29 अगस्त से कुरुक्षेत्र में किरण चौधरी द्वारा कांग्रेस में वार्चसर का शंखनाद

punjabkesari.in Tuesday, Aug 16, 2022 - 11:53 AM (IST)

चंडीगढ़( चंद्र शेखर धरणी): राज्यसभा चुनावों में हरियाणा प्रदेश के कुछ कांग्रेसी विधायकों द्वारा किरण चौधरी के खिलाफ फ्रंट खोलने व पराजित प्रत्याशी अजय माकन द्वारा सीधे तौर पर रद्द वोट में किरण चौधरी पर हमला बोल जाने के बाद अब किरण चौधरी ने कांग्रेस के शुद्धिकरण के लिए फ्रंटफुट पर खेलने की रणनीति तैयार कर ली है।किरण चौधरी ने इसको ले दिल्ली स्थित अपने निवास पर हरियाणा के चुनिंदा कांग्रेसियों की एक बैठक बुला कांग्रेस के ही मजबूत ग्रुप के खिलाफ कर्मभूमि व रणभूमि कुरुक्षेत्र से अपने राजनैतिक युद्ध का बिगुल बजाने के निर्णय लिया है।29 अगस्त से कुरुक्षेत्र में किरण चौधरी द्वारा कांग्रेस में वार्चसर का शंखनाद: होने की तैयारी है। शुद्धिकरण के लिए आर-पार के मूड में  राजनैतिक बिगुल बजाने के निर्णय लिया गया है।

किरण चौधरी द्वारा बुलाई गई इस बैठक में 15 अगस्त को दिल्ली उनके आवास पर शामिल प्रान्त स्तरीय नेतायों में एक दर्जन के करीब पूर्व विधायक भी शामिल हुए।सभी ने हरियाणा में कांग्रेस की कमान एक नेता व एक गुट को देने के आलाकमान के फैंसले को बदलने के लिए दवाब बनाने व आर-पार की लड़ाई लड़ने के लिए किरण चौधरी को अपना नेता स्वीकार किया।इस बैठक में कांग्रेस की पूर्व प्रदेशाध्यक्ष कुमारी शेलेजा,केंद्रीय कांग्रेस संगठन में महामंत्री रणदीप सुरजेवाला,पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन का कोई भी समर्थक नजर नही आया।मगर माना यहजा रहा है कि जिस प्रकार कुमारी शेलेजा की कुर्सी प्रदेशाध्यक्ष के रूप में छीनी गई, उससे आहत यह ग्रुप अभी पर्दे के पीछे रह सभी राजनैतिक घटनाक्रम पर नजर रख रहा है। किरण चौधरी के किसी भी जगह कार्यक्रम के लिए एक कमेटी प्रान्त स्तरीय बनाई गई है।जिसके अध्यक्ष पूर्व गृह राज्य मंत्री सुभाष बत्रा बनाए गए हैं।किरण जिस जिले में जाएंगी,वहां रात्रि ठहराव भी रखेंगी ।प्राम्भिक रूप से वह कुरुक्षेत्र, फरीदाबाद,करनाल व जींद जिलों में जाएंगी।एक सप्ताह में एक जिले में कार्यक्रम रहेगा।

किरण चौधरी के इन कदमों पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष उदय भान व नेता प्रतिपक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री भुपिंदर सिंह हुड्डा की भी निःसंदेह पैनी निगाहैं रहेंगी।वह किरण के इस न्याय युद्ध का तोड़ क्या निकालते हैं पर सबकी निगाहें रहेंगी।अत्तीत में जब 6-7 वर्ष पूर्व किरण चौधरी ने जब अलग रैलियां की थी तब भी हुड्डा ने अपने बचपन के साथी सुभाष बत्रा की मध्यस्थता से सुंदरनगर स्थित उनके निवास पर जाकर स्थिति नियन्त्रित की थी। कांग्रेस के इस गृह-युद्ध के सार्वजनिक होने पर भजपा के लिए स्थिति सबसे ज्यादा सुखद रहने वाली है क्योंकि बाहिर दर्शक-दीर्घा में बैठ लुत्फ उठाने का लाभ मिलेगा।नेता प्रतिपक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री भुपिंदर सिंह हुड्डा के पास लम्बा राजनैतिक अनुभव व पूरे हरियाणा में पैठ है।

हरियाणा प्रदेश में कांग्रेस की कमान नेता प्रतिपक्ष भूपिंदर सिंह हुड्डा गुट को देने व प्रदेशाध्यक्ष उदयभान को बनाने से आहत हुए कांग्रेस के सभी अन्य उपेक्षित नेता किरण चौधरी के संपर्क में है।जिससे लगताहै,की आने वाले दिनों में कांग्रेस की गुटबाजी सड़कों पर अब ज्यादा खुलकर दिखेगी।पिछले दिनों किरण चौधरी ने कहा भी है कि अच्छे बुरे वक्त में जब कांग्रेस का साथ छोड़कर नेता भाग गए, हमने कभी कांग्रेस का दामन नहीं छोड़ा। कॉन्ग्रेस हमारे अंदर है। लेकिन राजनीतिक विरोधियों को किरण चौधरी आंख का रोड़ा दिख रही है। क्योंकि किरण चौधरी हमेशा सच्चाई की बात करती है और निष्पक्षता के साथ अपने काम को करती है। किरण चौधरी का कोई और एजेंडा नहीं होता। लेकिन मेरे राजनीतिक विरोधी भाई अपना काम करने की कोशिशों में लगे रहते हैं। लेकिन एक बात कहना चाहती हूं कि इससे पार्टी आगे नहीं बढ़ती। इससे पार्टी कमजोर होती है। यह कोई अच्छी बात नहीं है।

किरण चौधरी कहतीं हैं कि मेरे प्रतिद्वंदी चाहते हैं कि किसी तरीके से किरण को बाहर निकाल दिया जाए। लेकिन उन्हें नहीं पता कि मैं किस मिट्टी की बनी हूं। मैंने राजनीति में कभी कुछ नहीं लिया। निष्पक्ष और पाक साफ काम किया है। मुझे अपने राजनीतिक विरोधियों को संभालना आता है। मैं राजनीति में काम करने के लिए आई हूं। मुझे बाहर निकालने की सोच रखने वाले गलतफहमी का शिकार हैं। मैं डटकर काम करती हूं। विधानसभा में जो काम बहुत कम लोग कर सकते हैं, वह करती हूं। अपने पक्ष को मजबूत ढंग से पेश करती हूं। विधानसभा के अंदर हो या बाहर हमेशा पार्टी के हित में काम किया है और करती रहूंगी। विरोधियों को पता है कि कब केवल और केवल किरण चौधरी ही बची हैं उनके खिलाफ की मुहिम छेड़ो। जबकि जनता अच्छी तरह से जानती है कि किरण किस तरह की नेता है। जनता जानती है कि कौन किस के लायक है और कौन क्या कर सकता है। किरण चौधरी ने न गलत करेंगे न गलत सहेंगे का मूल मंत्र दिया है।प्राप्त जानकारियों के अनुसार किरण चौधरी जल्दी ही हरियाणा में अलग-अलग जिलों में अपने समर्थकों को वार्म-अप करने के लिए जिला व उपमंडल स्तर पर 4 दर्जन जगह चाय का कार्यक्रम भी रखने जा रही हैं।

 किरण चौधरी की नजर अपने स्वर्गीय पति सुरेन्द्र सिंह की पुरानी टीम व ससुर बंसीलाल के पुराने समर्थकों पर भी है।वह कहती हैं कि चौ सुरेंद्र सिंह के आकस्मिक निधन के बाद उनका राजनीति में काफी घातक परिस्थितियों में आना हुआ। उनका सफर संघर्ष भरा रहा। लेकिन पिछले 18 साल से पूरे हरियाणा ने देखा है कि वह बड़ी ईमानदारी और निष्ठा के साथ चाहे मंत्री रहते हुए या नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में अपना काम किया। जनता की आवाज उठाई। जितना भी हो सका कार्यकर्ताओं के लिए भी काम किया है। विधानसभा हो या बाहर हमेशा जनहित की आवाज उठाई है। अब समय नजदीक है। वह इस कार्य के लिए रूपरेखा तैयार कर रही हैं। पंचायत चुनाव के बाद पूरे प्रदेश भर में हर जिले में अपने कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें करूंगी। चौधरी बंसीलाल हरियाणा के निर्माता थे। बड़े संघर्षशील तरीके से लोगों के लिए काम किया। उनकी भविष्य की सोच के कारण ही आज हरियाणा का विकास हो रहा है। वह बेदाग छवि के मालिक थे। चौधरी सुरेंद्र सिंह संघर्षशील नेता रहे। भरसक प्रयास करती रही हूं कि उनके पद चिन्हों पर चलते रहूँ। मैंने मंत्री रहते भी लोगों की आवाज बुलंद की। लोगों के लिए काम किए। जो भी ताकत मेरे हाथ में थी मैंने कभी भी उसमें कमी नहीं छोड़ी।

 

              


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Content Writer

Isha

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