हरियाणा वर्क स्लिप घोटालाः 90% निकलीं फर्जी रसीदें, वैध श्रमिकों के लिए जल्द खुलेगा पोर्टल
punjabkesari.in Saturday, Apr 04, 2026 - 12:53 PM (IST)
चंडीगढ़ : हरियाणा के श्रम मंत्री अनिल विज ने कहा कि उनके द्वारा हरियाणा भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में वर्कस्लिप (90 दिन कार्य रसीद) से जुड़ी अनियमितताओं कि जांच के लिए गठित की गई 22 जिलों की कमिटियों से रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है जिसमें लगभग 90 प्रतिशत वर्क स्लिप फर्जी पाई गई है। लेकिन 10 प्रतिशत वैध पाई गई वर्क स्लिप के श्रमिकों को बोर्ड द्वारा दिए जाने वाले लाभों के लिए जल्द ऐसे श्रमिकों की आईडी एक्टिवेट/पोर्टल खोला जाएगा। इसके अलावा, अवैध पाई गई वर्क स्लिप श्रमिकों को सुनवाई का मौका दिया जाएगा, उसके लिए ऐसे श्रमिकों को अपना प्रतिवेदन बनाई जाने वाली समिति या ऑथोरिटी को देना होगा।
इस संबंध में श्रम मंत्री अनिल विज द्वारा एक प्रस्ताव मुख्यमंत्री को भेजा गया था जिसे स्वीकृति दे दी है और अब श्रम मंत्री ने इस प्रस्ताव को सरकार द्वारा गठित की गई उच्च स्तरीय समिति को अनुशंसा हेतु भेजा गया है। विज ने इस संबंध जानकारी देते हुए बताया कि सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति की स्वीकृति प्राप्त होने के पश्चात ही इस प्रस्ताव में दी गई सिफारिशों को लागू किया जाएगा।
सभी जिलों में उपायुक्त की अध्यक्षता में किया वर्क स्लिपों का सत्यापन
विज ने बताया कि प्रारंभिक तौर पर तीन जिलों हिंसार, कैथल और जींद में जांच कराई गई, जहां बड़े पैमाने पर अनियमितताएं पाई गईं। राज्य के सभी जिलों के उपायुक्तों को निर्देश जारी कर जिला स्तरीय समितियों का गठन किया गया, जिनमें श्रम विभाग के अधिकारी सहित तीन अन्य अधिकारी शामिल किए गए। इन समितियों द्वारा ऑनलाइन वर्कस्लिपों का भौतिक सत्यापन किया गया है और कुल 90 प्रतिशत वर्क स्लिप फर्जी पाई गई। जिनमें कुल 21785 23 वर्कस्लिपों में केवल 270945 वर्कस्लिप सही पाई गई है जबकि 1907578 वर्कस्लिप फर्जी पाई गई है।
विज ने कहा कि वर्ष 2008 से संचालित योजनाओं का लाभलेने वाले श्रमिकों के वर्क स्लीपों की भी जांच की जा सकती है जोकि अभी दो साल अवधि का अनुमानित 1500 करोड़ रूपए का घोटाला की राशि और अधिक होने की संभावना है जोकि हजारों करोड़ रूपए के घोटाला हो सकता है। विज ने बताया कि जांच में दोषी पाए जाने वालों को सजा देने पर भी विचार किया जा रहा है।
जो पात्र नहीं, वे योजनाओं का लाभ उठा रहे
विज ने कहा कि यह स्पष्ट हो गया है कि कई स्थानों पर गांव गांव / शहर-शहर में फर्जी पंजीकरण कर वर्कस्लिपॅ बनाई गईं, ताकि अपात्र लोग सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकें। एक श्रमिक को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से औसतन 2.5 लाख रूपए तक का लाभ दिया जाता है, जिससे सरकार को भारी वित्तीय क्षति होने की संभावना है। श्रम मंत्री ने कहा कि जो पात्र नहीं हैं, वे योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं। यह सीधी-सीधी लूट है और सरकार को सैकड़ों करोड़ रुपए की आर्थिक हानि पहुंचाई जा रही है।
भ्रष्टाचार पर समझौता नही, दोषियों पर होगी कठोर कार्रवाई
विज ने बताया कि हरियाणा में निर्माण श्रमिकों के लिए मातृत्व-पितृत्व लाभ, शिक्षा सहायता, छात्रवृत्ति, तकनीकी शिक्षा प्रतिपूर्ति, पेंशन, विवाह सहायता, चिकित्सा सहायता, आवास ऋण, दुर्घटना मुआवजा सहित अनेक कल्याणकारी योजनाएं संचालित हैं, जिनका उद्देश्य वास्तविक श्रमिकों का सशक्तिकरण है। इन योजनाओं का लाभ केवल उन्हीं श्रमिकों को मिलना चाहिए जो 90 दिनों के कार्य सत्यापन के बाद विधिवत पंजीकृत हों। श्रम मंत्री ने दोहराया कि भ्रष्टाचार पर किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। विज ने बताया कि हरियाणा में भवन निर्माण में लगे श्रमिकों को विभिन्न प्रकार की कल्याणकारी योजनाओं को लाभ प्रदान किया जाता है।
अग्रवाल कमेटी की अब 6 अप्रैल को होगी बैठक
श्रम विभाग के वर्क स्लिप घोटाले की जांच के लिए आई.ए.एस. पंकज अग्रवाल की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय कमेटी की बैठक शुक्रवार को नहीं हो पाई। अब यह बैठक 6 अप्रैल को होगी। इस बाबत पंकज अग्रवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री के साथ कई बैठकें होने के कारण आज बैठक नहीं हो सकी। अब सोमवार को बैठक निश्चित की गई है। उन्होंने बताया कि सोमवार की बैठक में रिपोर्ट तैयार करने के पहलुओं पर मंथन किया जाएगा। उसके बाद रिपोर्ट तैयार कर मुख्यमंत्री को भेजी जाएगी।
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