हरियाणा के इस गांव में 50 लाख खर्च, फिर भी बूंद-बूंद को तरस रहे लोग... दूषित पानी पीने को मजबूर 15 हजार आबादी
punjabkesari.in Friday, Jul 03, 2026 - 04:27 PM (IST)
नूंह(ऐके बघेल): सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के दावों की जमीनी हकीकत रीठट गांव में बिल्कुल उलट नजर आ रही है। करीब 15 हजार की आबादी वाले इस गांव में आज भी लोग रेनीवेल परियोजना (Rainwell Project) के मीठे और स्वच्छ पानी के लिए तरस रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार ने उनके गांव तक पानी पहुंचाने के नाम पर करीब 50 लाख रुपये पानी की तरह बहा दिए, लेकिन 'जल जीवन मिशन' के अधूरे काम के कारण योजना का लाभ लोगों तक नहीं पहुंच सका है।
मजबूरी में पी रहे हैं नहर किनारे का केमिकलयुक्त पानी
गांव में पीने के पानी का कोई अन्य सरकारी साधन न होने के कारण ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने बताया कि वे मजबूरी में नहर किनारे लगे निजी ट्यूबवेलों का पानी पीने को विवश हैं।
बदबूदार और दूषित पानी: ग्रामीणों का आरोप है कि इस ट्यूबवेल के पानी से तेज बदबू आती है और यह पूरी तरह केमिकलयुक्त व दूषित महसूस होता है। इस अशुद्ध पानी के सेवन से गांव में बीमारियों का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है। जिनके पास थोड़े पैसे हैं, वे करीब 1,000 रुपये खर्च कर निजी पानी के टैंकर मंगवाने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए बताया कि गांव की जलापूर्ति के लिए चार बूस्टिंग स्टेशन (Boosting Stations) तो बना दिए गए हैं, लेकिन बुनियादी प्रबंधन गायब है। चार में से केवल एक बूस्टिंग स्टेशन पर ही पंप ऑपरेटर की तैनाती की गई है, जबकि बाकी तीन स्टेशन लंबे समय से बंद पड़े हैं।चालू स्टेशन पर भी कभी-कभार ही पानी आता है, लेकिन पाइपलाइन की खामियों के कारण वह लोगों के घरों तक नहीं पहुंच पाता।
ग्रामीण हाफिज ईशा, जाकिर हुसैन, हाजी आसू, हनीफ, हाजी तैय्यब, खालिद, जैतूनी, इसाक और समसू सहित दर्जनों लोगों ने बताया कि करीब 4 साल पहले जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन बिछाई गई थी। कुछ घरों में औपचारिकता के लिए नल (Taps) भी टांग दिए गए, लेकिन आज तक उनमें पानी की एक बूंद नहीं टपकी।
ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों का कहना है कि विभाग के अधिकारी केवल कागजी फाइलों और आंकड़ों में गांव को रेनीवेल का पानी उपलब्ध कराने के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, जबकि धरातल पर लोग बूंद-बूंद पानी को मोहताज हैं। गांव के मौजिज लोगों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि जल जीवन मिशन की इस अधूरी योजना की जांच कराई जाए और जल्द से जल्द गांव में नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति बहाल की जाए, अन्यथा ग्रामीण सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।