कृषि भूमि अधिग्रहण संशोधित बिल ने छीना किसानों का 127 वर्ष पुराना हक: अभय चौटाला

punjabkesari.in Thursday, Aug 26, 2021 - 09:30 AM (IST)

चंडीगढ़(धरणी): इंडियन नेशनल लोकदल के प्रधान महासचिव अभय सिंह चौटाला ने प्रदेश की भाजपा गठबंधन सरकार द्वारा विधानसभा में पास किए गए भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनव्र्यवस्थापन (हरियाणा संशोधन) बिल 2021 पर कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए कहा कि यह बिल गठबंधन सरकार द्वारा प्रदेश में किसानों की कृषि योग्य उपजाऊ व बेशकीमती भूमि को हथियाने का एक बहुत बड़ा षड्यंत्र है। उन्होंने कहा कि इससे पहले केंद्र की सरकार द्वारा पारित भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 की धारा-10 में यह प्रावधान था कि बहुफसलीय सिंचित भूमि विशेष परिस्थितियों को छोड़ कर अधिग्रहण नहीं की जा सकेगी परंतु अब के संशोधित बिल की धारा 10ए के तहत बहुफसलीय सिंचित कृषि भूमि के अधिग्रहण पर कोई पाबंदी नहीं होगी। यह बिल केंद्र द्वारा पारित अधिनियम 2013 के विरोधाभास तथा किसानों के हितों के विरुद्ध है।

इनेलो नेता ने कहा कि इस बिल की धारा-23ए के तहत उपायुक्त को अब यह खुली छूट दी गई है कि वह बिना सार्वजनिक सूचना दिए जमीन अधिग्रहण का अवार्ड पास कर सकता है। इस कदम से उस जमीन से जुड़े हुए उन सभी लोगों के हक छीन लिए जाएंगे जिनका उस भूमि पर हक होता है। इसके अतिरिक्त गैर मुरूसी किराएदार, गरीब व अन्य आदमी जिनका उक्त भूमि पर प्रोपराईटरी हक होता है, परंतु रेवेन्यु रिकार्ड में उनका कहीं नाम नहीं होता और महिलाएं जिनके हक रिकार्ड में इन्द्राज नहीं होते परंतु उनका मालिकाना हक होता है, को जांच में शामिल न करना उनके हितों पर कुठाराघात है।

इनेलो नेता ने बताया कि इस संशोधित बिल से पहले अगर प्राइवेट-पब्लिक-पार्टनरशिप प्रोजेक्ट के तहत भूमि अधिग्रहण करनी होती तो कम से कम 70 प्रतिशत प्रभावित लोगों की मंजूरी आवश्यक होती थी परंतु इस संशोधित बिल में धारा-10ए के तहत वर्णित परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण करने पर किसानों की मंजूरी की कोई आवश्यकता नहीं होगी। जहां किसानों को भूमि अधिग्रहण मामलों में उनसे सहमति के अधिकार को प्राप्त करने के लिए लगभग 127 वर्ष पहले संघर्ष करना पड़ा था वहीं इस संशोधित बिल को मौजूदा भाजपा-जजपा गठबंधन कीAZ सरकार ने सदन से पास करवाकरकिसानों से यह हक छीन लिया है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम सर छोटू राम व चौधरी देवी लाल द्वारा किसानों के कृषि भूमि पर दिए गए हकों को छीनने का एक निंदनीय प्रयास है। यह संशोधित बिल विधानसभा के दायरे से बाहर का विषय है और जिन विषयों को इसमें शामिल किया गया है वह लगभग सभी विषय केन्द्र के अधीन आते हैं तथा इन सभी विषयों को लेकर केन्द्र की सरकार वर्ष 2014 व 2015 में अध्यादेश लेकर आई थी जो बहुमत न होने के कारण कानून की शक्ल नहीं ले पाए थे क्योंकि इन अध्यादेशों को किसान विरोधी व देश के हित में न होना माना गया था।

इनेलो नेता ने कहा कि इसके अतिरिक्त खेवट में सभी हिस्सेदारों, इजमेंट्री राईट व मोर्टगेज के हक रखने वाले लोग तथा महिलाएं व अन्य सभी लोग जो कृषि भूमि पर प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तौर पर हक रखते हैं परंतु रेवेन्यु रिकार्ड में मालिकाना नाम नहीं होता, उनके हितों को भी अनदेखा किया गया हैै। इसके अतिरिक्त अधिनियम 2013 की धारा 40(2) के अंदर भी बदलाव किया गया है और इस बदलाव के तहत अब जो 48 घंटे पहले सूचना देने की समय अवधि थी जो भूमि के मालिक को उसकी सभी चल संपतियों जैसे ट्यूबवैल, इंजन, कृषि संयंत्र इत्यादि को उस जगह से हटाने का अवसर देती थी, उसे भी खत्म कर दिया गया है। इस बिल में भारत के संविधान की धारा-300ए के अंतर्गत दिए गए प्रोपर्टी राईट के अधिकार की भी उल्लंघना की गई है।

इनेलो पार्टी मांग करती है कि राज्यपाल महोदय, इस संशोधित बिल को महामहिम राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए न भेजें तथा अपने विवेकानुसार इस संशोधित बिल को निरस्त करें क्योंकि मौजूदा संशोधित बिल की भावना संसद में पारित कानून 2013 के विरुद्ध है। इसके अतिरिक्त यह बिल जनविरोधी, किसान विरोधी है तथा औद्योगिक घरानों को कृषि योग्य भूमि को हड़पने का खुला निमंत्रण है।


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Isha

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