टेशनों को भारतीय हरित भवन परिषद का प्रमाणन प्राप्त हुआ है , जो पर्यावरण के अनुकूल बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देता है। ये प्रयास भारत के सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप हैं और स्वच्छ शहरी परिवहन में मैट्रो की बढ़ती भूमिका को दर्शाते हैं।   

केंद्रीय मंत्री की पहल पर आयात पर निर्भरता हो रही कम

केंद्रीय शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल की पहल के बाद ही महत्वाकांक्षी मेक इन इंडिया अभियान के तहत , सरकार ने मैट्रो कारों के कम से कम 75 प्रतिशत और प्रमुख उपकरणों और उप-प्रणालियों के 25 फीसदी की घरेलू खरीद के लिए प्रावधान किए हैं। यह स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने और परिवहन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक साहसिक कदम है। 

पिछले दस वर्षों में भारत ने अपने मेट्रो नेटवर्क के विस्तार में लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपए ( 28.86 बिलियन) का निवेश किया है। इस गति ने मैट्रो कोचों के स्थानीय निर्माण को गति प्रदान की है। रक्षा मंत्रालय के अधीन एक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड ने मई 2025 तक दिल्ली, जयपुर, कोलकाता, बेंगलुरु और मुंबई जैसे शहरों में 2,000 से अधिक मैट्रो कोचों की आपूर्ति की है, जिससे घरेलू क्षमताओं को मजबूती मिली है और आयात पर निर्भरता कम हुई है। देश में मैट्रो नेटवर्क के विकास को वैश्विक साझेदारियां भी गति प्रदान कर रही हैं। ऐसी ही एक परियोजना, मुंबई मैट्रो लाइन-तीन 23,136 करोड़ (2.67 बिलियन) के भारी निवेश के साथ शहरी परिवहन व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाने की उम्मीद है।

कुल वित्तपोषण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा 13,235 करोड़ (1.53 बिलियन), यानी 57.2 प्रतिशत, जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजैंसी द्वारा ऋण सहायता के रूप में प्रदान किया जा रहा है। शेष वित्तपोषण भारत सरकार, महाराष्ट्र राज्य सरकार और मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है, जो इसे अवसंरचना विकास में अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू सहयोग का एक सशक्त उदाहरण बनाता है।

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Content Editor

Krishan Rana

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