बेटियों की हिम्मत को सलाम, पिता भाई के आंदोलन में जाने के बाद चूल्हे चौके के साथ संभाली खेती
punjabkesari.in Thursday, Dec 17, 2020 - 04:04 PM (IST)
फ़तेहाबाद(रमेश): दिल्ली आंदोलन में गए किसानों की बेटियां, बेटों से कम नहीं है। पढऩे की उम्र में बेटियां घर के रोजमर्रा के कामों के साथ-साथ खेत खलिहान संभाल रही हैं। कड़कड़ाती ठंड में जहां लोग रजाईयों में दुबके हुए हैं वहीं प्रदेश की बहुत सी बेटियां हाथों में कस्सी फावड़े लेकर खेतों में जाती दिखाई दे जाएंगी। यह कोई इनका शौंक नहीं है बल्कि मजबूरी है क्योंकि नए कृषि कानूनों के विरोध इनके पिता दिल्ली बॉर्डर पर डटे हैं। ऐसे में उनकी गैरमौजूदगी में किसानों के बच्चे खेतीबाड़ी संभाल रहे हैं। इस जिम्मेदारी में बेटे ही नहीं बल्कि बेटियां भी खेतों में सिंचाई से लेकर अन्य कामकाज कर रही हैं।

हरियाणा के फतेहाबाद के गांव भरपूर में ऐसे ही एक परिवार के पुरुष सदस्यों के किसान आंदोलन में भाग लेने के चलते महिलाएं खेत में कस्सी चला रही हैं। फतेहाबाद के भरपूर गांव की बेटियां भी कस्सी लेकर खेत में काम करने पहुंची। बेटियों के परिवार वाले आंदोलन में हिस्सा लेने दिल्ली गए हुए हैं। पीछे से लड़कियां खेत में सिंचाई करने के लिए नाकाबंदी व गेंहू में खाद का छिड़काव कर रही हैं। खेत मे काम कर रही किसानों की बेटियां अन्नू व विना रानी कहती हैं कि उनके पिता व भाई आंदोलन में गए हुए हैं इसलिए हम खेत में आकर काम कर रहे हैं ताकि फसल देखरेख के अभाव में खराब न हों।

उन्होंने कहा की मेहनत करके परिवार अन्न उगाता है इसलिए बाजुओं में पूरी ताकत हैं। इस दौरान परिवार की अन्य महिलाएं भी उसके साथ रहीं। उन्होंने कहा कि घर का चूल्हा चोंके का काम छोड़कर अपनी खेती सम्भाल रही है। लड़कियों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि इन कृषि कानूनों को तुरंत रद्द करें ताकि उनके पिता सहित देश के हजारों किसान वापस अपने घरों को लौट सकें।
