ईडी ने मैगनोलियाज डीएलएफ सिटी फेज-5 में अपार्टमेंट किया प्रोविजनल अटैच
punjabkesari.in Monday, Jan 19, 2026 - 08:42 PM (IST)
गुड़गांव, (ब्यूरो): प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) नई दिल्ली ने पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत एक प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया है। जिसमें एम/एस अनवी पॉवर इनवेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर गुरुग्राम के रजिस्टर्ड अपार्टमेंट नंबर 1516 बी, द मैगनोलियास, डीएलएफ सिटी फेज-5, वजीराबाद, हरियाणा को अटैच किया गया है। जिसकी कीमत 32.28 करोड़ रुपए है। पीएमएलए जांच में सामने आया है कि यह प्रॉपर्टी जेनसोल ग्रुप के चेयरमैन और मुख्य प्रमोटर अनमोल सिंह जग्गी ने खरीदी थी और इसे जेनसोल ग्रुप कंपनी एम/एस मैट्रिक्स गैस एंड रिन्यूवेबल्स लिमिटेड से डायवर्ट किए गए फंड का इस्तेमाल कर खरीदा गया था।
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ईडी ने एम/एस मेट्रिक्स गैस एंड रिन्यूवेबल्स लिमिटेड और अन्य के खिलाफ सीबीआई, एसटीबी, नई दिल्ली द्वारा मेकॉन लिमिटेड की शिकायत के आधार पर दर्ज केस के आधार पर जांच शुरू की। ईडी की जांच में सामने आया कि नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (एनजीएचएम) के तहत इस्पात मंत्रालय के माध्यम से भारत में इस्पात क्षेत्र में पायलट परियोजनाओं को लागू करने के लिए हरित हाइड्रोजन का उपयोग कर लोहा और इस्पात बनाने की प्रक्रिया के लिए सरकारी फंड आवंटित किया है।
पायलट परियोजनाओं को लागू करने के लिए, इस्पात मंत्रालय ने एम/एस मेकॉन लिमिटेड को योजना कार्यान्वयन एजेंसी (एसआईए) के रूप में नियुक्त किया। एम/एस मेट्रिक्स गैस एंड रिन्यूवेबल्स लिमिटेड सफल बोलीदाता के रूप में उभरी और शुरू में स्वीकृत सरकारी अनुदान का 20 फीसदी यानी 32.28 करोड़ रुपए एम/एस मेट्रिक्स गैस एंड रिन्यूवेबल्स लिमिटेड को वितरित किया गया। ईडी की जांच में पता चला कि पायलट प्रोजेक्ट के लिए वितरित सार्वजनिक फंड का उपयोग करने के बजाय, एम/एस मेट्रिक्स गैस एंड रिन्यूवेबल्स लिमिटेड कंपनी ने बेईमानी और धोखाधड़ी से पूरी राशि को अनमोल सिंह जग्गी के नियंत्रण वाली कॉर्पोरेट संस्थाओं के एक जाल के माध्यम से कई लेन-देन की श्रृंखला में डायवर्ट किया, जिससे स्रोत को छिपाया जा सके और अंत में प्रमोटरों के व्यक्तिगत लाभ और जेनसोल समूह की अन्य गतिविधियों के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सके।
जांच में यह भी पता चला है कि एम/एस मेट्रिक्स गैस एंड रिन्यूवेबल्स लिमिटेड के फंड को एक ग्रुप कंपनी के नाम पर ऊपर बताई गई लग्जरी प्रॉपर्टी खरीदने के लिए डायवर्ट किया गया था और उसी को अपराध की आय मानते हुए ईडी द्वारा अस्थायी रूप से अटैच कर लिया गया है।