भाखड़ा में बढ़ा जलस्तर, हरियाणा-पंजाब को पानी इस्तेमाल करने की सलाह; मानसून से पहले BBMB अलर्ट
punjabkesari.in Friday, Jun 12, 2026 - 06:36 PM (IST)
चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी) : उत्तरी भारत में हाल के दिनों में हुई बेमौसमी बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों से बढ़ी जल आवक के कारण भाखड़ा बांध का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। स्थिति को देखते हुए भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) ने हरियाणा, पंजाब समेत सभी हिस्सेदार राज्यों को अपने-अपने हिस्से का पानी अधिक से अधिक उपयोग करने की सलाह दी है, ताकि मानसून के दौरान संभावित बाढ़ के खतरे को कम किया जा सके। बीबीएमबी के अनुसार भाखड़ा बांध का जलस्तर फिलहाल 1,578.07 फीट तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 21.47 फीट अधिक है। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक जून के अंतिम सप्ताह या जुलाई के पहले सप्ताह में मानसून उत्तर भारत में सक्रिय हो सकता है। ऐसे में जलाशय में पर्याप्त खाली क्षमता बनाए रखना जरूरी हो गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून के दौरान भारी बारिश होती है और पहाड़ों से बर्फ पिघलने का पानी भी अधिक मात्रा में आता है, तो गोविंद सागर झील पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे हालात में निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा होने की आशंका रहती है। इसी कारण बीबीएमबी पहले से जल प्रबंधन की रणनीति तैयार करने में जुट गया है। धान की रोपाई का सीजन शुरू होने के कारण बीबीएमबी ने विशेष रूप से पंजाब और हरियाणा को अपने निर्धारित कोटे का पानी उठाने की सलाह दी है। पंजाब सरकार अपनी अतिरिक्त मांग बोर्ड को भेज चुकी है, जबकि अन्य राज्यों से भी जरूरत के अनुसार जल उपयोग बढ़ाने को कहा गया है।
पानी के बंटवारे की बात करें तो निर्धारित व्यवस्था के अनुसार पंजाब को 5.512 मिलियन एकड़ फुट (एमएएफ), हरियाणा को 2.987 एमएएफ तथा राजस्थान को 3.318 एमएएफ पानी आवंटित किया जाता है। यह जल वितरण चक्र प्रत्येक वर्ष 21 मई से शुरू होकर अगले वर्ष 20 मई तक चलता है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष पानी के वितरण को लेकर पंजाब और हरियाणा के बीच तीखा विवाद सामने आया था। हरियाणा ने अपनी जरूरत के अनुसार अतिरिक्त पानी की मांग की थी, जबकि पंजाब ने इसका विरोध किया था। यह विवाद राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर से आगे बढ़कर न्यायालय तक पहुंच गया था। हालांकि इस बार जल उपलब्धता बेहतर होने के कारण फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।
बीबीएमबी हर वर्ष मानसून की स्थिति, बांधों में जल आवक और उपलब्ध भंडारण क्षमता का आकलन कर राज्यों के लिए जल प्रबंधन की रणनीति तैयार करता है। मौजूदा हालात में बोर्ड का फोकस मानसून से पहले जलाशय में पर्याप्त जगह सुनिश्चित करने और संभावित बाढ़ जोखिम को कम करने पर है।