मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स, गुरुग्राम द्वारा मदर्स डे कार्यक्रम : शहरी माहौल में मातृत्व की नज़रअंदाज की जाने वाली जरूरतों पर जोर
punjabkesari.in Monday, May 11, 2026 - 07:38 PM (IST)
गुड़गांव ब्यूरो : मदर्स डे के अवसर पर मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स, गुरूग्राम द्वारा एक कम्युनिटी प्रोग्राम का आयोजन किया किया, जिसमें माँ बनने जा रहीं गर्भवती महिलाओं और उनके प्रियजनों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम का आयोजन मातृत्व का अहसास करने जा रहीं महिलाओं को भरोसा दिलाने, सहानुभूति जताने और उनके अनुभवों को साझा करने के मकसद की सोच के साथ किया गया था साथ ही शहरी भारत में अक्सर नजरअंदाज की जाने वाली असलियत को स्वीकार करना और उनके आने वाले मातृत्व का जश्न मनाना था। मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स, गुरुग्राम की इस पहल का नेतृत्व डॉ. पल्लवी वसल ने किया, उनके साथ डॉ. संकेत गोयल (कंसल्टेंट पीडियाट्रिशियन और नियोनेटोलॉजिस्ट) एवम् रश्मि भारद्वाज (सीनियर कंसल्टेंट और हेड - पीआईसीयू) बतौर विशेषज्ञ शामिल रहे। इसमें विशेषज्ञों की चर्चा, सेहत से जुड़ी अच्छी आदतों पर सत्र, आपसी बातचीत वाली गतिविधियाँ और माँ की सेहत से जुड़े परामर्श शामिल थे। कार्यक्रम के आकर्षण में एक दिलचस्प बात, इसमें हुई बातचीत और चर्चाओं का केंद्र बच्चे से हटकर, गर्भवती महिला पर था।
मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स, गुरुग्राम में प्रसूति एवं स्त्री रोग की क्लिनिकल डायरेक्टर डॉ. पल्लवी वसल ने कहा, ‘गर्भावस्था को अमूमन काफी तवज्जो मिलती है, लेकिन इससे जुड़ी शारीरिक और मानसिक चुनौतियों के बारे में खुलकर बात नहीं की जाती। महिलाएँ काम और घर-गृहस्थी की जिम्मेदारियों को निभाते हुए, थकान, कमर दर्द, तनाव, कुपोषण, नींद की कमी या घबराहट जैसी समस्याओं को अक्सर नजरअंदाज कर देती हैं। गर्भावस्था के दौरान सिर्फ स्कैन और टेस्ट के जरिए मिलने वाली प्रीनेटल केयर से कहीं ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है। इस दौरान मानसिक सेहत, शारीरिक सक्रियता, सही पोषण, भावनात्मक सहारा और सही समय पर सलाह मिलना भी उतना ही जरूरी है।’ विशेषज्ञों के पैनल और डॉक्टरों ने इस चर्चा के दौरान, गुरुग्राम और दिल्ली-एनसीआर जैसे शहरी इलाकों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं में जीवनशैली से जुड़े कारणों की वजह से बढ़ रही स्वास्थ्य समस्याओं पर खास तौर पर रोशनी डाली। काम के बढ़ते घंटे, सुस्त जीवनशैली, सोने-जागने का गलत तरीका, स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताना, पोषण में कमी और तनाव - ये सभी मिलकर गर्भवती महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन, जेस्टेशनल डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, एंग्जायटी, विटामिन की कमी और हड्डियों के कमजोर होने जैसी समस्याओं को तेजी से बढ़ा रहे हैं।
प्रोग्राम के दौरान, अलग-अलग गतिविधियों और चर्चाओं में हिस्सा लेकर सभी महिलाएँ पूरी तरह से जुड़ी रहीं। कुछ महिलाओं ने यह भी माना कि यह उनकी रोजमर्रा की जिंदगी से मिला एक सुखद बदलाव था, जिसने उन्हें खुद का ख्याल रखने का मौका दिया। विशेषज्ञों ने गर्भवती महिलाओं में भावनात्मक अकेलेपन की समस्या की ओर भी ध्यान दिलाया, जो गुरुग्राम जैसे शहरी इलाकों में तेजी से बढ़ती जा रही है। उन्होंने बताया कि थकान, दर्द, मूड में बदलाव, पोषण की कमी, धूप न मिलना जैसी कई समस्याएं गर्भावस्था के दौरान आम होती हैं, उन्हें महिलाएं सामान्य मान लेती हैं, और बाद में यही बड़ी समस्याओं का रूप ले लेती हैं। मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स, गुरूग्राम का यह कार्यक्रम स्वास्थ्य सेवा को और अधिक सुलभ तथा समुदाय-उन्मुख बनाने का एक प्रयास था। पूरा माहौल किसी अस्पताल की औपचारिक गतिविधि के बजाय, एक उभरते हुए सपोर्ट ग्रुप जैसा लग रहा था।