हमारे कांग्रेसी सज्जन विचारबदलू है, उनके घोषणापत्र में क्या हैं वह देखें: ओमप्रकाश धनखड़

9/22/2020 5:07:25 PM

चंडीगढ़(चंद्र शेखर धरणी): भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवम् पूर्व कृषि मन्त्री ओमप्रकाश धनखड से हमारे विशेष प्रतिनिधि चन्द्रशेखर धरनी ने बातचीत की। जिसमें विशेषतौर पर तीन अध्यादेशों के लागू होने पर उपजे विवाद बारे चर्चा हुई। जिसमें उन्होने कहा कि विपक्ष मुददाविहीन हो चुका है, खासतौर पर काग्रेंस पर बरसते हुए धनखड ने कहा कि अक्तूबर माह में पूरी खरीद हो जाएगी उसके बाद कागे्रंस के पास मुंह छुपाने की जगह नही बचेगी। किसान काग्रेंस के असली चेहरे को पहचान जाएगा। इसमें और भी कई मुद्दों पर चर्चा हुई। 

प्रशनः- तीनों अध्यादेश पारित हो चुके हैं। विपक्ष और किसान संगठन कल सड़कों पर थे। इसे लेकर आपका क्या दृष्टिकोण है?
उत्तरः-
हरियाणा प्रदेश में 82000 किसान किसान उत्पादक संघ से जुड़े हुए हैं, 25000 किसान यूनिवर्सिटी किसान आयोग डिपार्टमेंट की लिस्ट मे हैं जो कि डायरेक्ट मार्केटिंग करते हैं। पंचकूला में भी आपने कई बाजार देखे होंगें, गुड़गांव में भी किसान मंडी बाजार लगते हैं, बहुत से किसान ऐसे हैं जो अपने खेत के सामने सड़क के किनारे चारपाई इत्यादि लगाकर अपनी सब्जी बेचते हैं आजकल बहुत सारे किसान ट्रैक्टर इत्यादि पर जाकर गली मोहल्लों में अपना सामान बेचते हैं।  बहुत से ग्रुप आए हुए हैं जो खुदरा बाजार करते हैं। जो हमारी पूरी जमीन का ठेका जैसे गाजर, टमाटर इत्यादि लगभग सभी चीजों को इकट्ठा ले लेते हैं यह जो तीन कानून पारित हुए हैं यह सभी डायरेक्ट मार्केटिंग करने वालों को सुरक्षित करने के लिए और पूरे देश का बाजार देने के लिए है जैसे केरल, तमिलनाडु में पानी वाले नारियल का भाव 10 रूपये है और चंडीगढ़ में आकर यही 40 रूपये है।

अगर 400-500 किसान इकट्ठे होकर किसान उत्पादक संघ बनाकर डायरेक्ट मार्केटिंग करें। तो आप समझ सकते हैं कि लाभ होगा या नही। मैंने एक बार केरल में इलायची का भाव पूछा तो वहां 400 रूपये किलो था और हरियाणा में 1200 रूपये था। अगर वहां के किसान इकट्ठा होकर दूसरे स्टेट में माल बेचें तो आम जनता को भी लाभ होगा और किसान को भी लाभ होगा। करोनाकाल के दौरान अधिकतर लोगों ने किसानों से डायरेक्ट खरीद की। जिससे ग्राहक को सस्ती सब्जी मिली। मोदी जी यही चाहते हैं वो कहते हैं कि हे किसान तू अपनी चीज को बेचना सीख ले अपने बाजार को पहचान ले। इसीलिए मोदी ने इन अध्यादेशों से किसान को ताकत प्रदान की है। इन आध्यादेशों के बाद भी मंडिया ऐसे ही काम करेंगे। एम.एस.पी. भी रहेगा। खरीद ऐसे ही होगी। हमारे कांग्रेसी सज्जन विचारबदलू है उनके घोषणापत्र में क्या हैं वह आपने देख लिए हैं। हुड्डा साहब की कमेटी की रिपोर्ट में आपको पता है कि क्या था। यह मौका परस्त राजनीति करते हैं यह हर मौके पर नया झूठ बोलते हैं।

प्रशनः- हुड्डा साहब की कमेटी कौन सी है?
उत्तरः-
इसमें चार मुख्यमंत्री थे इसमें राजन साहब भी थे  भट्टाचार्य जी भी थे। हुड्डा साहब इस कमेटी के मुखिया थे 15 दिसंबर 2010 को रिपोर्ट सौंप कर आए थे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी को। उस रिपोर्ट में 20 नंबर पेज पर लिखा हुआ है वही मोदी जी लेकर आए हैं। लेकिन इनको कोई शर्म लिहाज है ही नहीं। यह 1 मिनट में बदल जाते हैं और यह थोड़े समय के बाद फिर बदलेंगे क्योंकि अभी शुरू हुई है जिसमें एक-एक दाना किसान का खरीदा जाएगा। तब यह कांग्रेसी कहां मुंह छुपाएंगे। फिर उसके बाद रबी की खरीद होगी। अभी मोदी जी 4 साल तक सत्ता में हैं। हरियाणा सरकार भी हैं। इस दौरान 8 फसलें हम खरीदेंगे। तब इन कांग्रेसियों का झूठ किसान के सामने आ जाएगा। मंडी भी यही होगी एम.एस.पी. भी होगी। सब कुछ ऐसे के ऐसे चलता रहेगा। केवल कांग्रेस का झूठ नहीं चलेगा। हम सत्य को इनके छूट से हारने नहीं देंगे। हमारे प्रदेश में 108 मंडियंा हैं। हमारे बीजेपी कार्यकर्ता और हमारे पुराने चेयरमैन खुद खड़े होकर खरीद करवाएंगें। झूठ 2 दिन चलता है और सत्य 100 दिन।

प्रशनः- कल चक्का जाम था 25 तारीख को हरियाणा बंद देश बंद की अपील है क्या कहेंगे?
उत्तरः-
आपको उनसे पूछना चाहिए। यह हमें बहुत सारी बातें कहते हैं। स्वामीनाथन का सी-2 फार्मूला लागू क्यों नहीं किया। हुड्डा साहब आप अपनी भी रिपोर्ट नहीं लागू करवा पाए थे। आप बीमे का विरोध कर रहे थे। हम उसे भी लेकर आए। आप 6000 कंपलसेशन देते थे। हम 12000 दे रहे हैं। आप हुड्डा साहब बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। 40,000 कंपलसेशन देने की मांग करते हैं अपने कार्यकाल में कभी 6000 से उपर नही दिया। उनको जनता से माफी मांगनी चाहिए। भाजपा सरकार ने 53 सौ करोड़ का कंपलसेशन हरियाणा को किसानों को दी है 6000 रूपये मोदी जी ने डायरेक्ट किसानों को दिए। क्या मनमोहन सिंह कभी दे पाए थे।

प्रशनः- कांग्रेस के अनुसार जब बीजेपी केंद्र में विपक्ष में थी। तो एफ.डी.आई. लाना चाहती थी उन दिनों सुषमा स्वराज जी ने लोकसभा में कहा था कि यह आढतियों को खत्म करने की कोशिश है। क्या कहेगें
उत्तरः-
बी.जे.पी. ने जो अपने घोषणापत्र में कहा था वह किया है। हुड्डा साहब को बताना चाहिए कि उनकी रिपोर्ट में 20 नंबर पेज पर क्या लिखा है। कांग्रेस के घोषणा पत्र में जो सातवां कृषि का अध्याय है उसमें 11 नंबर पर यह बात लिखी है कि नहीं। काग्रेंस का झूठ, फरेब सामने आने वाला है।

प्रशनः- कांग्रेस और इनेलो का हमेशा आपस में विरोधाभास रहता है। लेकिन किसानों के मुद्दे पर इनके बयान एक जैसे हैं?
उत्तरः-
प्रतिपक्ष के पास मुद्दे नहीं बचे हैं, सत्य और अच्छे मुद्दों पर लड़ाई लड़नी चाहिए, यह दोनों मुद्दा विहीन हो चुके हैं, अफवाह फैला रहे हैं, अपनी बात से मुकर रहे हैं एक सदी पुरानी पार्टी कांग्रेस का ऐसा वैचारिक दिवालियापन निकलेगा हमने कभी सोचा ही नहीं था।

प्रशनः- आम जनता को अगर सरल भाषा में समझाना हो तो इन अध्यादेशो को कैसे समझाएंगे?
उत्तरः-
बेचने के 4 विकल्प हैं। मंडी में एम.एस.पी. पर बेचना है तो वहां भी बेच लो। अगर किसान अपने खेत में बेचना चाहता है, उसे वहां अच्छा रेट मिलता है तो उसके पास वह विकल्प भी है। अगर किसान उत्पादक संघ बनाकर बेचना चाहता है तो बेच सकता है। आपने किसी से एग्रीमेंट करना है। उत्पाद पैदा करने के बाद या उत्पाद से पहले वह भी बेच सकता है। विपक्ष किसानों को बहका रहा है। इससे बड़े-बड़े व्यापारी आ जाएंगे हमारी जमीन में ले लेंगे लेकिन उन्हें यह नहीं बताया जा रहा कि ई-रजिस्ट्री बनेगी जो कि केवल 5 साल की होगी इससे लंबी नहीं बनेगी। साथ में कुछ नियम दिए गए हैं जैसे कानून सर छोटूराम ने बनाए थे वैसे मोदी साहब ने बनाया है कि व्यापारी जमीन नहीं ले सकेगा।

बन्धुआ खेती नहीं करवा सकेगा अगर व्यापारी ने अपनी फसल के लिए जमीन में पॉलीहाउस किसान को लगवा कर दिया है, ड्रिप सिस्टम लगवा कर दिया है और बाद में व्यापारी ने समय पर पालीहाउस नहीं उतारा तो वह किसान का ही हो जाएगा। इस प्रकार से किसान को हर प्रकार से मजबूत करने की कोशिश की गई है। जिस प्रकार से अमूल गुजरात से दूध खरीदता है और प्रॉफिट भी इन दूध उत्पादकों में बांट देता है। यह बहुत अच्छा मॉडल है इसी प्रकार से किसान उत्पादक संघ बनाकर कर सकता है यही आर्थिक आजादी है, यही किसान को आगे बढाने का उपाय है और मोदी जी ने यह बहुत सफल प्रयास किया है।

प्रशनः- विपक्ष के अनुसार आरती को खत्म करने की कोशिश है?
उत्तरः-
मंडियों में सरकारी खरीद होगी। 15 करोड़ क्विंटल की खरीद धान और गेहूं की है। हमारा बड़ा लाट मंडी है और खरीद भी यहीं होगी। इस पर कोई असर नहीं पड़ेगा। पहले कुछ व्यापारी बिना भी रिकॉर्ड के काम कर लेते थे। फिर उन पर मंडी सुपरवाइजर का, कमेटी सेक्रेटरी का डंडा चलता था। अब व्यापारी को आजादी दी है। व्यापारी बाहर भी खरीद करेगा और अंदर भी विपक्ष जानबूझकर बरगला रहा है, पागल बना रहा है।

 


Isha

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