Haryana : इस खेती ने बदली किसान की तकदीर ! मामूली लागत में कमा रहा लाखों का मुनाफा, क्षेत्र के बने रोल मॉडल

punjabkesari.in Tuesday, Mar 03, 2026 - 04:37 PM (IST)

सिरसा (सतनाम) : गांव नाथूसरी कलां का एक छोटी जोत का किसान ईश्वर सिंह परंपरागत फसलों की बजाय स्ट्राबरी फल की खेती के जरिए दूसरे किसानों को न केवल प्रेरित कर रहा है बल्कि एक मिसाल भी प्रस्तुत कर रहा है। ईश्वर सिंह के पास 9 एकड़ जमीन है। 5 एकड़ में स्ट्राबरी की खेती करता है। एक एकड़ में करीब 100 क्विंटल के आसपास उत्पादन होता है। 

प्रति एकड़ 2 से अढ़ाई लाख रुपए तक का मुनाफा हो जाता है। ऐसे में गेहूं, धान, नरमा जैसी फसलों की तुलना में यह मुनाफ तीन गुणा तक है। 9 एकड़ में 4 एकड़ पर ईश्वर सिंह सब्जियों की काश्त करता है। वही सरकार भी किसान को प्रति एकड़ चालीस हजार की वित्तीय सहायता भी करती है।

एक एकड़ में होती है करीब 100 क्विंटल की पैदावार

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किसान ईश्वर सिंह ने बताया कि स्ट्राबरी की खेती में एक एकड़ में करीब साढ़े 5 लाख रुपए की लागत आती है। एक एकड़ में 35 हजार बीज डालने पड़ते हैं और एक बीज की कीमत 10 रुपए है। इसके अलावा सिंचाई, बिजाई, दवाइयों का खर्च भी होता है। एक एकड़ में करीब 100 क्विंटल की पैदावार हो जाती है और बाजार भाव करीब 150 से 175 रुपए प्रति किलो रहता है। ऐसे में सारा खर्च निकालकर एक एकड़ में 2 से अढ़ाई लाख रुपए का मुनाफा हो जाता है। 

किसान ने बताया कि वर्तमान समय में किसानों को परंपरागत फसलों की बजाय दूसरी फसलों की ओर रुझान करना पड़ेगा। सिरसा जैसे क्षेत्र में बागवानी की अच्छी संभावनाएं हैं। खास बात यह है कि धान जैसी फसलों में भूजल का अधिक दोहन होता है जबकि सब्जियों व बागवानी में आप सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली का प्रबंध करके जल की भी बचत कर सकते हैं।

15 साल पहले शुरू की थी स्ट्राबरी की खेती

किसान ईश्वर सिंह ने बताया कि उन्होंने करीब 15 साल पहले स्ट्राबरी की खेती शुरू की थी। परंपरागत फसलों का उत्पादन ठीक नहीं था। नरमा-कपास पर बीमारियों का प्रकोप था। गेहूं की पैदावार भी अच्छी नहीं थी। ऐसे में कुछ अलग करने की सोच थी। पहले कुछ क्षेत्र पर ही स्ट्राबरी की खेती शुरू की। इसमें जोखिम और मेहनत है, लेकिन अगर आप खेती के प्रति जुनूनी हैं तो सफलता मिल ही जाती है। ईश्वर सिंह के अनुसार अब वे 5 एकड़ में स्ट्राबरी की खेती करते हैं।  

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Content Editor

Krishan Rana

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