अगर कर लिया ये काम तो नहीं होगा हार्ट अटैक

punjabkesari.in Friday, Jan 16, 2026 - 02:10 PM (IST)

गुड़गांव, (ब्यूरो): इन दिनों उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। ऐसे में हर किसी को बीमार होने का खतरा बढ़ गया है। खास तौर पर हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता जा रहा है। लोगों में दिल घबराने, घबराहट होने जैसी समस्याएं सामने आ रही है। यही हार्ट अटैक की शुरुआत है। इस तरह के लक्षण दिखाई देने पर लोग अक्सर डॉक्टर के पास जाते हैं और महंगे टेस्ट कराने के साथ ही महंगी दवाएं लेनी शुरू कर देते हैं, लेकिन दिनचर्या बदलकर और योग का सहारा लेकर हर कोई हार्ट अटैक को रोक सकते हैं।

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प्रज्ञा योगशाला के योगाचार्य गोपाल गुरु ने बताया कि आज के समय में हार्ट अटैक एक आम बीमारी बन गई है। बुजुर्ग की नहीं बल्कि युवाओं में भी हार्ट अटैक की समस्या सामने आ रही है। हर किसी व्यक्ति का शरीर बीमार होने से पहले कुछ लक्षण अवश्य दिखाता है। बस जरूरत होती है उन लक्षणों को पहचानने की। अगर हम अपनी दिनचर्या को बदल दें और नियमित रूप से योग करें तो इस हार्ट अटैक को पूर्ण रूप से रोका जा सकता है। उन्होंने बताया कि इन दिनों गुड़गांव का न्यूनतम तापमान 1 डिग्री तक पहुंच गया है। यही मौसम हार्ट के लिए सबसे अधिक खतरा उत्पन्न करता है। जरा सी लापरवाही आपको बीमार कर सकती है। ऐसे में आप घर बैठे ही कुछ योग क्रियाओं द्वारा अपने शरीर का तापमान नियंत्रित करने के साथ ही इन बीमारियों को दूर कर सकते हैं। हार्ट अटैक जैसी बीमारियों से बचने के लिए कुछ योग क्रियाएं हैं जिन्हें करने से आप निश्चित तौर पर बीमारी को आने से पहले ही छूमंतर कर सकते हैं। अगर यह योग क्रियाएं आप अपनी दिनचर्या में जोड़ लेते हो तो आपको कभी जीवन में हार्ट अटैक नहीं होगा। 

 

शंख मुद्रा- इसे लगाने के लिए अपने हाथ की हथेली पर अंगूठा रखेंगे और मुट्ठी बंद करके सबसे बड़ी उंगली को अंगूठे से मिलाकर अपने हृदय के पास रखेंगे। यह मुद्रा 15 मिनट रोजाना करनी होती है।

उत्तानपदासन- कमर के बल लेटकर दोनों पैर 30 डिग्री पर उठाकर रोकने हैं। यह आसन रोजाना 1 मिनट बिना सांस रोके करना है।

नोका आसन- कमर के बल लेटकर दोनों पैर 30 डिग्री उठाते हैं और शरीर को आगे की तरफ से 30 डिग्री तक उठाना है। यह आसन 1 मिनट के लिए लगाया जाएगा।

भुजंगासन-  पेट के बल लेटकर दोनों हाथ कंधे के नीचे रखकर हाथों को सीधा कर कमर को ऊपर की तरफ मोड़ना है। यह आसन 1 मिनट के लिए लगाया जाएगा।

 

अनुलोम विलोम प्राणायाम- जमीन पर बैठकर दाएं नाक को बंद करके बाएं नाक से सांस को भरने के बाद दाएं नाक से धीरे-धीरे छोड़ना है। फिर दाएं नाक से सांस भरकर बाएं नाक से छोड़ना है।

भ्रामरी- जमीन पर बैठकर कमर सीधी करके दोनों हाथों के अंगूठों से कान बंद करके नाक से सांस भरकर मुंह से भंवरे की तरह ध्वनि निकाली जाती है।

भस्त्रिका प्राणायाम- जमीन पर बैठकर कमर सीधी करते हुए सांस भरते हुए दोनों हाथ उपर उठाओ और पूरी ताकत के साथ सांस को बाहर छोड़ते हुए दोनों हाथ नीचे लाएं।

सूर्यभेदी प्राणायाम- जमीन पर बैठकर दाएं नाक से सांस को भरकर बाएं से सांस छोड़ें। इससे गर्म हवा मिलेगी और हृदय को बल मिलेगा।

 


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Content Editor

Pawan Kumar Sethi

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