52 मिनट की बंद कमरे की बैठक ने बढ़ाई सियासी हलचल, दक्षिण हरियाणा के चार कद्दावर मंत्री एक साथ,
punjabkesari.in Wednesday, Apr 08, 2026 - 06:12 PM (IST)
चंडीगढ़(धरणी): हरियाणा सचिवालय की आठवीं मंजिल पर बुधवार को हुई एक 52 मिनट लंबी बंद कमरे की बैठक ने प्रदेश की राजनीति, खासकर दक्षिण हरियाणा की सियासत, में नई चर्चा छेड़ दी है। इस बैठक में कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह, निकाय मंत्री विपुल गोयल, मंत्री राजेश नागर और खेल मंत्री गौरव गौतम एक साथ मौजूद रहे। बैठक राव नरबीर सिंह के कमरे में हुई और इसकी सबसे अहम बात यह रही कि यह पूर्व नियोजित नहीं मानी जा रही। यह भी उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ समय से दक्षिण हरियाणा की राजनीति में बयानबाजी, वर्चस्व और प्रभाव को लेकर खींचतान खुलकर सामने आती रही है। राव इंद्रजीत सिंह, राव नरबीर सिंह और उनसे जुड़े राजनीतिक समूहों के बीच सियासी रस्साकशी और बयानों के तीर किसी से छिपे नहीं हैं।
अनिल विज का हालचाल पूछने पहुंचे, फिर बदल गया सियासी दृश्य
जानकारी के अनुसार, बुधवार को कैबिनेट बैठक के बाद अधिकांश मंत्री अपने-अपने कमरों की ओर लौट रहे थे। इसी दौरान विपुल गोयल, राजेश नागर और गौरव गौतम हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज से उनका हालचाल पूछने उनके कमरे में पहुंचे।
अनिल विज से मुलाकात के बाद जब ये तीनों मंत्री बाहर निकले तो पड़ोस में स्थित राव नरबीर सिंह के कमरे में रोशनी जलती देख वे वहां चले गए। इसके बाद जो हुआ, उसने सचिवालय के राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया। चारों नेता करीब 52 मिनट तक एकांत में साथ रहे और इस दौरान कमरे के भीतर क्या बातचीत हुई, इसको लेकर राजनीतिक अटकलें तेज हो गई हैं।
दक्षिण हरियाणा की राजनीति में क्यों अहम है यह मुलाकात?
यह बैठक सिर्फ एक सामान्य शिष्टाचार मुलाकात नहीं मानी जा रही, क्योंकि इसमें शामिल चारों नेता दक्षिण हरियाणा और उससे जुड़े प्रभावशाली राजनीतिक भूगोल में अपनी-अपनी मजबूत पकड़ रखते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दक्षिण हरियाणा की राजनीति इस समय कई ध्रुवों में बंटी हुई दिखाई दे रही है। एक तरफ केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह और उनकी राजनीतिक धुरी मानी जाती है, जिसमें कैबिनेट मंत्री आरती राव का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।
दूसरी तरफ राव नरबीर सिंह, विपुल गोयल, राजेश नागर और गौरव गौतम जैसे नेताओं की सक्रियता भी लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है।
क्या बन रही है कोई नई राजनीतिक केमिस्ट्री?
सियासी गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह मुलाकात महज संयोग थी, या फिर दक्षिण हरियाणा की राजनीति में कोई नई रणनीतिक केमिस्ट्री आकार ले रही है?जबकि सभी भाजपा से ही है।चूंकि यह बैठक कैबिनेट मीटिंग के तुरंत बाद हुई और इसमें शामिल चेहरे भी राजनीतिक रूप से बेहद अहम हैं, इसलिए इसके मायने सामान्य प्रशासनिक बातचीत से कहीं आगे देखे जा रहे हैं।
सिर्फ संयोग या शक्ति प्रदर्शन?
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि इस तरह की मुलाकातें अक्सर आने वाले समय के संकेत छोड़ जाती हैं।
चार प्रभावशाली नेताओं का एक कमरे में इतने लंबे समय तक साथ रहना कई सवाल खड़े करता है—
क्या यह दक्षिण हरियाणा में शक्ति संतुलन का संकेत है?
क्या यह भविष्य की राजनीतिक रणनीति का प्रारूप है? या फिर यह केवल कैबिनेट के बाद की सहज राजनीतिक बातचीत थी? फिलहाल इन सवालों का कोई आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है, लेकिन 52 मिनट की यह बैठक हरियाणा की राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय बन चुकी है।
सियासी संदेश साफ—दक्षिण हरियाणा अभी भी केंद्र में
हरियाणा की राजनीति में दक्षिण हरियाणा हमेशा से सत्ता समीकरणों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। ऐसे में यहां के चार प्रभावशाली मंत्रियों की एक साथ बैठक को हल्के में नहीं लिया जा रहा।भले ही इस बैठक को लेकर कोई औपचारिक बयान सामने न आया हो, लेकिन इतना तय है कि इसने सत्ता और संगठन, दोनों हलकों में हलचल बढ़ा दी है।