खिलाड़ियों के भविष्य से खिलवाड़! कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में 52 खेल, सिर्फ 6 कोच...बड़े-बड़े दावों के बीच खेल व्यवस्था बदहाल

punjabkesari.in Thursday, May 21, 2026 - 10:47 AM (IST)

कुरुक्षेत्र (कपिल शर्मा) : देशभर में शिक्षा और खेलों के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखने वाला कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय इन दिनों अपनी खेल व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवालों के घेरे में है। हाल ही में जहां विश्वविद्यालय के कई विभागों की फाइलें गायब हो गई थी वहीं अब एक और बात सामने आई है जिसमें यह सामने आया है कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के अंदर लगभग 52 खेल विधाएं संचालित हो रही हैं जबकि मात्र 6 खेल विधाओं के लिए ही पर्याप्त कोचों को व्यवस्थाएं हैं। 

बड़ा ही महत्वपूर्ण विषय है कि राष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों को तैयार करने और खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के दावों के बीच विश्वविद्यालय की जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक दिखाई दे रही है। विश्वविद्यालय में कुल 52 खेल विधाएं संचालित हैं, लेकिन इनमें से केवल 6 खेलों के लिए ही कोच उपलब्ध हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर बिना प्रशिक्षकों के खिलाड़ी किस आधार पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी करेंगे।

सूत्रीय जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय में एयर राइफल शूटिंग, एयर पिस्टल शूटिंग, तीरंदाजी, एथलेटिक्स, बैडमिंटन, बॉक्सिंग, क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी, जूडो, कबड्डी, कुश्ती, योगा सहित कुल 52 खेल विधाएं शामिल हैं। सरकारें मंचों से खिलाड़ियों को “देश का भविष्य” बताने में पीछे नहीं रहतीं, लेकिन विश्वविद्यालय स्तर पर खेल विभाग की हालत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। अधिकांश खेलों के लिए न तो स्थायी कोच मौजूद हैं और न ही अस्थायी प्रशिक्षकों की कोई ठोस व्यवस्था। 

खेल विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार खेल प्रेमियों और विद्यार्थियों का कहना है कि वर्तमान स्थिति में खिलाड़ियों को केवल औपचारिकता भर का प्रशिक्षण मिल रहा है। कई तकनीकी खेलों में विशेषज्ञ मार्गदर्शन बेहद जरूरी होता है, लेकिन कोचों की भारी कमी के कारण खिलाड़ी अपनी प्रतिभा को निखार ही नहीं पा रहे। नाम न छापने की शर्त पर खिलाड़ियों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन केवल कागजी उपलब्धियों और ग्रेडिंग तक सीमित होकर रह गया है, जबकि मैदानों में हालात पूरी तरह अलग दिखाई देते हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब विश्वविद्यालय को एन.ए.सी.सी का A++ ग्रेड प्राप्त है और राष्ट्रीय स्तर पर उसकी प्रतिष्ठा है, तो फिर खेल विभाग में वर्षों से स्थायी नियुक्तियां क्यों नहीं हो पा रही हैं। आखिर खिलाड़ियों के भविष्य से जुड़ी इस गंभीर समस्या पर विश्वविद्यालय प्रशासन चुप क्यों बैठा है? खेल सुविधाओं की स्थिति भी खिलाड़ियों में नाराजगी का कारण बनी हुई है। खिलाड़ियों के अनुसार स्टेडियम की हालत “जैसे-तैसे” चल रही है। एथलेटिक्स खिलाड़ियों के लिए सिंथेटिक ट्रैक की मांग लंबे समय से उठ रही है, लेकिन आज तक यह सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी। कई खेल मैदानों की स्थिति खराब बनी हुई है और बुनियादी संसाधनों का भी अभाव है।

सूत्रों के अनुसार हालात इतने खराब हैं कि पूरे स्टेडियम की घास काटने के लिए पर्याप्त मशीनरी तक ढंग से उपलब्ध नहीं है। केवल एक पुराने खराब पड़े ग्रास कटर को ठीक करवाने की भी जहमत खेल निदेशालय नहीं उठा पा रहा जबकि महज कुछ दैनिक मलमजदूरों के सहारे पूरे मैदान की व्यवस्था चलाई जा रही है। ऐसे में मैदानों की गुणवत्ता प्रभावित होना स्वाभाविक है। खिलाड़ियों का कहना है कि जब मूलभूत सुविधाएं ही पूरी नहीं होंगी तो उत्कृष्ट प्रदर्शन की उम्मीद करना केवल दिखावा बनकर रह जाएगा।

खेल विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर अब विश्वविद्यालय प्रशासन की गंभीरता पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। विद्यार्थियों और खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति विभागीय उदासीनता, लापरवाही और खेलों के प्रति कमजोर सोच को दर्शाती है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कोचों की नियुक्ति, आधुनिक खेल सुविधाओं का विस्तार और स्टेडियम इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले समय में विश्वविद्यालय की खेल उपलब्धियां बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं।

खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों का कहना है कि विश्वविद्यालय में वार्षिक बड़े बजट और बड़े-बड़े दावों के बावजूद यदि खिलाड़ी बुनियादी सुविधाओं और प्रशिक्षकों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तो यह पूरे सिस्टम पर बड़ा सवाल है। अब देखने वाली बात होगी कि विश्वविद्यालय प्रशासन खिलाड़ियों के भविष्य से जुड़े इस गंभीर मुद्दे को कितनी गंभीरता से लेता है या फिर यह मामला भी फाइलों और बैठकों तक सीमित रह जाएगा।

इस मामले में निदेशक खेल विभाग प्रो.दिनेश राणा ने कहा कि विभाग केवल इतनी ही जानकारी दे सकता है कि व्यवस्था को दुरुस्त करने की कोशिश है और खिलाड़ियों के लिए हर समुचित व्यवस्था का प्रबंध करने का प्रयास किया जाता है। विश्वविद्यालय में केवल 6 कोच ही उपलब्ध हैं बाकी अस्थाई कोच भी नहीं लगाए जा सकते। वहीं पी.आर.ओ. कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय डॉक्टर महा सिंह ने कहा कि वह जल्द ही निदेशक से बात करके इस बारे में अपडेट करेंगे लेकिन कई दिनों के बाद जब  उनसे बात करने की कोशिश की गई तो उनके द्वारा फोन नहीं उठाया गया और उन्होंने कोई प्रति उत्तर नहीं दिया। बहरहाल विश्वविद्यालय का यह मामला कोई नया मामला नहीं है इस तरह की कई ऐसी खामियां हैं जो विश्वविद्यालय के अंदर पसरी हुई है जिन्हें बस जरूरत है तो तलाशने की। 

 

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Content Writer

Manisha rana

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