बलविंद्र ने पशु चारा काटने की मशीन पर लगाया ऐसा जुगाड़, जो इंजीनियरों को भी करता है फेल
punjabkesari.in Tuesday, Aug 18, 2020 - 04:21 PM (IST)
भिवानी (अशोक): भिवानी जिला के गांव बलियाली के पशुपालक बलविंद्र ने बड़े-बड़े मैकेनिकल इंजीनियर को फेल करते हुए एक साधारण सा फॉमूर्ला अपनाते हुए पशु चारा काटने वाली मशीन में परिवर्तन करने का अनूठा काम किया है। आमतौर पर जब भी इलेक्ट्रिक गंडासे से पशुओं के लिए हरा चारा या सूखा चारा काटा जाता है तो गंडासा तेज गति से घूमने के कारण बहुत सा चारा दूर तक बिखर जाता है। परन्तु प्रगतिशील पशुपालक बलविंद्र ने ट्रैक्टर के टायर का खोल गंडासे के ऊपर फिट करके न केवल चारे की बचत करने का काम किया, बल्कि चारा काटते समय उत्पन्न होने वाली धूल व चारे के बारीक कणों से भी निजात पाई तथा घर के प्रदूषण को ठीक करने का काम किया।
पशुपालक बलविंद्र समय-समय पर कृषि विभाग द्वारा लगाए जाने वाले मेलों में हिस्सा लेते रहे हैं। इसी दौरान उनके मन में भी कृषि व पशुपालन कार्यो में सुधार करने की कसक उठती रहती है। इसी के चलते बलविंद्र को ख्याल आया कि प्रतिदिन पशुओं का चारा काटने के दौरान 8 से 10 किलो चारा गंडासे की तेज रफ्तार के कारण दूर तक बिखर जाता था और मिट्टी में गिरकर खराब हो जाता था।

इसे सिमटने के लिए भी काफी श्रम करना पड़ता था। तब उन्होंने सोचा कि क्यों न गंडासे के आकार का कोई ऐसा खोल इसके चारों तरफ लगा दिया जाए। इस पर उन्होंने ट्रैक्टर के पुराने टायर को गंडासे के ऊपर फिट कर दिया, जो लगभग गंडासे के आकार को घेरने के लिए न केवल पर्याप्त होता है, बल्कि उसका आकार भी इतना होता है कि ट्रैक्टर टायर के अंदुरूनी रबर या टीप के स्थान पर गंडासा घूमता है।
जिससे वहां से निकलने वाले हरे व सूखे चारे गंडासे के तेज तरीके से घूमने के कारण दूर तक नहीं गिर पाता। पशुपालक बलविंद्र ने अन्य पशुपालकों से भी अपील की है कि वे भी इस सस्ते तरीके का प्रयोग कर अपनी मेहनत व चारे को खराब होने से बचा सकते हैं।