हत्या कर शव को टुकड़े कर नहर में फेंकने वालों को उम्रकैद, कोर्ट ने क्रूर अपराध करार किया

punjabkesari.in Tuesday, Feb 10, 2026 - 10:10 PM (IST)

गुड़गांव, (ब्यूरो): साल 2018 में डीएलएफ फेज-दो में हुई जकरन सिंह की रोंगटे खड़े कर देने वाली हत्या के मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुनीत सहगल की अदालत  ने मंगलवार को अपना फैसला सुना दिया है। अदालत ने सह-आरोपी और नौकर जगदीश को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है और एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत ने इस अपराध को जघन्य और क्रूर करार दिया।

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अधिवक्ता सुमित सैनी ने अदालत में बताया कि इस पूरे हत्याकांड की साजिश मुख्य आरोपी 80 वर्षीय हरनेक सिंह ढिल्लों ने रची थी। हरनेक ने मृतक जकरन सिंह से कनाडा की पीआर (स्थायी निवास) दिलाने के नाम पर 60 लाख रुपये लिए थे। जब जकरन ने अपने पैसे वापस मांगने शुरू किए, तो हरनेक ने अपने नौकर जगदीश के साथ मिलकर उसकी हत्या करने के लिए तैयार कर लिया।

 

घटना 14 अक्टूबर 2018 की है। जकरन सिंह जैसे ही हरनेक के घर पहुंचा, वहां उसकी हत्या कर दी गई। इसके बाद क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए हरनेक और जगदीश ने शव के टुकड़े-टुकड़े किए और उन्हें छह प्लास्टिक बैगों में पैक कर दिया। सबूत मिटाने के लिए आरोपी शव के टुकड़ों को अपनी कार में रखकर गुड़गांव से लुधियाना (पंजाब) लेकर गए। दिल्ली में सिंधु बॉर्डर पर यहां जकरन के कपड़े और स्कूटी की चाबियां फेंकी गईं। दिल्ली बॉर्डर में हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार फेंक गई। लुधियाना के दोराहा में यहां नहर में शव के अलग-अलग हिस्सों को अलग-अलग जगहों पर ठिकाने लगाया गया ताकि शिनाख्त न हो सके।

 

मामले में मुख्य आरोपी हरनेक सिंह ढिल्लों की दिसंबर 2023 में मुकदमे के दौरान ही मौत हो गई थी। जगदीश को सजा दिलाने में निम्नलिखित सबूत महत्वपूर्ण रहे। सीसीटीवी फुटेज में जकरन को आखिरी बार हरनेक के घर में घुसते देखा गया था। गुरुग्राम से लुधियाना के रास्ते में आरोपियों की कार टोल पर कैद हुई थी। बरामद अंगों के डीएनए मिलान से मृतक की पहचान स्थापित हुई। पड़ोसी इकबाल ने गवाही दी कि उसने घर से चीखने की आवाज सुनी थी, जिसे हरनेक ने यह कहकर टाल दिया था कि घर में बंदर घुस आया है। 

 

सजा सुनाते समय जज पुनीत सहगल ने नरम रुख अपनाने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कम सजा देने से अपराधियों का मनोबल बढ़ता है और समाज को नुकसान होता है। अनुचित सहानुभूति दिखाना न्याय प्रणाली के प्रति जनता के विश्वास को कमजोर करेगा।


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Content Editor

Pawan Kumar Sethi

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