हरियाणा में डीएलएड दाखिले की तारीख बढ़ाने से हाईकोर्ट का इन्कार, निजी कालेजों को अतिरिक्त काउंसलिंग की अनुमति नहीं
punjabkesari.in Thursday, Oct 15, 2026 - 06:22 PM (IST)
चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी) : हरियाणा में डीएलएड (प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षण) पाठ्यक्रम में दाखिले की अंतिम तारीख बढ़ाने की मांग पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों को सुप्रीम कोर्ट की निर्धारित दाखिला समय-सारिणी का पालन करना होगा और तय तारीख के बाद दाखिले की अनुमति नहीं दी जा सकती। खाली सीटों के लिए निजी कालेजों को मुआवजा देने की मांग भी स्वीकार नहीं की गई।
हरियाणा सेल्फ फाइनेंस प्राइवेट कालेज एसोसिएशन ने शैक्षणिक सत्र 2026-28 के लिए दाखिले की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाने की मांग की थी। एसोसिएशन के अनुसार, शिक्षा बोर्डों के परीक्षा परिणाम देर से घोषित होने के कारण कई विद्यार्थी दाखिले के लिए आवेदन नहीं कर सके। इससे सीटों के मुकाबले आवेदन और दाखिलों की संख्या कम रही।
चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि डीएलएड जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रम में शैक्षणिक मानकों का पालन जरूरी है। प्रशिक्षण लेने वाले विद्यार्थी प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाते हैं, इसलिए प्रशिक्षण की गुणवत्ता से समझौता शिक्षा के हित में नहीं होगा। अदालत ने हरियाणा सरकार को अगले कैलेंडर वर्ष की शुरुआत से पहले दाखिला नीति प्रकाशित करने का निर्देश दिया।
अदालत को बताया गया कि प्रदेश की कुल 18,850 सीटों के लिए 9,081 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया और 8,724 को दाखिला मिला। एसोसिएशन के सदस्य कालेजों को आवंटित 3,550 सीटों में से 2,523 खाली रह गईं। कालेजों ने अतिरिक्त काउंसलिंग या दाखिले में देरी से हुए नुकसान के लिए प्रति विद्यार्थी 51,600 रुपये मुआवजे की मांग की थी। अदालत ने दोनों मांगें ठुकरा दीं।
खंडपीठ ने राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के 2014 के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि दो वर्षीय व्यावसायिक पाठ्यक्रम में हर वर्ष कम से कम 200 कार्य दिवस तय हैं। इसमें परीक्षा और दाखिला अवधि शामिल नहीं है। विद्यार्थियों के लिए प्रायोगिक कार्य समेत कम से कम 80 प्रतिशत उपस्थिति और विद्यालय इंटर्नशिप के दौरान 90 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य है। कार्य दिवस, उपस्थिति, इंटर्नशिप और सामुदायिक सर्वेक्षण संबंधी शर्तों का पालन जरूरी है। तारीख बढ़ाने से पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
हाईकोर्ट ने मां वैष्णो देवी महिला महाविद्यालय बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लेख किया। इसके अनुसार, दाखिला प्रक्रिया 28 जून तक पूरी होनी चाहिए, ताकि शैक्षणिक सत्र एक जुलाई से शुरू हो सके।