Haryana: विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देने पर होगी जेल, सरकार ने लागू किया नया कानून

punjabkesari.in Monday, May 11, 2026 - 08:10 PM (IST)

चंडीगढ़ (धरणी) : विदेश में नौकरी, वर्क परमिट और मोटी कमाई के सपने दिखाकर लोगों से ठगी करने वाले फर्जी ट्रैवल एजेंटों की खैर नहीं। हरियाणा सरकार ने ट्रैवल एजेंटों से जुड़े कानून में बड़ा बदलाव करते हुए नया कानून लागू कर दिया है। अब कोई भी ट्रैवल एजेंट विदेश में नौकरी दिलाने, भर्ती कराने या रोजगार के नाम पर लोगों को बाहर भेजने का दावा नहीं कर सकेगा। ऐसा करने पर उसके खिलाफ सख्त आपराधिक कार्रवाई होगी।

हरियाणा सरकार ने साफ कर दिया है कि विदेश में रोजगार से जुड़े सभी मामलों पर केवल केंद्र सरकार का कानून ही लागू होगा। हरियाणा में पिछले कुछ वर्षों में विदेश भेजने के नाम पर धोखाधड़ी, फर्जी वीजा, मानव तस्करी और करोड़ों की ठगी के कई मामले सामने आए थे। इसी को देखते हुए सरकार ने ‘हरियाणा रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन आफ ट्रैवल एजेंट्स (अमेंडमेंट) एक्ट 2026’ लागू किया है। यह कानून केवल ट्रैवल और टूर सेवाओं तक एजेंटों की भूमिका सीमित करता है। यानी एजेंट टिकट, टूर पैकेज और यात्रा व्यवस्था तक ही काम कर सकेंगे। विदेश में नौकरी दिलाने का दावा करना सीधे कानून के दायरे में आएगा।

नये कानून में सजा के बेहद कड़े प्रविधान किए गए हैं। यदि कोई एजेंट विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जीवाड़ा करता है, नकली दस्तावेज तैयार करता है या मानव तस्करी में शामिल पाया जाता है, तो उसे सात से 10 साल तक की जेल हो सकती है। दो लाख से पांच लाख रुपये तक जुर्माना भी लगाया जाएगा। बिना रजिस्ट्रेशन एजेंट का काम करने वालों के लिए भी सख्त सजा तय की गई है। ऐसे मामलों में दो से सात साल तक की कैद हो सकती है। दोषी एजेंट की संपत्ति जब्त कर पीड़ितों को मुआवजा दिया जा सकेगा। इस कानून की सबसे अहम और नई व्यवस्था ‘लोकपाल सिस्टम’ को माना जा रहा है। किसी व्यक्ति को विदेश भेजने के नाम पर ठगी होती है तो उसे पुलिस थाने के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। पीड़ित लोकपाल के पास शिकायत दर्ज करा सकेगा, जहां मामले की सुनवाई होगी। जरूरत पड़ने पर ही मामला पुलिस को सौंपा जाएगा। इससे शिकायतों का तेजी से निपटारा होगा और आम लोगों को राहत मिलेगी।

केंद्र के कानून से टकराव खत्म

दरअसल पहले बनाए गए राज्य कानून पर केंद्र सरकार के विदेश मंत्रालय ने आपत्ति जताई थी। मंत्रालय का कहना था कि विदेश रोजगार और उत्प्रवास से जुड़े मामलों को पहले से ही ‘उत्प्रवास अधिनियम, 1983’ नियंत्रित करता है। ऐसे में राज्य कानून के कुछ प्रविधान केंद्र के अधिकार क्षेत्र से टकरा रहे थे। अब संशोधित कानून में स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि राज्य और केंद्र के कानून में किसी तरह का टकराव होता है तो केंद्र का कानून ही प्रभावी रहेगा।
 


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Content Writer

Manisha rana

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