Haryana13 साल पुराना नियम बदला! गुरुग्राम-फरीदाबाद में अब मिक्स्ड लैंड यूज में बदल सकेंगे अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स
punjabkesari.in Sunday, Jul 12, 2026 - 03:57 PM (IST)
चंडीगढ़( चन्द्र शेखर धरणी): हरियाणा सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में तेजी से बदलते शहरी परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए अफोर्डेबल हाउसिंग नीति में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। अब मेट्रो नेटवर्क और ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) क्षेत्र में स्थित अफोर्डेबल ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं को निर्धारित शर्तों के तहत मिक्स्ड लैंड यूज कॉलोनियों में परिवर्तित किया जा सकेगा। इस फैसले से गुरुग्राम, फरीदाबाद, बल्लभगढ़ और बहादुरगढ़ जैसे शहरों में चल रही परियोजनाओं को तत्काल लाभ मिलने की संभावना है, जबकि भविष्य में मेट्रो विस्तार वाले क्षेत्रों में भी यह नीति विकास की नई संभावनाएं खोलेगी।
13 वर्ष पुरानी नीति में बड़ा बदलाव
19 अगस्त 2013 की अफोर्डेबल ग्रुप हाउसिंग नीति के तहत ऐसे लाइसेंसों को किसी अन्य श्रेणी में परिवर्तित करने की अनुमति नहीं थी। सरकार के नए निर्णय के बाद यह प्रतिबंध केवल ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) क्षेत्र की परियोजनाओं के लिए आंशिक रूप से हटाया गया है। यानी केवल मेट्रो एवं ट्रांजिट कॉरिडोर से जुड़े क्षेत्रों की अफोर्डेबल हाउसिंग कॉलोनियां ही मिक्स्ड लैंड यूज श्रेणी में परिवर्तित की जा सकेंगी।
मेट्रो शहरों को मिलेगा सबसे अधिक लाभ
इस नीति परिवर्तन का सबसे अधिक प्रभाव उन शहरों में देखने को मिलेगा जहां मेट्रो सेवा पहले से उपलब्ध है या विस्तार की योजना पर काम चल रहा है। गुरुग्राम, फरीदाबाद, बल्लभगढ़ और बहादुरगढ़ की अनेक परियोजनाएं इस फैसले का सीधा लाभ उठा सकेंगी। इसके अलावा बल्लभगढ़-पलवल तथा दिल्ली-कुंडली मेट्रो विस्तार के पूरा होने के बाद इन कॉरिडोर के आसपास विकसित होने वाली नई परियोजनाओं के लिए भी यह विकल्प उपलब्ध रहेगा।
डेवलपर्स को मिलेगी नई कारोबारी आजादी
नई व्यवस्था के तहत डेवलपर्स परियोजनाओं की वर्तमान जरूरतों के अनुसार नए लेआउट तैयार कर सकेंगे। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि मिक्स्ड लैंड यूज कॉलोनियों में न्यूनतम 7.5 प्रतिशत क्षेत्र व्यावसायिक गतिविधियों के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य होगा। इससे परियोजनाओं की आर्थिक व्यवहार्यता बढ़ेगी और निवेशकों के लिए भी नए अवसर पैदा होंगे।
फ्लैट खरीदारों के हित रहेंगे पूरी तरह सुरक्षित
सरकार ने नीति में बदलाव के साथ मौजूदा फ्लैट खरीदारों के अधिकारों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी है। जिन परियोजनाओं में तीसरे पक्ष के अधिकार बन चुके हैं, वहां लाइसेंस परिवर्तन तभी संभव होगा जब सभी आवंटी अपनी लिखित सहमति देंगे। वहीं जिन परियोजनाओं में अभी तक ऐसे अधिकार नहीं बने हैं और जो हरेरा में पंजीकृत नहीं हैं, वहां डेवलपर को शपथ पत्र प्रस्तुत करना होगा। इससे किसी भी खरीदार के हित प्रभावित नहीं होंगे।
टीओडी क्षेत्र तक ही सीमित रहेगी नई सुविधा
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह छूट केवल ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) क्षेत्र में स्थित परियोजनाओं तक सीमित रहेगी। टीओडी जोन से बाहर की अफोर्डेबल ग्रुप हाउसिंग कॉलोनियों को मिक्स्ड लैंड यूज या सामान्य ग्रुप हाउसिंग परियोजना में परिवर्तित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
बावल परियोजना में लापरवाही पर बड़ी कार्रवाई
शिवा मेगा प्रोजेक्ट्स ब्लैकलिस्ट, भविष्य में नहीं मिलेगा नया लाइसेंस
दूसरी ओर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के खिलाफ भी सख्त रुख अपनाया है। रेवाड़ी जिले के बावल में अफोर्डेबल ग्रुप हाउसिंग परियोजना विकसित नहीं करने और लाइसेंस शर्तों का पालन न करने पर शिवा मेगा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है।
विभाग के आदेश के अनुसार कंपनी, उसके तीनों निदेशक तथा उनसे संबंधित किसी भी अन्य इकाई को अब हरियाणा विकास एवं शहरी क्षेत्र विनियमन अधिनियम, 1975 के तहत भविष्य में कोई नया लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा।
2014 में मिला था लाइसेंस, परियोजना कभी शुरू नहीं हुई
कंपनी को वर्ष 2014 में बावल में 5.44 एकड़ भूमि पर अफोर्डेबल ग्रुप हाउसिंग परियोजना विकसित करने का लाइसेंस मिला था। लेकिन कंपनी ने न तो समय पर लाइसेंस का नवीनीकरण कराया, न ही ईडीसी सहित अन्य सरकारी देनदारियां जमा कीं और न ही परियोजना का निर्माण कार्य शुरू किया। लगातार उल्लंघन के चलते वर्ष 2022 में लाइसेंस रद्द कर दिया गया था। अब विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि कंपनी अथवा उसके निदेशकों की ओर से भविष्य में प्रस्तुत किसी भी लाइसेंस आवेदन पर कोई कार्रवाई न की जाए।
- मेट्रो और टीओडी क्षेत्र की अफोर्डेबल हाउसिंग परियोजनाओं को मिक्स्ड लैंड यूज में बदला जा सकेगा।
- गुरुग्राम, फरीदाबाद, बल्लभगढ़ और बहादुरगढ़ को मिलेगा तत्काल लाभ।
- भविष्य में पलवल और कुंडली मेट्रो कॉरिडोर की परियोजनाएं भी होंगी पात्र।
- मिक्स्ड लैंड यूज परियोजनाओं में कम से कम 7.5 प्रतिशत व्यावसायिक क्षेत्र अनिवार्य।
- फ्लैट खरीदारों की लिखित सहमति के बिना लाइसेंस परिवर्तन नहीं होगा।
- टीओडी क्षेत्र से बाहर की परियोजनाओं पर यह छूट लागू नहीं होगी।
- बावल की अधूरी परियोजना पर शिवा मेगा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ब्लैकलिस्ट, भविष्य में नया लाइसेंस नहीं मिलेगा।