इतिहास गवाह है कि किसान यूनियन ने कभी भी किसानों के हित में कोई काम नही किया: कंवरपाल गुज्जर

10/13/2020 12:22:48 PM

चंडीगढ़(चंद्र शेखर धरणी):  हरियाणा के पर्यटन एवम् शिक्षा मन्त्री कंवरपाल गुज्जर  ने किसान यूनियन को भी आडे हाथों लेते हुए कहा की   आज तक इतिहास गवाह है कि किसान यूनियन ने कभी भी किसानों के हित में कोई काम नही किया। उन्होने कहा कि यह आन्दोलन आढतियों का था लेकिन किसान यूनियन और काग्रेंस अपने हाथ सेंकने में लगी है| गुज्जर ने कहा की एम.एस.पी. ज्यों का त्यों है। मंडी ज्यों की त्यों हैं। बल्कि किसान को ताकत दी गई है कि वह अपनी फसल मंडी में भी भेज सकता है और बाहर भी। पहले मंडी से बाहर छोटे किसान अपनी फसल को अगर किसी व्यापारी को बेचते थे और व्यापारी खरीदते हुए डरता था। इसलिए खरीदार कम थे। लेकिन अब बहुत सारे खरीददार होंगे और स्वाभाविक बात है अगर खरीदार ज्यादा होंगे। तो रेट अधिक मिलेगा। पहले किसान फसल को केवल अपने ही राज्य में भेज सकता था। प्रस्तुत है ख़ास बातचीत के प्रमुख अंश

प्रशनः- राहुल गांधी का पंजाब से हरियाणा दौरा और 2 दिन के प्रवास को आप किस नजर से देखते हैं
उत्तरः-
हर आदमी को अपनी बात कहने का अधिकार है। लोकतंत्र है अगर कोई बात बुरी लगती है तो वह उसका विरोध कर सकता है। लेकिन देश के इस प्रकार के कानूनों के विरोध में खड़ा होना मैं सोचता हूं ठीक नहीं है। आप खुद देखें राहुल गांधी हो या किसान यूनियन अब तक कोई भी गंभीर बात नहीं कर पाए हैं। कागे्रंस ने आम चुनावों के घोषणा पत्र में लिखा था कि हम यह कानून बनाएंगे और अब वही कांग्रेस कह रही है कि इस कानून से किसान बर्बाद हो जाएगा। मैं दावा करता हूं कि यह अध्यादेश 100 प्रतिशत किसानों के हित में हैं।

प्रशनः- राहुल गांधी को एकाएक हरियाणा की याद कैसे आई। क्या आपको राजनीतिक कारण लगते हैं इसके पीछे
उत्तरः-
यह तो आढतियों का आंदोलन था। फिर इसमें किसान यूनियन आ गई। फिर कांग्रेस ने सोचा कि भीड़ इकट्ठा हो ही रही है तुम भी हाथ सेक लो। कांग्रेस ने एक बार भी नहीं सोचा कि तुम राजनीतिक फायदा लेने की सोच रहे हो। लेकिन जैसे-जैसे किसान को समझ में आएगा वह कांग्रेस के खिलाफ खड़ा हो जाएगा। कुछ किसान अध्यादेशों को समझ चुके हैं कुछ 3 माह में समझ जाएंगे और कुछ 6 महीने में। उसके बाद काग्रेंस को भारी राजनीतिक नुकसान होने वाला है। अबकी बार तो 40-45 सीटें आ भी गई थी। अगली बार यह भी साफ हो जाएंगी।

प्रशनः- पिपली में लाठीचार्ज वाली जगह पर ही राहुल गांधी जी को क्यों लाया गया| 
उत्तरः-
कहीं कोई लाठी चार्ज नहीं हुआ। भीड़ तो हुई और भीड़ में धक्का-मुक्की भी हो सकती है। सिर्फ दो ही व्यक्तियों को चोट बताई गई एक सुरजेवाला का जानकर और दूसरा एक बुजुर्ग सामने आया। भीड़ में गिरकर भी चोट लग सकती है। लाठीचार्ज में केवल 2 आदमियों को चोट नहीं लगती। हमारी सरकार किसानों पर लाठी नहीं मारती। यह कर्म तो कांग्रेस करती थी। हमने कांग्रेस के सरकार में किसानों के लिए लाठियां खाई हैं। शुगर मिल में देवली से आगे तक लाठी चार्ज करते हुए पीटते हुए ले गए थे। घोड़ा पुलिस हमारे ऊपर लाठी चार्ज कर रही थी।

प्रशनः- ऐसे क्या तर्क हैं जो आप किसानों को समझाएंगे कि यह अध्यादेश किसान विरोधी नहीं किसान हितेषी हैं
उत्तरः-
एम.एस.पी. ज्यों का त्यों है। मंडी ज्यों की त्यों हैं। बल्कि किसान को ताकत दी गई है कि वह अपनी फसल मंडी में भी भेज सकता है और बाहर भी। पहले मंडी से बाहर छोटे किसान अपनी फसल को अगर किसी व्यापारी को बेचते थे और व्यापारी खरीदते हुए डरता था। इसलिए खरीदार कम थे। लेकिन अब बहुत सारे खरीददार होंगे और स्वाभाविक बात है अगर खरीदार ज्यादा होंगे। तो रेट अधिक मिलेगा। पहले किसान फसल को केवल अपने ही राज्य में भेज सकता था। मान लो यूपी का किसान हरियाणा में फसल आता था तो आरती सौ दोसौ कम कीमत पर उसकी फसल खरीदता था। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। पहले जैविक खेती करने वाले छोटे किसान को कीमत नहीं मिल पाती थी। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। यह बदलाव अभी ज्यादा नहीं दिखेगा। क्योंकि अभी एक-दो प्रतिशत ही किसान बाहर अपनी फसल बेचेंगे। लेकिन उन्हें देखकर धीरे-धीरे किसान अपनी फसल को मंडी से बाहर बेचने लगगें और किसान की आमदनी बढ़ेगी।

प्रशनः-फिर आखिरकार किसान सड़कों पर क्यों है क्यों रोकी जा रही है रेलें
उत्तरः-
पहले पेमेंट आढ़तियों के खातों में जाती थी। लेकिन अब सिस्टम बदल गया। फसल किसान की होगी तो पैसा भी किसान के खाते में जाएगा। आढती के खाते में पेमेंट जाने का सीधा नुकसान किसान को होता था। क्योंकि फसल के बाद जब दोनों बैठकर हिसाब करते थे तो आढती फसल से पहले लिए हुए उधार पैसों पर ब्याज अपनी मनमर्जी से लगाता था। लिया हुआ बीज- खाद और कीटनाशक दवाओं का रेट भी मार्किट कीमत से ज्यादा वसूलता था। लेकिन अब किसान के खाते में पेमेन्ट जाने से किसान को ताकत मिलेगी और किसान जब हिसाब करेगा तो रेट और ब्याज मार्किट के हिसाब से लगेगा। मैं पूछना चाहता हूं कॉग्रेंस और किसान यूनियनों से कि वह किसान के साथ हैं या आढतियोें के साथ। इतिहास उठाकर देख लो किसान यूनियन ने आज तक कोई भी काम किसानों के हित में नहीं किया। नेता किसानों के बनते हैं लेकिन खड़े आढतियों के साथ हैं। किसान यूनियनों, काग्रेंस और आढ़तियों को मैं चैलेंज देता हूं कि किसी भी चैनल पर डिबेट में आओ और बहस करो। और बताओं की क्या कमी है इन अध्या देशों में।

प्रशनः-गुज्जर साहब, स्कूलों को पूरी तरह से कब तक खोल रहे हैं। क्या रहेगा कॉलेजों का
उत्तरः-
बड़े बच्चों के लिए स्कूल खोल दिए गए हैं। हम जल्द ही छोटे बच्चों के लिए भी स्कूल खोलने जा रहे हैं।

प्रशनः- क्या पर्यटन विभाग निजी हाथों में देने की तैयारी है
उत्तरः-
अभी तक तो कोई ऐसी तैयारी नहीं है लेकिन हर्ज भी नहीं है। क्योंकि पर्यटन विभाग एक बिजनेस है। कोई सेवा नहीं है और कोई भी बिजनेस घाटे के लिए नहीं किया जा सकता। हमारी एजुकेशन एक सेवा है, हमारे अस्पताल एक सेवा हैं, नाली गलियां बनाना भी एक सेवा है लेकिन पर्यटन विभाग एक बिजनेस है।

प्रशनः- हाथरस में कांग्रेस भाजपा के विरोध में खड़ी है क्योंकि वहां पर भी भाजपा की सरकार है।
उत्तरः-
देखिए इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई है। दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होगी। योगी जी खुद इस मामले को बडी गम्भीरता से ले रहे हैं। लेकिन मैं एक बात कहना चाहता हूं बेटी की कोई जाति नहीं होती बेटी सबकी बराबर होती है और अपराधी की भी कोई जाति नहीं होती। इस मामले को जाति का रंग नहीं देना चाहिए क्योंकि अपराधियों की जाति के भी 99 प्रतिशत लोग उस बेटी के हक में खड़े हैं।

प्रश्न -शिक्षा  में क्या नए आयाम स्थापित हुए हैं ?
उत्तर -
विगत छ: वर्षों में मुख्यमंत्री  मनोहर लाल के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे सुधारों के फलस्वरूप न केवल सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है बल्कि सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों का रूझान शिक्षा के प्रति बढ़ रहा है। इसी के फलस्वरूप  सरकारी स्कूलों के 25 विद्यार्थियों ने जेईई परीक्षा उत्तीर्ण कर राष्ट्रीय स्तर पर आईआईटी में दाखिला प्राप्त करने में सफलता हासिल की है।शिक्षा विभाग द्वारा  पंचकूला व रेवाड़ी में वर्ष 2018 में सरकारी स्कूलों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को दसवीं कक्षा के बाद उच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिले के लिए तैयारी करवाने हेतु विशेष कार्यक्रम सुपर-100 की शुरूआत की गई। यह कार्यक्रम सफल रहा और हरियाणा के इतिहास में पहली बार सरकारी स्कूलों के 25 विद्यार्थियों को आईआईटी जैसी संस्थानों में दाखिला पाने के लिए जगह बनाई है।नई शिक्षा नीति-2020 में विभिन्न नए सुधारों को शामिल किया गया है जो छात्रों के हित में हैं। नई शिक्षा नीति में छात्रों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में बाधा उत्पन्न करने वाली सभी अड़चनों को दूर कर दिया गया है।  

 

 


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Isha

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