हरियाणा में महाघोटाला: सरकारी खजाने में सेंध लगाने वालों की खैर नहीं, बैंक फर्जीवाड़े को लेकर सरकार ने उठाया बड़ा कदम

punjabkesari.in Tuesday, Mar 31, 2026 - 09:21 AM (IST)

चंडीगढ़: हरियाणा में सरकारी पैसे की बंदरबांट और निजी बैंकों के साथ मिलकर किए गए करोड़ों रुपये के घोटाले ने राज्य की सियासत और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। पहले 590 करोड़ के रूप में सामने आया यह आंकड़ा अब बढ़कर 748 करोड़ तक पहुंच गया है। मामले की गंभीरता और इसकी गहरी जड़ों को देखते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सरकार ने इसकी CBI (केंद्रीय जांच ब्यूरो) से जांच कराने की सिफारिश कर दी है।

यह घोटाला सरकारी विभागों के पैसे को निजी बैंकों में जमा करने और वहां से फर्जी तरीके से निकालने से जुड़ा है। मुख्य रूप से इसमें तीन निजी बैंकों के नाम सामने आए थे। जांच में पता चला कि पंचकूला नगर निगम और मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना जैसे अहम विभागों का पैसा इन बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के रूप में रखा गया था। बैंक कर्मचारियों ने कथित तौर पर फर्जी चेक, जाली हस्ताक्षर और शेल कंपनियों का सहारा लेकर करोड़ों रुपये निजी खातों में ट्रांसफर कर दिए।

 
ताजा खुलासा पंचकूला नगर निगम से जुड़ा है। निगम ने जब कोटक महिंद्रा बैंक से अपनी 58 करोड़ की मैच्योर हुई एफडी मांगी, तो पता चला कि खाता खाली है। जांच में सामने आया कि बैंक अधिकारियों ने फर्जी दस्तावेज दिखाकर निगम को गुमराह किया और करीब 150 करोड़ की हेराफेरी की।अब तक हरियाणा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) इस मामले की जांच कर रही थी।

पुलिस ने अब तक आईडीएफसी बैंक के पूर्व अधिकारियों, रिलेशनशिप मैनेजरों और कुछ निजी कारोबारियों सहित 12 से ज्यादा लोगों को सलाखों के पीछे भेजा है।क्योंकि घोटाले का जाल कई राज्यों और बड़े वित्तीय संस्थानों तक फैला है, इसलिए हरियाणा सरकार ने केंद्र को पत्र लिखकर इसकी जांच CBI को सौंपने की औपचारिक सहमति दे दी है।

 


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Content Writer

Isha

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