कौन है रेशम सिंह अनमोल? लोक-संगीत, सेवा और सामाजिक चेतना में बनाई अलग पहचान
punjabkesari.in Sunday, Jan 11, 2026 - 07:56 PM (IST)
गुड़गांव ब्यूरो :आज के दौर में जब पंजाबी संगीत उद्योग ट्रेंड, रील्स और वायरल हुक्स से संचालित होता दिखता है, रेशम सिंह अनमोल का नाम एक ऐसे कलाकार के रूप में सामने आता है जो इस शोर से कुछ दूरी बनाकर चलता रहा है। उनका सफ़र न केवल संगीत तक सीमित है, बल्कि सामाजिक ज़िम्मेदारी, सेवा भाव और ज़मीन से जुड़ी सोच का भी प्रतिनिधित्व करता है। रेशम सिंह अनमोल को केवल एक गायक कहना शायद अधूरा होगा। वे उन कलाकारों में हैं जिनके लिए संगीत आजीविका भर नहीं, बल्कि समाज से जुड़ने का माध्यम भी रहा है। रेशम सिंह अनमोल का जन्म हरियाणा के अंबाला ज़िले के नकतपुर गांव में हुआ। उनके पिता बिशन सिंह नंबरदार का देहांत तब हो गया था, जब रेशम मात्र तीन वर्ष के थे। इसके बाद उनकी परवरिश उनकी मां लछमन कौर ने की, जिनका प्रभाव उनके व्यक्तित्व और सामाजिक सोच पर साफ़ दिखाई देता है। उनके परिवार में दो भाई हैं—निर्मल सिंह, जो एक शिक्षाविद (अकादमिक) हैं, और सरवन सिंह, जो एक व्यवसायी (बिज़नेसमैन) हैं। परिवार का माहौल शिक्षा, अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़ा रहा, जिसने रेशम के व्यक्तित्व को आकार दिया।
विधिवत संगीत शिक्षा और अकादमिक उपलब्धियां
रेशम सिंह अनमोल उन गायकों में शामिल हैं जिन्होंने बिना औपचारिक प्रशिक्षण के लोकप्रिय होने का रास्ता नहीं चुना। उन्होंने पंजाबी लोक-संगीत के महान गायक कुलदीप माणक से विधिवत संगीत प्रशिक्षण प्राप्त किया और बाद में देव थ्रीके वाला से भी गायकी व लोक-साहित्य की बारीकियां सीखीं। उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की, जहां 2000 से 2002 के बीच पंजाबी और हरियाणवी लोक-संगीत में लगातार तीन गोल्ड मेडल हासिल किए। यह उपलब्धि उन्हें केवल मंचीय कलाकार नहीं, बल्कि एक प्रशिक्षित लोकगायक के रूप में स्थापित करती है। रेशम सिंह अनमोल की व्यावसायिक शुरुआत 2009 में ‘The Beginning’ एल्बम से हुई, जिसे टी-सीरीज़ ने रिलीज़ किया। इस एल्बम में उस समय उभरते निर्माता यो यो हनी सिंह शामिल थे। एल्बम में “सुरमा”, “पेग”, “नखरो”, “हॉट चिक”, “काटो”, “ननकाना” और “गंडासा” जैसे आठ गाने थे। यह एल्बम उस वर्ष भारत के सबसे अधिक बिकने वाले एल्बमों में शामिल रहा। खासतौर पर “सुरमा” गीत ने रेशम को पहचान दिलाई और उन्हें 2009 के PTC अवॉर्ड्स में बेस्ट डेब्यू मेल वोकल श्रेणी में नामांकन मिला।
आगे का सफ़र: लगातार लेकिन संतुलित
इसके बाद उन्होंने 2012 में ‘Dil Mangdi’ (डीजे संज के साथ) और 2014 में ‘Addiction 172’ एल्बम रिलीज़ किए, दोनों ही टी-सीरीज़ के बैनर तले आए। इन एल्बमों में भी आठ-आठ गीत शामिल थे और विषय वही रहे—पंजाब की मिट्टी, लोक-भावनाएं और आम ज़िंदगी से जुड़े अनुभव। अपने करियर में अब तक 100 से अधिक गाने रिलीज़ कर चुके रेशम सिंह अनमोल ने कभी संख्या को प्राथमिक लक्ष्य नहीं बनाया, बल्कि निरंतरता और गुणवत्ता पर ज़ोर दिया। उनकी पहचान बड़े मंचों से ज़्यादा लाइव परफॉर्मेंस, खासकर शादियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से बनी। उन्होंने भारत, यूके, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, मलेशिया, यूएई और नॉर्थ अमेरिका में परफॉर्म कर पंजाबी प्रवासी समुदाय के बीच मजबूत उपस्थिति दर्ज की।
अंतरराष्ट्रीय चार्ट पर मौजूदगी
रेशम सिंह अनमोल ने यूनाइटेड किंगडम के म्यूज़िक चार्ट्स पर भी उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उनका गीत “Chete Karda”, जिसे Desi Crew ने प्रोड्यूस किया, UK Official Asian Music Chart पर नंबर 4 तक पहुंचा और 86 हफ्तों तक चार्ट पर बना रहा, जो उनकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे लंबी चार्ट उपस्थिति मानी जाती है।
सहयोग और सिंगल्स का दौर
अपने सिंगल्स के ज़रिए रेशम सिंह अनमोल ने पंजाबी संगीत उद्योग के कई बड़े नामों के साथ काम किया है। इनमें T-Series, Speed Records, Jass Records, और कलाकारों में यो यो हनी सिंह, बोहेमिया, रफ्तार, मिलिंद गाबा, फतेह, मिक्ससिंह, देसी क्रू, गुलरेज़ अख्तर, अफ़साना खान और बंटी बैंस शामिल हैं। इन सहयोगों ने उन्हें अलग-अलग शैलियों में काम करने का अवसर दिया, जबकि उनकी लोक-गायकी की पहचान बनी रही।
संगीत से आगे: समाजसेवी और संवेदनशील व्यक्तित्व
रेशम सिंह अनमोल की छवि केवल एक कलाकार की नहीं, बल्कि एक समाजसेवी और संवेदनशील व्यक्ति की भी है। वे Anmol Sewa Foundation से जुड़े रहे हैं, जिसकी स्थापना उनके भाई डॉ. निर्मल सिंह और मां लछमन कौर ने की। इस संस्था के माध्यम से उन्होंने आपदा राहत, भोजन वितरण, आजीविका सहायता, जल संरक्षण, और पराली जलाने के खिलाफ जागरूकता अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई। विशेष रूप से 2025 की पंजाब बाढ़ के दौरान उन्होंने राहत कार्यों, आश्रय पुनर्निर्माण और ज़मीनी स्तर पर स्वयंसेवक के रूप में काम किया। उनके इसी सेवा कार्य के लिए उन्हें 2025 में PTC सेवा सम्मान अवॉर्ड प्रदान किया गया। इसके अलावा उन्हें साथ ही, 2010 में हरियाणा सरकार द्वारा उन्हें सर्वश्रेष्ठ पंजाबी लोक गायक के सम्मान से भी नवाज़ा गया।
रेशम सिंह अनमोल का सफ़र सुपरस्टारडम या लगातार सुर्खियों में बने रहने की कहानी नहीं है। यह कहानी है लोक-संस्कृति से जुड़े रहने, संगीत के प्रति अनुशासन, और समाज के प्रति ज़िम्मेदारी निभाने की एक ऐसे समय में जब कला अक्सर केवल उपभोग की वस्तु बनती जा रही है, रेशम सिंह अनमोल का करियर यह दिखाता है कि संगीत, संवेदनशीलता और सेवा साथ-साथ चल सकते हैं—भले ही वह रास्ता थोड़ा धीमा और कम चमकदार क्यों न हो।