Haryana के लिए खतरे की घंटी, भाखड़ा बांध में घटा पानी....सामान्य से 25 फीट नीचे पहुंचा जलस्तर

punjabkesari.in Wednesday, Aug 26, 2026 - 11:02 AM (IST)

चंडीगढ़( चंद्र शेखर धरणी):    हरियाणा के लिए भाखड़ा डैम में लगातार कम हो रहा जलस्तर चिंता का विषय बनता जा रहा है। कमजोर मानसून के चलते इस बार भाखड़ा बांध में पानी की आवक पिछले वर्ष के मुकाबले काफी कम रही है। इसका सीधा असर भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) के माध्यम से पानी प्राप्त करने वाले राज्यों की आगामी पेयजल और सिंचाई जरूरतों पर पड़ सकता है। बीबीएमबी ने पंजाब के साथ हरियाणा और राजस्थान को भी पानी के इस्तेमाल में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।

बीबीएमबी के आंकड़ों के मुताबिक सोमवार को भाखड़ा बांध की गोबिंद सागर झील का जलस्तर करीब 1634 फीट दर्ज किया गया। यह सामान्य स्तर से लगभग 25 फीट कम है और बांध की अधिकतम भराव क्षमता 1680 फीट से भी 46 फीट नीचे है। सामान्य परिस्थितियों में मानसून के इस चरण में जलस्तर करीब 1660 फीट के आसपास होना चाहिए था। ऐसे में मौजूदा स्थिति यह संकेत दे रही है कि आने वाले सूखे मौसम के लिए जल प्रबंधन इस बार बड़ी चुनौती बन सकता है।

हरियाणा के लिए क्यों महत्वपूर्ण है भाखड़ा का पानी
हरियाणा की कृषि व्यवस्था में भाखड़ा प्रणाली की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में सिंचाई व्यवस्था नहरों के माध्यम से संचालित होती है और इसके लिए उपलब्ध जल संसाधनों का संतुलित प्रबंधन बेहद आवश्यक है। इसके अलावा गर्मी और सूखे के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में पेयजल की जरूरतों को पूरा करने के लिए भी पर्याप्त जल उपलब्धता जरूरी रहती है।

ऐसे में भाखड़ा जलाशय में अपेक्षित मात्रा में पानी जमा नहीं होने का प्रभाव केवल मौजूदा सिंचाई व्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आगामी महीनों में पानी के वितरण की प्राथमिकताओं पर भी असर पड़ सकता है। बीबीएमबी द्वारा राज्यों से जरूरत के मुताबिक ही पानी लेने की अपील इसी व्यापक जल प्रबंधन रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

बीबीएमबी की चेतावनी से बढ़ी सतर्कता
बीबीएमबी चेयरमैन मनोज त्रिपाठी के अनुसार 21 अगस्त को पंजाब, हरियाणा और राजस्थान को स्थिति से अवगत कराते हुए पानी के संयमित उपयोग की सलाह दी गई। राज्यों से कहा गया है कि आवश्यकता से अधिक पानी नहीं लिया जाए, ताकि आने वाले सूखे मौसम में उपलब्ध जल भंडार का इस्तेमाल किया जा सके।

हरियाणा के लिए यह सलाह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मानसून के बाद नहरों और जलाशयों पर निर्भरता बढ़ने के साथ सिंचाई की मांग बनी रहती है। यदि जलाशयों में पर्याप्त भंडारण नहीं हुआ तो आने वाले समय में पानी के वितरण और उपलब्धता को लेकर दबाव बढ़ सकता है।

पिछले साल भारी आवक, इस बार कमजोर मानसून
भाखड़ा डैम की मौजूदा स्थिति पिछले साल की परिस्थितियों से बिल्कुल अलग है। पिछले वर्ष इसी अवधि में बांध में पानी की आवक एक लाख क्यूसेक से अधिक पहुंच गई थी। भारी बारिश के कारण जलाशय में पानी तेजी से बढ़ा और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए फ्लड गेट तक खोलने पड़े थे।

इसके विपरीत इस वर्ष 24 अगस्त तक अधिकतम पानी की आवक करीब 42 हजार क्यूसेक के आसपास ही रही। यानी पिछले वर्ष की तुलना में इस बार जल आवक काफी कमजोर रही है। यही कारण है कि मानसून के अंतिम चरण में जलाशयों के पर्याप्त भराव को लेकर चिंता बढ़ गई है।

पोंग डैम की स्थिति भी हरियाणा के लिए अहम
केवल भाखड़ा ही नहीं, पोंग डैम में भी जलस्तर अपेक्षाकृत कम बताया जा रहा है। पोंग बांध का मौजूदा जलस्तर करीब 1365 फीट है, जो उसकी अधिकतम क्षमता से लगभग 25 फीट कम है। बीबीएमबी की जल प्रबंधन व्यवस्था में भाखड़ा और पोंग दोनों महत्वपूर्ण जलाशय हैं, इसलिए दोनों में कम भंडारण भविष्य की जल उपलब्धता को प्रभावित कर सकता है।
बांधों में पानी भरने का निर्धारित समय 20 सितंबर तक है। इसके बाद 21 सितंबर से आवश्यकतानुसार पानी छोड़ने की प्रक्रिया शुरू होगी। ऐसे में सितंबर तक होने वाली बारिश हरियाणा सहित संबंधित राज्यों के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है।

कम बारिश ने बढ़ाई चुनौती
बीबीएमबी के अनुसार आने वाले दिनों में बारिश की संभावना भी बहुत अधिक नहीं है। ऐसे में जलाशयों के मौजूदा स्तर में बड़ी वृद्धि की संभावना सीमित दिखाई दे रही है। यदि मानसून के अंतिम दौर में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो राज्यों को उपलब्ध पानी का इस्तेमाल प्राथमिकता के आधार पर करना पड़ सकता है।

हरियाणा के लिए इसका सबसे बड़ा संदेश यही है कि पानी का इस्तेमाल अब अधिक योजनाबद्ध तरीके से करना होगा। बीबीएमबी की चेतावनी के बाद प्रदेश में सिंचाई और पेयजल दोनों जरूरतों के लिए जल उपलब्धता की निगरानी महत्वपूर्ण हो गई है।

जल प्रबंधन पर रहेगा सरकार का फोकस
मौजूदा परिस्थितियों में हरियाणा सरकार के सामने बीबीएमबी से मिलने वाले पानी का संतुलित उपयोग सुनिश्चित करने की चुनौती रहेगी। सिंचाई के साथ पेयजल जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए उपलब्ध जल संसाधनों की समीक्षा आवश्यक होगी।

कमजोर मानसून ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल बारिश पर निर्भर रहने के बजाय जल संरक्षण, नहरों के प्रभावी संचालन और उपलब्ध पानी के विवेकपूर्ण वितरण पर जोर देना होगा। आने वाले सप्ताहों में भाखड़ा और पोंग जलाशयों का जलस्तर तथा बीबीएमबी द्वारा राज्यों को पानी छोड़ने की व्यवस्था हरियाणा के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहने वाली है।
 


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

Isha

Related News

static