कैसे पढ़ेगी बेटी, कैसे बढ़ेगी बेटी: गोहाना महिला कॉलेज की इमारत जर्जर, डर के साये में पढ़ने को मजबूर छात्राएं

punjabkesari.in Wednesday, Jan 28, 2026 - 09:11 PM (IST)

गोहाना (सुनील जिंदल) : बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के नारे जमीन पर कितने खोखले हैं, इसकी बानगी गोहाना के राजकीय महिला कॉलेज में देखने को मिलती है। कॉलेज की पुरानी इमारत को सरकार ने वर्ष 2017 में कंडम (असुरक्षित) घोषित कर दिया था, लेकिन 8 साल बीत जाने के बावजूद आज तक इसके पुनर्निर्माण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। नतीजतन, छात्राएं आज भी जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर हैं।

यह कॉलेज कभी सह-शिक्षा संस्थान हुआ करता था, जहां लड़के और लड़कियां दोनों पढ़ते थे। बाद में इसे पूर्ण रूप से महिला कॉलेज में परिवर्तित कर दिया गया। वर्तमान में इस कॉलेज में कला, विज्ञान और वाणिज्य सहित विभिन्न संकायों में 2 हजार से अधिक छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। बावजूद इसके, आधारभूत ढांचे की हालत बेहद चिंताजनक बनी हुई है।

सरकार को लिख चुके कई पत्र

कॉलेज की मौजूदा प्रिंसिपल भी इसी संस्थान की पूर्व छात्रा रही हैं। उन्होंने बताया कि कॉलेज की पुरानी बिल्डिंग को उन्होंने स्वयं बारीकी से निरीक्षण किया है और यह भवन छात्राओं की सुरक्षा के लिहाज से बेहद जोखिम भरा है। कॉलेज प्रशासन की ओर से कई बार सरकार को पुनर्निर्माण के लिए पत्र लिखे गए, लेकिन अब तक कोई बजट स्वीकृत नहीं हुआ।

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NCC-NSS के लिए नहीं मिल रहा बजट

प्रिंसिपल ने यह भी कहा कि केवल भवन ही नहीं, बल्कि NCC और NSS जैसी गतिविधियों के लिए भी पर्याप्त बजट नहीं मिल पा रहा है। यदि संसाधन उपलब्ध कराए जाएं तो छात्राओं के सर्वांगीण विकास के लिए बेहतर कार्य किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जिस कॉलेज से पढ़कर आज वे प्रिंसिपल बनी हैं, उसके विकास के लिए वे हर संभव प्रयास करेंगी।

कॉलेज के एक वरिष्ठ लेक्चरर शमशेर भंडेरी ने भी चिंता जताते हुए कहा कि वे स्वयं इसी कॉलेज के छात्र रहे हैं और अब यहीं पढ़ा रहे हैं। उन्होंने बताया कि 2017 में भवन कंडम घोषित होने के बावजूद आज तक इसका समाधान नहीं निकाला जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

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Content Writer

Yakeen Kumar

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