NCR के 4 जिलों में उद्योगों का एक हफ्ते का लॉकडाऊन, बढ़ रहे प्रदूषण पर हरियाणा सरकार ने लिया निर्णय

punjabkesari.in Wednesday, Nov 17, 2021 - 08:47 AM (IST)

फरीदाबाद : हरियाणा में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण को लेकर अब प्रदेश सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने एन.सी.आर. के 4 जिलों में एक हफ्ते का लॉकडाऊन घोषित किया है। अब एन.सी.आर. के जिलों में कोयले व अन्य ईंधन से चलने वाली फैक्टरियां 7 दिनों के लिए बंद कर दी गई हैं। 22 नवम्बर तक सिर्फ सी.एन.जी. पी.एन.जी. व केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से प्रमाणित ईंधन से चलने वाली फैक्टरियां ही चल सकेंगी।

हालांकि उद्योगपति सरकार के इस निर्णय से असंतुष्ट हैं। दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के बाद हरियाणा में भी लगातार प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है। एयर क्वालिटी इंडैक्स लगातार बढऩे से आबोहवा काफी जहरीली होती जा रही है। इस पर कोर्ट ने भी सरकार को संज्ञान लेने को कहा। ऐसे में अब हरियााणा सरकार ने हुए वायु प्रदूषण कम करने के लिए एन.सी.आर. के 4 जिलों फरीदाबाद, गुरुग्राम, सोनीपत व झज्जर में कोयले व अन्य ईंधन से चलने वाली फैक्टरियां 7 दिन के लिए बंद कर दी हैं। दरअसल, कई दिनों से फरीदाबाद समेत इन 4 जिलों का वायु गुणवत्ता सूचकांक अति गंभीर स्थिति में चल रहा है। यहां पर ए.क्यू.आई. का स्तर 400 से ऊपर है। वायु प्रदूषण की वजह से वातावरण में स्माग बना हुआ है और लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

गुुरुग्राम, झज्जर, फरीदाबाद व सोनीपत के सरकारी कार्यालय में जिला उपायुक्त की सलाह दी गई है कि वे अपने-अपने जिलों में वर्क  फ्रॉम होम कांसेप्ट लागू करें ताकि कम से कम वाहन चलें और प्रदूषण न हो। वर्कफ्रॉम होम का नियम संबंधित डी.सी. इंडस्ट्री पर भी लागू कर सकते हैं। इन चार जिलों में सीएनजी वाहनों को छोड़कर अन्य वाहनों को चलाने के लिए आड ईवन नियम लागू करने की सलाह दी गई है, ताकि सड़कों पर वाहनों की संख्या कम हो और वायु प्रदूषण में कमी लाई जा सके।

इंडस्ट्री बंद किए जाने के फैसले पर उद्यमियों ने नाराजगी जताई है। कई उद्यमियों ने सरकार के इस फैसले का विरोध जताया है। हालांकि कुछ उद्यमियों ने साफ तौर पर कहा है कि सरकारी का यह निर्णय सही है। सबसे पहले कर्मचारियों व आमजन का स्वास्थ्य उनके लिए सर्वोपरि है। इसके अलावा अगर कोई कोयले से चलती फैक्ट्री पाई गई तो उसके खिलाफ एयर एक्ट 1981 के तहत कार्रवाई होगी और पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क वसूला जाएगा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सभी फैक्टरी और एसोसिएशन को इस नियम का पत्र लिख दिया है। सरकार के इस निर्णय से एनसीआर की सैंकड़ों इंडस्ट्रीज प्रभावित होंगी।

एनसीआर के उद्योगजगत में निराशा बढ़ते प्रदूषण को लेकर एनसीआर के उद्योगों को एक हफ्ते के लिए बंद करने के फरमान से एनसीआर के उद्योग जगत में निराशा का माहौल है। उद्योगपतियों का कहना है कि इस तरह के फरमान से उद्योगों में ऑर्डर कैंसिल होने का डर बना हुआ है। हर साल प्रदूषण के दौरान उद्योगों को बंद करने के फरमान जारी कर दिए जाते हैं जबकि वे जहां सप्लाई करते हैं वहां पॉल्यूशन का स्तर कम होने के कारण वहां उद्योग चालू रहते हैं। ऐसे में उद्योगों में यह डर बना हुआ है कि वे जिन युनिटों को सप्लाई करते हैं, वे एनसीआर में हर साल उद्योगों के बंद होने की समस्या के चलते कहीं ऑर्डर स्थाई तौर पर ही कैंसिल न कर दें। उद्योगपतियों ने कहा कि कुछ मदर यूनिट इस तरह का निर्णय भी ले चुकी हैं जिससे उद्योगों को काफी नुक्सान उठाना पड़ रहा है। उद्योगपतियों का कहना है कि सरकार को इस पर विकल्प तलाशने चाहिए न कि उद्योगों पर तुगलकी फरमान लागू किए जाएं।

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Content Writer

Manisha rana

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