''पानी'' के बाद अब अध्यादेशों पर किसानों की भ्रांतियां दूर करने फील्ड में दस्तक देंगे सीएम खट्टर

9/20/2020 12:42:13 AM

चंडीगढ़ (धरणी): केंद्र सरकार द्वारा पारित तीन किसान अध्यादेशों के खिलाफ प्रदेश के किसान बेशक आंदोलनरत हैं और समूचा विपक्ष उन्हें समर्थन दे रहा है मगर प्रदेश की खट्टर सरकार लगातार किसानों का भ्रम दूर करने का प्रयास कर रही है कि ये अध्यादेश किसानों के खिलाफ नहीं बल्कि उनके हित में है। 

एक तरफ जहां सीएम मनोहर लाल खट्टर के निर्देश पर पूरी सरकार, मंत्री, सांसद और विधायक जमीनी स्तर पर किसानों को जागरूक करने के साथ साथ उनकी भ्रांतियां दूर कर रहे हैं तो माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री जिस तरह मेरा पानी मेरी विरासत योजना के अंतर्गत धान की रोपाई को लेकर किसानों में बनी ऊहापोह की स्थिति को मिटाने के लिए सीधे किसानों से मुखातिब हुए थे, कमोबेश इस अध्यादेश के मामले में भी वे जल्द ही फील्ड में दस्तक देकर सीधे रूप से किसानों से रूबरू हो सकते हैं। हालांकि मुख्यमंत्री खट्टर इस अध्यादेश के बाद से निरंतर जहां खुद ट्वीट कर किसानों को इन अध्यादेशों के वास्तविक मायने समझा रहे हैं तो वहीं वे प्रधानमंत्री मोदी की ओर से इस मामले में किए गए ट्विट्स पर री-ट्विट भी कर रहे हैं।

गौरतलब है कि जब धान की रोपाई का सिलसिला शुरू होने वाला था तब भी कई जिलों में किसान असमंजस की स्थिति में आ गए थे तो उस वक्त मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर स्वयं ही कुरुक्षेत्र में किसानों के पास पहुंच गए और उनसे डायरेक्ट बातचीत शुरू कर दी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने जहां किसानों को मेरा पानी मेरी विरासत योजना के संदर्भ में तफ्सील से जानकारी देकर जागरूक किया तो वहीं धान की रोपाई को लेकर खींचे गए खाके के बारे में भी जानकारी दी जिससे किसानों को इस योजना का मर्म समझ में आ गया और नतीजतन प्रदेश भर से किसान स्वेच्छा से धान का रकबा छोड़ कर वैकल्किप फसलों के प्रति आकृषित नजर आए।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि अब केंद्र सरकार द्वारा पारित किए गए तीन अध्यादेश के मामले में भी मुख्यमंत्री जल्द ही फील्ड में उतर कर किसानों से रूबरू हो सकते हैं और वे किसानों के दिमाग में इन अध्यादेशों को लेकर पैदा हुए भ्रम को दूर कर सकते हैं।

अब तक ऐसे कर रहे प्रयास
दरअसल, अध्यादेशों को लेकर हरियाणा व पंजाब में काफी मुद्दा गर्माया हुआ है। विभिन्न राजनीतिक संगठनों के नेतृत्व में किसान धरने-प्रदर्शन पर आमादा हैं। हरियाणा में किसान पुतला फूंक प्रदर्शन कर  रहे हैं। प्रदेश भर में हो रही ऐसी स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर निरंतर जहां आला अधिकारियों से फीडबैक ले रहे हैं तो वहीं उन्होंने अध्यादेश को लेकर फैलाई जा रही भ्रांतियों पर विराम लगाने के लिए अपनी सरकार में शामिल मंत्रियों, पार्टी के सांसदों व विधायकों को जमीन पर उतार दिया है। 

यही नहीं खुद अपने ट्विटर हैंडल के जरिए अब तक दर्जनों पोस्ट शेयर कर चुके हैं जिसमें बार बार किसानों को जहां अध्यादेश के फायदे गिनवाते हुए किसानों के हितार्थ बता रहे हैं और वहीं इसमें कांग्रेस को भी आड़े हाथों लेते हुए किसानों को यह संदेश देने का प्रयास कर रहे हैं कि कांग्रेस ने सत्ता में रहते हुए तो किसानों के साथ सौतेला व्यवहार किया ही अब विपक्ष में रहकर किसानों को गुमराह कर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं। यही नहीं मुख्यमंत्री अपने ट्विटर हैंडल पर प्रधानमंत्री द्वारा किए जा रहे ट्वीट्स का भी री-ट्वीट कर रहे हैं।

यूं समझा रहे अध्यादेश की महता
मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर भले ही आने वाले दिनों में इस मुद्दे को लेकर सीधे किसानों से मुखातिब हो सकते हैं लेकिन फिलहाल वे सोशल साइट्स के जरिए किसानों को बता रहे हैं कि अध्यादेश से कैसे देश एवं प्रदेश के किसानों की स्थिति आर्थिक रूप से मजबूत होगी। यही नहीं इस अध्यादेश को लेकर किसानों में एम.एस.पी. को लेकर भी भ्रम बना हुआ है तो इसका भी जवाब मुख्यमंत्री ने दिया है कि वे खरीफ-2020 की खरीद एम.एस.पी. (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर ही करेंगे। यह किसानों को नई ताकत देगा और किसानों की खुशहाली के साथ ही देश भी उन्नतशील होगा। 

उनका कहना है कि किसानों को भ्रमित करने में बहुत सारी शक्तियां लगी हुई हैं मगर यह तय है कि सरकारी खरीद की व्यवस्था भी बनी रहेगी और एम.एस.पी. भी लागू रहेगी। वास्तव में ये विधेयक किसानों को कई नए विकल्प प्रदान करके उन्हें सशक्त करने के साथ साथ वर्ष 2022 तक उनकी आय दोगुणी करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास होगा।

केंद्र सरकार को लिखा पत्र
आमतौर पर खरीफ फसलों की खरीद अक्तूबर माह के दौरान शुरू होती है लेकिन मुख्यमंत्री खट्टर ने किसानों के भ्रम को मिटाने के मकसद से केंद्र सरकार को पत्र लिखकर इस बात की स्वीकृति मांगी है कि खरीफ फसलों की खरीद शुरू करने के लिए उन्हें 25 सितम्बर की तिथि दी जाए। इससे दोहरे लाभ होंगे, जिसके तहत किसानों का भ्रम दूर होगा और दूसरा विपक्षीदलों की भी बोलती बंद हो जाएगी। यही नहीं प्रदेश सरकार ने धान की खरीद के लिए अतिरिक्त 200 खरीद केंद्र, बाजारा के लिए 108 व मक्का के लिए 17 और खरीद केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया है।


Shivam

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