धर्मनगरी में 'राम भरोसे' सुरक्षा: नगर परिषद में 4 साल से एक्सपायर पड़े हैं Fire Extinguisher, नहीं बदले गए 2022 के बाद
punjabkesari.in Thursday, May 07, 2026 - 03:10 PM (IST)
कुरुक्षेत्र (कपिल शर्मा): सी.एम.सिटी और धर्मनगरी कुरुक्षेत्र के नगर परिषद कार्यालय में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। आम लोगों की सुरक्षा और शहर की व्यवस्थाओं का जिम्मा संभालने वाले नगर परिषद कार्यालय में ही अग्नि सुरक्षा उपकरण वर्षों से अपडेट नहीं किए गए। कार्यालय परिसर में लगे कई फायर एक्सटिंग्विशर पर वर्ष 2022 की रिन्यू अथवा सर्विस पर्चियां लगी मिलीं, जिससे साफ जाहिर हो रहा है कि पिछले करीब चार वर्षों से इनकी न तो समय पर जांच हुई और न ही इन्हें बदला गया।
सबसे हैरानी वाली बात यह है कि जिन उपकरणों का उपयोग आग जैसी आपात स्थिति में लोगों की जान बचाने के लिए किया जाना चाहिए, वे खुद लापरवाही की धूल में दबे नजर आ रहे हैं। बाहर से देखने पर सिलेंडर साफ-सुथरे और व्यवस्थित दिखाई देते हैं, लेकिन उन पर लगी पुरानी रिन्यू पर्चियां विभागीय दावों और वास्तविकता के बीच का फर्क साफ बयान कर रही हैं। नगर परिषद कार्यालय में प्रतिदिन सैकड़ों लोग अपने कामों के लिए पहुंचते हैं। यहां महत्वपूर्ण सरकारी रिकॉर्ड, कंप्यूटर सिस्टम, फाइलें और अन्य दस्तावेज भी मौजूद रहते हैं। ऐसे में यदि किसी कारण आग लग जाए और ये फायर एक्सटिंग्विशर मौके पर काम न करें तो स्थिति भयावह हो सकती है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या नगर परिषद प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा था।
अग्नि सुरक्षा नियमों के अनुसार फायर एक्सटिंग्विशर
की समय-समय पर जांच, गैस रिफिलिंग और तकनीकी परीक्षण आवश्यक माना जाता है। प्राप्त जानकारी के अनुसार निर्धारित समय के बाद यदि इन उपकरणों की सर्विसिंग न हो तो आपात स्थिति में इनके फेल होने की संभावना बढ़ जाती है। बावजूद इसके नगर परिषद जैसे महत्वपूर्ण कार्यालय में वर्षों तक इस ओर ध्यान न दिया जाना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इस मामले में यह भी लगता है कि कहीं बीते पिछले वर्षों में सिर्फ कागजी कार्रवाई में ही तो इन्हें नहीं बदला जा रहा और धरातल पर कोई ध्यान ही नहीं दिया जा रहा।

मामले को लेकर जब नगर परिषद सचिव अरविंद कुमार से बातचीत की गई तो उन्होंने माना कि फायर एक्सटिंग्विशर बदलने की प्रक्रिया में बड़ी चूक हुई है लेकिन अब इनके बदले जाने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि इनके टेंडर पूरे हो चुके हैं और वर्क ऑर्डर भी जारी हो चुका है। हालांकि वर्क ऑर्डर में कुछ समय दिया जाता है और उम्मीद है कि जल्द ही इन्हें बदल दिया जाएगा।
जब उनसे पूछा गया कि आखिर 2022 के बाद इन्हें क्यों नहीं बदला गया तो उन्होंने कहा कि वह इस बारे में कुछ नहीं कह सकते क्योंकि उन्हें यहां आए लगभग 7-8 महीने ही हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शायद कार्यकारी अधिकारी भी इसका जवाब न दे पाएं क्योंकि उन्हें भी यहां कार्यभार संभाले करीब एक साल ही हुआ है।
क्या पूर्व अधिकारियों के साथ ही खत्म हो गई जिम्मेदारी ?
इस पूरे मामले में लेकिन बड़ा सवाल यह भी है कि यदि पुराने अधिकारी चले गए तो क्या जिम्मेदारी भी उनके साथ खत्म हो गई? सरकारी कार्यालयों में सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी क्या केवल कागजों तक सीमित रह गई है? अगर किसी हादसे के बाद जान-माल का नुकसान होता तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता।
यह मामला केवल पुराने फायर सिलेंडरों का नहीं बल्कि सरकारी तंत्र की उस कार्यशैली का भी उदाहरण है जिसमें कई बार जरूरी व्यवस्थाएं तब तक फाइलों में दबी रहती हैं जब तक कोई सवाल न उठा दे। धर्मनगरी के प्रमुख सरकारी कार्यालय में सामने आई यह तस्वीर न केवल चिंता पैदा करती है बल्कि यह भी बताती है कि सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषय को कितनी गंभीरता से लिया जा रहा है।