किसानों के लिए हर साल 17 योजनाओं के माध्यम से करते हैं 486 करोड रुपए खर्च :डॉ अर्जुन सिंह

punjabkesari.in Thursday, Feb 03, 2022 - 04:34 PM (IST)

चंडीगढ़( चंद्रशेखर धरणी): 1 नवंबर 1966 को हरियाणा गठन के बाद किसानों को आर्थिक रूप से संपन्न बनाने के लिए तमाम सरकारों द्वारा तमाम कोशिशें की गई। तरह-तरह की योजनाओं से किसानों के हित में कार्य किए गए। लेकिन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य को लेकर प्रदेश सरकार ने विभिन्न योजनाओं और अनुदान के माध्यम से किसानों के हित में कार्य की गति में तेजी लाने का काम किया है। हालांकि हरियाणा गठन के बाद से ही ग्रीन रिवॉल्यूशन पर तेजी से काम हो रहा है। लेकिन पुराने समय में प्रदेश ही नहीं देश के लिए सबसे बड़ा मुद्दा फूड सिक्योरिटी यानि देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पर्याप्त अनाज को उत्पन्न करना था, ताकि भारत दूसरे देशों के इंपोर्ट पर निर्भर ना रहे। इस दिशा में पंजाब के बाद हरियाणा देश के लिए सबसे बड़ा प्रोड्यूसर और कंट्रीब्यूटर साबित हुआ।

इस दिशा में हमारे प्रदेश के कृषि वैज्ञानिकों और विभाग की मदद से आधुनिक टेक्नोलॉजी ने एक विशेष जिम्मेदारी निभाई। इनकी मदद से ही आज हमारा भारत एक्सपोर्ट करने लायक बन पाया है।  देश के सामने फूड सिक्योरिटी के साथ-साथ उनमें मौजूद न्यूट्रिशियन की पर्याप्त मात्रा भी बनाए रखना था। इस क्षेत्र में समय के बदलाव के साथ-साथ 1990 में प्रदेश सरकार द्वारा बागवानी विभाग का निर्माण किया गया। 30-31 साल के बाद अब इसमें और अहम बदलाव किए गए, क्योंकि देश में बढ़ती आबादी के साथ-साथ चीजों की खपत में भी काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जिसके चलते बागवानी विभाग में फलों के साथ-साथ सब्जियां- मसालेदार फसलें- फूल- शहद- मशरूम और सुगंधित पौधों की पैदावार की जिम्मेदारी भी सौंपी गई। 

 

इस बारे प्रदेश बागवानी विभाग के महानिदेशक डॉ अर्जुन सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि आज की खेती टेक्नोलॉजी पर पूरी तरह से आधारित है। पुरानी परंपरागत खेती से न तो फसलों के उत्पादन में बढ़ोतरी की जा सकती है और ना ही किसानों की आय को बढ़ाना संभव है। क्योंकि बागवानी फसलें एमएसपी पर आश्रित नहीं होती। बल्कि मार्केट डिमांड के हिसाब से बिक्री होती हैं। इस कारण बागवानी विभाग किसानों की आमदनी को बढ़ाने के लिए क्वालिटी को बढ़ाने के साथ-साथ कंजूमर के साथ जुड़ने तक की पूरी फैसिलिटी किसानों को देने में मदद करता है। बागवानी विभाग पोली हाउसिज जैसी हाई टेक्नोलॉजी में भी बड़ी मात्रा में सब्सिडी देकर किसानों के हौसले में बढ़ोतरी करता है। इन्हीं कारणों से आज बागवानी विभाग की बोई जाने वाली फसलों का रकबा 10 गुना से भी अधिक बड़ा है और हमारा लक्ष्य 2030 तक 7 फ़ीसदी से 15 फ़ीसदी तक ले जाकर उत्पादन को 3 गुना करने का लक्ष्य है।

दोगुना रखने में 3 गुना उत्पादन लेने के लिए प्रति एकड़ डेढ़ गुणा प्रोडक्शन ले जानी होगी। इसी से ही किसानों की आमदनी को बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए बेहतरीन तकनीक के साथ-साथ किसानों को हम आज 17 योजनाओं- अनुदानो के माध्यम से लगभग 486 करोड रुपए का बजट हर साल देते हैं। किसान को बाग लगाने, सब्जी- फूल या मशरूम बोने के लिए डायरेक्ट अनुदान का प्रोविजन तो है ही साथ-ही-साथ पानी के तालाब इत्यादि अगर कुछ किसान मिलकर बनाते हैं तो 20 लाख के तालाब बनाने पर शत-प्रतिशत का अनुदान दिया जाता है और यह तालाब अकेले किसान के बनाने पर 10 में से 7 लाख का अनुदान दिया जाता है। नेट और पाली हाउसेस या संरक्षित खेती पर प्रदेश के किसानों को 65 फ़ीसदी अनुदान देने का प्रोविजन है। वर्मी कंपोस्ट इत्यादि ऑर्गेनिक खेती के शेड इत्यादि के लिए भी काफी सब्सिडी दी जाती है। साथ ही विभाग फसल की तोड़ाई के बाद कोल्ड स्टोर, पैकहाउस, ट्रांसपोर्टेशन इत्यादि के लिए रेफ्रिजरेटेड, बेहतर मार्किट सेटअप के लिए 35 से 90 फ़ीसदी तक अनुदान देती है। किसानों की फसलों के क्वालिटी को बढ़ाने तथा मार्किट बनाने के लिए भी किसानों को सब्सिडी देने की योजनाएं सरकार ने बनाई हुई हैं।

बागवानी विभाग के महानिदेशक डॉ अर्जुन सिंह ने बताया कि लगातार बदल रहे क्लाइमेट से फसलों पर खासा नुकसान देखने को मिलता है। लेकिन टेक्नोलॉजी के प्रयोग से बे- मौसमी फल व सब्जियों का उत्पादन करके किसान अपने आमदनी को बढ़ा रहे हैं। आज गोभी जो केवल अक्टूबर-नवंबर में ग्राहक को मिला करते थी, मटर भी केवल कुछ ही माह मिलते थे, आज इस प्रकार से बहुत सी फसलें पूरा साल उत्पादित की जा रही है। प्रदेश सरकार ने इसकी जरूरत को समझते हुए बहुत से फसलों के लिए प्रौद्योगिकी और अनुसंधान संस्थानों का निर्माण किया हुआ है। आलू के लिए शामगढ़ (नीलोखेड़ी), भुना (फतेहाबाद) में अमरूद इत्यादि को लेकर प्रौद्योगिकी संस्थानों का निर्माण किया गया है और बेहतर रिजल्ट प्रदेश को मिल रहे हैं। हम प्रदेश के किसानों की आमदनी को दोगुना करने के लिए खेती करने के साथ-साथ उनकी फसलों की तोडाई के बाद मार्केट को पहचानने, स्टोर करने, पैक करने, ब्रांडिंग करने और ग्राहक तक पहुंचाने की जानकारी भी उपलब्ध करवाते हैं।

आज बहुत सी कंपनियां डायरेक्ट किसानों से उनके खेतों में ही फसलों को खरीद रही हैं। जिससे किसानों को फसल बेचने में आसानी होती है और कंपनियों को एक ही जगह पर अच्छी क्वालिटी की फसल भी मिल जाती है। आज सब्जियों की खरीद-फरोख्त मंडी के बाहर पैरेलल मार्किट में होनी शुरू हुई है। किसान आज अपने पैकहाउस बना रहे हैं। प्रदेश सरकार ने एक क्रांतिकारी योजना के तहत बगवानी विभाग में 400 कलस्टर चिन्हित किए हैं जो हर क्लस्टर में एक एफ पी ओ बना रहे हैं यानि पैक हाउस का इंफ्रास्ट्रक्चर क्रिएट किया जा रहा है कि उत्पाद को वहीं इकट्ठा किया जाए, पैक  किया जाए, स्टोरेज की जरूरत हो तो स्टोरेज किया जाए और वहीं से वह मार्किट हो जाए। इससे किसानों को भारी लाभ होगा।

 

डॉअर्जुन सिंह ने बताया कि हरियाणा प्रदेश का मंडी सिस्टम पूरे भारतवर्ष में सबसे अधिक सुदृढ़ है और किसान भी काफी हद तक हरियाणा के मंडी कारण से संतुष्ट हैं। हरियाणा में करीब 32 से 30 मंडियों में फल और सब्जियों की खरीद-फरोख्त होती है। आज प्रदेश के 200-300 किसान मिल पैक हाउस बना सकते हैं और अपने उत्पाद को एग्रीगेट कर रहे हैं। कुछ किसानों द्वारा इकट्ठे होकर पैक हाउस बनाने में प्रदेश सरकार 70 से 90 फ़ीसदी अनुदान देती है और किसान द्वारा अकेले बनाने पर 35 फ़ीसदी अनुदान दिया जाता है। 2 माह पहले 20 बड़ी कंपनियों का हमारे 22 एफपीओ से मेटेरियल खरीदने का टाई अप जिसमें रेट और क्वांटिटी फाइनल हुई है। जिससे किसान को उनके उत्पाद की मात्रा और रेट फिक्स हो जाने से उनकी आमदनी सुरक्षित हो गई। अगले 1 साल में करीब 100 से 150 प्रोजेक्ट बनाने के लिए काम किया जा रहा है। उसके बाद हरियाणा एक सप्लाई चैन के रूप में उभर कर सामने आएगा। एक बड़ा नेटवर्क स्टेबलिश हो जाने से प्रदेश के किसानों को खूब आर्थिक लाभ होगा। एक सुविधाजनक सिस्टम किसानों और कंपनियों को मिलेगा। हरियाणा मार्केट के मामले में एक नया आयाम साबित होगा।

 

 


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Content Writer

Isha

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