हरियाणा के इस जिले में गलघोंटू बीमारी ने ली चार बच्चों की जान, दर्जन भर संभावित मरीज

9/17/2020 8:18:17 PM

नूह (एके बघेल): डिप्थीरिया (गलघोंटू) जिले में तेजी से अपने पैर पसार रहा है। महज 1 माह के अंदर डिप्थीरिया के दर्जनभर संदिग्ध केस सामने आ चुके हैं, जिनमें से 4 बच्चों की मौत हो चुकी है। डिप्थीरिया के केस मिलने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। कोरोना एवं मलेरिया के सीजन के बीच नूह जिले में डिप्थीरिया ने भी अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग अभी इन केसों की पूरी तरह पुष्टि नहीं कर रहा है, लेकिन संभावित केस जरूर मान रहा है।

जानकारी के अनुसार गत 11 अगस्त को इस सीजन में डिप्थीरिया (गलघोंटू) का पहला केस सामने आया। सितंबर माह के आधे बीतने के साथ ही केसों की संख्या बढ़कर दर्जनभर हो चुकी है। डिप्थीरिया के लिए नियुक्त किए गए जिला नॉडल अधिकारी डॉ बसंत दुबे ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि जिले में दर्जनभर संदिग्ध डिप्थीरिया के केस मिले हैं। जो केस मिले हैं, उनमें अधिकतर 10 वर्ष या उससे कम उम्र के बच्चे हैं, इनमें से चार बच्चों की मौत भी हो चुकी है।

सूत्रों के मुताबिक फैजाना पुत्री इस्माइल निवासी जेवंत उम्र 6 साल, मोहम्मद जैद पुत्र इकबाल निवासी पाटुका उम्र 6 साल , आवेश पुत्र मुस्ताक निवासी गुलालता उम्र 7 साल, सहरिस पुत्र मुबीन निवासी शिकरावा उम्र 1 साल की डिप्थीरिया की वजह से जान जाने का समाचार मिला है। 

इसके अलावा साहिन पुत्र अरशद निवासी गुलालता उम्र 10 साल , आर्यन खान पुत्र सलीमुद्दीन निवासी झारपूड़ी उम्र 3 साल , तौसीफ पुत्र तारीफ निवासी शिकारपुर उम्र 5 साल, आसमा निवासी छारोडा उम्र 9 साल, जैसमिन पुत्र जुनैद निवासी डिढारा उम्र 4 वर्ष, सलीम पुत्र रुस्तम निवासी निवासी बैंसी उम्र 3 साल, अलीम पुत्र सलीम खान निवासी नौशेरा उम्र 1 वर्ष, सुफियान पुत्र वसीम निवासी खानपुर घाटी को डिप्थीरिया का संदिग्ध मरीज माना जा रहा है। 

जिला नॉडल अधिकारी ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा शहीद हसन खान मेवाती मेडिकल कॉलेज नल्हड़ में डिप्थीरिया यानि गलघोंटू का इलाज किया जा रहा है। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि अगर गले में खाने-पीने में कोई दिक्कत है या सांस लेने में परेशानी है, गले में सफेद झिल्ली बन रही है तो तुरंत सरकारी अस्पताल में जाकर अपनी जांच कराएं और अगर संभावित डिप्थीरिया नजर आता है तो नल्हड़ मेडिकल कॉलेज में इसका इलाज संभव है।

उन्होंने बताया कि कई संभावित मरीजों का इलाज नल्हड़ मेडिकल कॉलेज में चल रहा है। कुल मिलाकर पिछले सीजन में डिप्थीरिया ने हरियाणा के नूह जिले में काफी कहर बरपाया था। डिप्थीरिया से तकरीबन 33 बच्चों की जान चली गई थी और 150 के करीब बच्चे तकरीबन 70 गांव में डिप्थीरिया की चपेट में आए थे।

डॉक्टर दुबे ने कहा कि डिप्थीरिया जानलेवा बीमारी है, लिहाजा अगर गले में किसी तरह की कोई दिक्कत आती है, तो जांच कराकर उसका समय रहते इलाज अवश्य कराएं। अकसर यह बीमारी बच्चों में बड़ी तेजी से फैलती है, अब तक जो केस मिले हैं, उनमें पुनहाना पुन्हाना उपमंडल के गांव सबसे ज्यादा हैं। कुल मिलाकर स्वास्थ्य विभाग के सामने कोविड-19 के साथ-साथ एक बड़ी समस्या बनकर खड़ा हो गया है, हालांकि स्वास्थ्य विभाग इससे निपटने का दावा कर रहा है।


Shivam

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