मनोहर लाल का विजन, तकनीक के सहारे विश्वस्तरीय होंगे भारत के शहर

punjabkesari.in Saturday, Jun 27, 2026 - 12:28 PM (IST)

चंडीगढ़ (धरणी) : भारत तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ रहा है। बढ़ती आबादी, वाहनों की संख्या में लगातार इजाफा और महानगरों से लेकर मध्यम शहरों तक फैलते शहरी विस्तार ने यातायात और शहरी नियोजन को बड़ी चुनौती बना दिया है। ऐसे समय में आधुनिक तकनीक और डेटा आधारित समाधान केवल विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुके हैं। यही कारण है कि केंद्र सरकार शहरी विकास में प्रौद्योगिकी की भूमिका को लगातार बढ़ावा दे रही है।

हाल ही में केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने संकल्प भवन में गूगल मैप्स की टीम के साथ शहरी यातायात प्रबंधन, लास्ट माइल कनेक्टिविटी, डिजिटल मैपिंग और डेटा आधारित शहरी नियोजन पर विस्तृत चर्चा की। यह बैठक केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं थी, बल्कि भविष्य के स्मार्ट भारत की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम थी। आज दुनिया के विकसित शहरों की पहचान केवल ऊंची इमारतों से नहीं होती, बल्कि उनकी स्मार्ट ट्रैफिक व्यवस्था, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और नागरिक सुविधाओं से होती है। भारत भी अब इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। स्मार्ट सिटी मिशन, अमृत योजना और पीएम गति शक्ति जैसी योजनाओं के माध्यम से सरकार आधुनिक शहरी विकास का मजबूत आधार तैयार कर रही है।

शहरी यातायात प्रबंधन में डिजिटल तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है। रियल टाइम ट्रैफिक डेटा, डिजिटल मैपिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से ट्रैफिक जाम कम किए जा सकते हैं, यात्रा का समय घटाया जा सकता है और आपातकालीन सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। इससे न केवल लोगों का समय बचेगा, बल्कि ईंधन की खपत और प्रदूषण में भी कमी आएगी। इसी तरह लास्ट माइल कनेक्टिविटी शहरी परिवहन की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। मेट्रो, बस या रेलवे स्टेशन तक लोगों की आसान पहुंच सुनिश्चित किए बिना सार्वजनिक परिवहन पूरी तरह सफल नहीं हो सकता। डिजिटल मैपिंग और स्मार्ट रूट प्लानिंग इस समस्या का प्रभावी समाधान बन सकती है।

डेटा आधारित शहरी नियोजन भविष्य के शहरों की सबसे बड़ी जरूरत है। यदि शहरों के ट्रैफिक, जनसंख्या, सड़क नेटवर्क और नागरिक सुविधाओं से जुड़ा डेटा सही तरीके से विश्लेषित किया जाए, तो विकास योजनाएं अधिक प्रभावी और दूरदर्शी बन सकती हैं। इससे अनियोजित विकास पर रोक लगेगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा। तकनीकी कंपनियों और सरकार के बीच सहयोग भी इस दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। गूगल मैप्स जैसी वैश्विक तकनीकी संस्थाओं के पास विशाल डिजिटल डेटा और आधुनिक तकनीकी विशेषज्ञता है, जबकि सरकार के पास नीतिगत क्षमता और व्यापक कार्यान्वयन तंत्र है। दोनों का समन्वय देश के शहरी विकास को नई दिशा दे सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के संकल्प में आधुनिक, सुरक्षित और तकनीक आधारित शहरों की महत्वपूर्ण भूमिका है। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल की पहल इसी सोच को आगे बढ़ाती दिखाई देती है। यदि तकनीक, नवाचार और सुशासन का यह समन्वय निरंतर जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में भारत के शहर न केवल अधिक स्मार्ट होंगे, बल्कि नागरिकों के लिए सुरक्षित, सुगम, पर्यावरण अनुकूल और विश्वस्तरीय भी बनेंगे। डिजिटल मैपिंग, डेटा आधारित निर्णय और स्मार्ट परिवहन व्यवस्था केवल तकनीकी बदलाव नहीं हैं, बल्कि यह भारत के शहरी भविष्य की नई तस्वीर हैं। यह पहल नागरिकों के जीवन को आसान बनाने के साथ-साथ विकसित भारत के सपने को साकार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


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Content Writer

Manisha rana

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