विज ने शेयर की 1992 की दुर्लभ तस्वीर: पीएम मोदी, मुरली मनोहर जोशी और सुषमा स्वराज के साथ नजर आए हरियाणा के मंत्री, याद आई ''एकता यात्रा''

punjabkesari.in Monday, Oct 19, 2026 - 10:48 AM (IST)

चंडीगढ़(चंद्र शेखर धरणी): राजनीति में कुछ रिश्ते समय के साथ बनते हैं, जबकि कुछ रिश्तों की नींव विचारधारा, संघर्ष और साझा उद्देश्यों के दौर में पड़ती है। हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज द्वारा सोशल मीडिया पर साझा की गई वर्ष 1992 की एक दुर्लभ तस्वीर ने उनके और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच दशकों पुराने राजनीतिक जुड़ाव को फिर चर्चा में ला दिया है। यह तस्वीर केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि उस दौर की भी याद दिलाती है, जब भारतीय जनता पार्टी के अनेक नेता राष्ट्रवादी विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए संगठनात्मक स्तर पर सक्रिय थे।

तस्वीर में अनिल विज के साथ तत्कालीन भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी, नरेंद्र मोदी और सुषमा स्वराज भी नजर आ रहे हैं। यह चित्र उस समय का है, जब कन्याकुमारी से कश्मीर तक निकाली गई एकता यात्रा के माध्यम से राष्ट्रीय एकता और अखंडता का संदेश दिया जा रहा था। यात्रा का समापन श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराने के उद्देश्य से हुआ था। नरेंद्र मोदी इस यात्रा के प्रबंधन से जुड़े थे, जबकि अनिल विज को हरियाणा में यात्रा को सफल बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके लिए गठित केसरिया वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उन्होंने संगठनात्मक भूमिका निभाई थी।

अनिल विज ने तस्वीर साझा करते हुए बताया कि यह दुर्लभ फोटो उन्हें एक मित्र के माध्यम से मिली है। अंबाला छावनी के स्टाफ रोड पर आयोजित जनसभा के मंच का यह चित्र है। उस मंच पर डॉ. मुरली मनोहर जोशी, नरेंद्र मोदी और सुषमा स्वराज सहित कई प्रमुख नेता मौजूद थे। तीन दशक से अधिक पुरानी इस तस्वीर ने भाजपा की उस पीढ़ी की यादें ताजा कर दी हैं, जिसने संगठन के विस्तार और राष्ट्रीय मुद्दों पर जनजागरण के दौर में सक्रिय भूमिका निभाई।

एकता यात्रा ने जोड़े थे संगठन और नेतृत्व के सूत्र
वर्ष 1991-92 की एकता यात्रा भाजपा के राजनीतिक इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय रही। उस समय जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय एकता और तिरंगे के सम्मान का मुद्दा प्रमुखता से उठाया जा रहा था। कन्याकुमारी से शुरू हुई इस यात्रा का उद्देश्य देश के दक्षिणी छोर से उत्तर तक राष्ट्रीय एकता का संदेश पहुंचाना था। श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराना इस अभियान का प्रमुख पड़ाव था।

इस अभियान में नरेंद्र मोदी की संगठनात्मक भूमिका और हरियाणा में अनिल विज की सक्रियता दोनों महत्वपूर्ण थीं। एक ओर यात्रा के संचालन और प्रबंधन से जुड़े मोदी थे, तो दूसरी ओर हरियाणा में जनसभा और संगठनात्मक गतिविधियों को सफल बनाने की जिम्मेदारी निभा रहे विज। यही वह दौर था, जब पार्टी के विभिन्न स्तरों पर काम करने वाले नेताओं के बीच वैचारिक और संगठनात्मक संबंध मजबूत हुए।

आज जब नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं और अनिल विज हरियाणा सरकार में तीन महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, तब इस तस्वीर का महत्व और बढ़ जाता है। यह दोनों नेताओं के राजनीतिक सफर के शुरुआती वर्षों की साझा पृष्ठभूमि को सामने लाती है। हालांकि, तस्वीर अपने आप में वर्तमान राजनीतिक समीकरणों का प्रमाण नहीं है, लेकिन यह उस ऐतिहासिक दौर की जरूर याद दिलाती है, जिसमें दोनों नेताओं ने पार्टी के लिए अलग-अलग स्तरों पर काम किया।

सात बार विधायक, भाजपा के अनुभवी नेताओं में शुमार
अंबाला छावनी से सात बार विधायक चुने गए अनिल विज हरियाणा भाजपा के सबसे अनुभवी नेताओं में शामिल हैं। लंबे राजनीतिक सफर में उन्होंने संगठनात्मक कार्यकर्ता से लेकर कैबिनेट मंत्री तक की भूमिका निभाई है। भाजपा सरकारों में तीन बार कैबिनेट मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभालने के साथ उन्होंने स्वास्थ्य, गृह, खेल और स्थानीय निकाय जैसे विभागों में भी काम किया है।
वर्तमान में ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम विभाग उनके पास हैं। बिजली व्यवस्था में सुधार, हरियाणा रोडवेज की सेवाओं को बेहतर बनाने और श्रमिकों के कल्याण से जुड़े विषय उनकी प्राथमिकताओं में शामिल हैं। प्रशासनिक मामलों में सख्त रुख और अधिकारियों से जवाबदेही तय कराने की शैली ने उन्हें अलग पहचान दी है।
विज की राजनीति की एक विशेषता उनकी बेबाकी भी रही है। वे सार्वजनिक मंचों पर अपनी बात स्पष्ट रूप से रखने के लिए जाने जाते हैं। समर्थक इसे उनकी निर्भीकता मानते हैं, जबकि राजनीतिक हलकों में उनकी कार्यशैली अक्सर चर्चा का विषय रहती है। 'गब्बर' के नाम से चर्चित उनकी सख्त छवि के साथ 'बाबा' के रूप में जरूरतमंदों के प्रति उनका अपनापन भी जुड़ा हुआ है।

मोदी के नेतृत्व में भाजपा का सफर, विज की अपनी पहचान
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने राष्ट्रीय राजनीति में व्यापक विस्तार हासिल किया है। इस दौरान पार्टी के पुराने संगठनात्मक कार्यकर्ताओं और नेताओं का अनुभव भी उसकी राजनीतिक यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। अनिल विज उन नेताओं में हैं, जिन्होंने हरियाणा में लंबे समय तक पार्टी की राजनीति को जमीनी स्तर पर आगे बढ़ाया और अंबाला छावनी को अपना प्रमुख राजनीतिक आधार बनाया।

विज की पहचान केवल मंत्री या विधायक तक सीमित नहीं है। अंबाला छावनी में विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने, सार्वजनिक सुविधाओं में सुधार और स्थानीय समस्याओं को उठाने के कारण भी वे अपने क्षेत्र में चर्चा में रहते हैं। अंबाला में हवाई संपर्क से जुड़ी परियोजना और 1857 की क्रांति की स्मृतियों को समर्पित शहीदी स्मारक जैसे कार्य उनके विकास एजेंडे के प्रमुख हिस्सों में गिने जाते हैं।

उनकी राजनीतिक शैली में संगठन के प्रति प्रतिबद्धता, प्रशासनिक सख्ती और जनसंपर्क का मेल दिखाई देता है। लंबे अनुभव के कारण उन्हें प्रदेश की राजनीति में एक वरिष्ठ और प्रभावशाली चेहरा माना जाता है।

तीन दशक पुरानी तस्वीर, राजनीतिक सफर की अहम याद
अनिल विज द्वारा साझा की गई यह तस्वीर उस समय की याद दिलाती है, जब आज के कई बड़े नेता संगठनात्मक गतिविधियों के माध्यम से अपनी राजनीतिक पहचान मजबूत कर रहे थे। उस दौर में हरियाणा में एकता यात्रा को सफल बनाने की जिम्मेदारी निभाने वाले विज आज प्रदेश सरकार में महत्वपूर्ण विभागों का संचालन कर रहे हैं, जबकि यात्रा के प्रबंधन से जुड़े नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं।

राजनीति में पद और परिस्थितियां बदलती रहती हैं, लेकिन पुराने संगठनात्मक अनुभव नेताओं के सफर का महत्वपूर्ण हिस्सा बने रहते हैं। वर्ष 1992 की यह तस्वीर इसी ऐतिहासिक जुड़ाव की एक झलक पेश करती है। यह अनिल विज के राजनीतिक जीवन के उस अध्याय को सामने लाती है, जब वे हरियाणा में पार्टी के कार्यक्रमों को मजबूत बनाने में जुटे थे और नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय स्तर पर संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभा रहे थे।

तीन दशक से अधिक पुराने इस प्रसंग का फिर सामने आना भाजपा की पुरानी पीढ़ी के संगठनात्मक सफर को याद करने का अवसर भी है। अतीत की यह तस्वीर अनिल विज के लंबे राजनीतिक अनुभव और नरेंद्र मोदी के साथ एकता यात्रा के दौर में जुड़े साझा संगठनात्मक अध्याय को रेखांकित करती है।
 


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Content Writer

Isha

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