ऑनलाइन बेटिंग ऐप के जरिए साइबर फ्रॉड का भंडाफोड़, 4 गिरफ्तार, ढाई करोड़ की ट्रांजेक्शन का हुआ खुलासा
punjabkesari.in Friday, May 29, 2026 - 01:15 PM (IST)
गुड़गांव, (ब्यूरो): ऑनलाइन बेटिंग और गेमिंग ऐप के जरिए लोगों से ठगी करने वाले एक गिरोह का गुड़गांव की साइबर थाना पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। आरोपियों द्वारा पिछले पांच महीनों में ढाई करोड़ रुपए से भी ज्यादा की ठगी की वारदात को अंजाम दिया। मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जिनमें से एक गेमिंग ऐप को हैंडल करता था जबकि दूसरा बैंक ट्रांजेक्शन को हैंडल करता था। वहीं, इन दोनों ने दो अन्य युवकों को ऐप को हैंडल करने के लिए नौकरी पर रखा था। आरोपियों से प्रारंभिक पूछताछ में पूरी वारदात के तार जयपुर से जुड़ना सामने आए हैं। फिलहाल आरोपियों से पूछताछ की जा रही है।
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एसीपी साइबर क्राइम गौरव फौगाट ने पत्रकारवार्ता कर बताया कि साइबर क्राइम साउथ टीम को सूचना मिली थी कि सेक्टर-37डी की सिग्नेचर ग्लोबल सोसाइटी के एक फ्लैट में ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर ठगी का रैकेट चल रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस ने यहां रेड की और चार लोगों को काबू किया गया जिनकी पहचान आदित्य निवासी चरखीदादरी, कपिल निवासी महेंद्रगढ़, सन्नी चाहर निवासी आगरा उत्तर प्रदेश तथा सूरज राजपूत निवासी मथुरा के रूम में हुई है।
आदित्य इस गेमिंग ऐप का पैनल हैंडलर है, जबकि आरोपी कपिल का अकाउंट इस गेमिंग ऐप के लिए होने वाली ट्रांजेक्शन के लिए प्रयोग किया जाता है। सन्नी और सूरज दोनों उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं जो दोनों को गेमिंग ऐप के पैनल हो हैंडल करने के लिए इन्होंने नौकरी पर रखा था। जब पुलिस ने रेड की तो पुलिस ने 15 मोबाइल, 2 लैपटॉप, 15 एटीएम कार्ड, 11 चैकबुक और पासबुक, इंनटरनेट राउटर सहित पेमेंट साउंड बॉक्स बरामद किए हैं। पुलिस ने जांच के दौरान पाया कि कपिल का जो अकाउंट इस बेटिंग ऐप में प्रयोग किया जा रहा था उसके पांच महीने की ट्रांजेक्शन के दौरान पाया गया कि इसमें करीब ढाई करोड़ रुपए की ट्रांजेक्शन की गई है। ऐप रेडी अन्ना 888 के नाम से संचालित की जा रही थी जो यूआरएल के जरिए बेटिंग ऐप में प्रयोग की जा रही थी।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि ऑनलाइन गेम खिलाने के लिए ऐड चलाई जाती थी और कोई कस्टमर गेम खेलने का इच्छुक होता तो गेमिंग वेबवाइट पर जाकर अपनी आईडी बनाता और गेम खेलने के लिए दिए हुए QR कोड पर पेमेंट की जाती थी। आरोपियों द्वारा ऑनलाइन गेमिंग खेलने वाले व्यक्तियों से QR कोड के माध्यम से राशि प्राप्त कर गेमिंग आईडी में पॉइंट जोड़ने का कार्य किया जाता था। आरोपियों को प्राप्त राशि में से करीब 20 प्रतिशत कमीशन मिलता था।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों को बैंक खातों की किट, सिम व QR कोड, व्हाट्सएप के जरिए एक अन्य व्यक्ति द्वारा उपलब्ध कराए जाते थे जिसमें वह ऑनलाइन गेमिंग व वितिय लेनदेन संचालित करते थे तथा साइबर फ्रॉड की वारदातों को अंजाम देते थे। इस एड्रेस पर एक महीने से रह रहे थे। पैनल और ऐप के हैंडल इन्हें जयपुर से दिए गए थे जिसका पता लगाया जा रहा है। बेटिंग ऐप काफी ज्यादा सक्रिय है जिसके जरिए मल्टीपल गेम में बेटिंग की जा रही थी। इसे रोकने के लिए पुलिस कमिश्नर शिवास कबिराज ने निर्देश दिए हैं।