ट्राई सिटी की दर्जनों महिलाओं ने मिलकर मनाया हरियाली तीज, मांगी पति की लंबी उम्र की दुआ
punjabkesari.in Thursday, Aug 17, 2023 - 08:39 PM (IST)
चंडीगढ़ (चन्द्रशेखर धरणी): ट्राईसिटी की दर्जनों महिलाओं ने मिलकर बुधवार को तीज पर्व मनाया। जिसमें भगवान शिव और मां पार्वती की आराधना की गई तथा खुशियों के इस त्यौहार पर महिलाओं ने आपस में एक दूसरे को मिठाई भी खिलाई। इस उपलक्ष का आयोजन अंजू भारद्वाज द्वारा किया गया था। इस मौके पर पहुंची महिलाएं हाथों में नई चूड़ियां, मेहंदी और पैरों में अल्ता लगाकर पहुंची थी, क्योंकि यह सुहाग का चिन्ह माना जाता है। इस मौके पर पहुंची रानी गुप्ता, लीना शर्मा, उर्मिला मित्तल, राखी, इंदु ढुल, शिवानी पाल, रीटा, महक, सुमित्रा, डिंपल, ममता पुरी, निर्मल बाजवा काफी उत्साहित नजर आईं। भारद्वाज ने बताया कि यह पर्व खुशियों का पर्व है। इस मौसम में सभी फसलें हरी-भरी एक खुशहाली का प्रतीक नजर आती हैं, वहीं आध्यात्मिक लोगों के लिए भी इस पर्व का विशेष महत्व है।
सुहागने, कुंवारी लड़कियां और पुरुष भी रखते हैं निर्जला व्रत
हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखने वाली हरतालिका तीज खास तौर पर सुहागिनों और कुंवारी कन्याओं के लिए अति महत्वपूर्ण व्रत और पर्व माना जाता है। यह व्रत देवों के देव महादेव यानी भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। इस दिन भोलेनाथ और माता पार्वती की पूजा हिंदू धर्म मुताबिक बेहद फलदाई रहती है। बहुत महिलाएं तीज के मौके पर निर्जला व्रत रख हिंदू धर्म के सबसे बड़े देव भगवान शंकर की आराधना कर पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं। सुहागिन महिलाएं भगवान शिव, माता पार्वती और उनके पूरे परिवार की मिट्टी की मूर्तियां बनाकर घर में मंदिर में स्थापित करती हैं तथा इस मौके पर माता का श्रृंगार किया जाता है। महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं, हाथों पर मेहंदी रचाती हैं और रात में माता गौरी की पूजा करती हैं। सुहागिनों के साथ ही कुंवारी लड़कियां अच्छा वर पाने की भी कामना कर उपवास करती हैं। नए वस्त्र पहनकर मां पार्वती की पूजा-अर्चना की जाती हैं। यह व्रत केवल महिलाओं तक ही सीमित नहीं होता। कई जगहों पर पुरुष मां की प्रतिमा को पालकी पर बैठाकर झांकी भी निकालते हैं।
मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए तीज के त्योहार का महत्व
श्रावण में होने व चारों तरफ हरियाली के कारण इसे हरियाली तीज कहा जाता है। माना जाता है कि इस दिन मां पार्वती ने शिव जी को कठोर तपस्या से प्राप्त किया था। इस दिन वृक्ष, नदियों, जल के देवता वरुण की भी उपासना की जाती है। मुख्य रूप से ये त्योहार अच्छे और मनचाहे वर की प्राप्ति का है। जिन कन्याओं के विवाह में समस्या हो, उनके लिए ये पूजा-उपासना विशेष होती है। जिन महिलाओं का विवाह हो चुका हो, उनको भी इस दिन संयुक्त रूप से शिव पार्वती की उपासना करनी चाहिए।
क्या है व्रत की विधि
करवाचौथ की तरह ही यह व्रत भी बेहद कठिन माना जाता है। महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रखती हैं। हरतालिका तीज का व्रत रखने वाली महिलाएं करवा चौथ की ही तरह शाम को चंद्रोदय होने के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं। सुहागिन महिलाओं के द्वारा अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखा जाता है। वहीं कुंवारी लड़कियां भी अच्छे वर की कामना के साथ इस व्रत को रखती हैं। मान्यता है कि इस व्रत को करने से वैवाहिक जीवन सुखमय होता है और पति-पत्नी के बीच आपसी प्रेम बढ़ता है। वैसे तो साल में 3 बार हरियाली तीज, हरतालिका तीज और कजरी तीज त्योहार होते हैं, लेकिन श्रावण मास की तीज अपना अलग महत्व रखती है। ये तीनों व्रत पति की लंबी उम्र, संतान की उन्नति और परिवार की खुशहाली के लिए रखे जाते हैं।
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