प्रदेश के शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर, जुलाई में खोली जा सकती है ट्रांसफर ड्राइव

punjabkesari.in Tuesday, Jun 14, 2022 - 05:58 PM (IST)

चंडीगढ़ (धरणी) : हरियाणा शिक्षा विभाग की ट्रांसफर पॉलिसी जहां दूसरे प्रदेशों को भी आकर्षित कर रही है, वहीं प्रदेश शिक्षा विभाग से जुड़े 95 फ़ीसदी लोग इससे काफी संतुष्ट हैं। ऐसा दावा प्रदेश के शिक्षा मंत्री कवर पाल गुर्जर का है। लंबे समय से ट्रांसफर ड्राइव पर लगी रोक जुलाई माह में खुलने वाली है, यह अध्यापकों के लिए काफी राहत भरी खबर है। शिक्षा मंत्री कवर पाल गुर्जर ने जानकारी देते हुए बताया कि टीचरों की लगातार च्वाइस आ आ रही है। हम जुलाई में ट्रांसफर ड्राइव को खोलने के लिए प्रयासरत है। जेबीटी अध्यापकों पर स्टे लगा था, लेकिन अब राहत मिलने के बाद इसमें जेबीटी अध्यापक भी शामिल किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि हमारी इस पॉलिसी से प्रभावित होकर पड़ोसी राज्य उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री अपने सेक्रेटरी, डायरेक्टर के साथ अध्ययन के लिए प्रदेश में पहुंचे थे और हमारे अधिकारियों द्वारा दी जानकारी से काफी प्रभावित और खुश नजर आए और जल्द उत्तराखंड में भी इस पॉलिसी को लागू करने की बात कही है। उन्होंने बताया कि गुजरात में राष्ट्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के कार्यक्रम में रावत ने जब ट्रांसफर पॉलिसी से 95 फ़ीसदी सेटिस्फेक्शन की बात जानी तो यहां पहुंचे थे। उत्तराखंड में भौगोलिक परिस्थितियों के कारण ट्रांसफर एक बड़ी समस्या है और हमारी पॉलिसी उनके लिए बेहद राहत भरी साबित हो सकती है। अधिकारियों और मंत्रियों को भी से निजात मिलेगी। इस पॉलिसी पर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने काफी मेहनत की है।

शिक्षा मंत्री ने बताया कि हम स्टैप बाय स्टैप प्रदेश में नई शिक्षा नीति पर भी लगातार आगे बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री द्वारा 2030 तक इसे लागू करने की बात कही थी, लेकिन प्रदेश के मुख्यमंत्री ने 2025 तक लागू करने का टारगेट दिया है और प्रयासरत हैं। इसी प्रक्रिया में हमने प्रदेश में 4000 प्ले स्कूल खुले हैं और हमने आंगनवाड़ी वर्करों को टीचर वाला काम करने के लिए ट्रेनिंग दी है। हमने स्लेबस पर भी काफी काम किया है। हम लगातार परिवर्तन की ओर आगे बढ़ रहे हैं। हम बच्चों को किट दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण 15 बच्चों पर एक टीचर बेशक हो, क्योंकि ऐसे क्षेत्रों में गांवों में- घरों में एक बड़ा गैप होता है। लेकिन हमारा काफी घनत्व वाला प्रदेश है। कहीं-कहीं कोई गांव में 15 से 20000 तक की आबादी है। इसलिए हमारे प्रदेश में 30 बच्चों पर एक टीचर की संख्या काफी है। बावजूद इसके कहीं अगर टीचर की कमी लगेगी तो उसे दूर किया जाएगा।

गुर्जर ने बताया कि परीमिसिस को लेकर भी हम आगे बढ़ रहे हैं। हम पांचवी-आठवीं के हेड टीचर जो पहले अलग-अलग थे, अब एक ही हेड टीचर होगा। इससे प्रशासनिक दृष्टि से काफी सुधार होगा और हमें भी सुविधा मिलेगी। बच्चों को भी इससे काफी लाभ होगा। एक ही गांव में दो अलग-अलग स्कूल का अब बड़े स्कूल वाला ही हेड टीचर होगा। पहली से आठवीं तक के हम स्कूलों को इकट्ठा करने जा रहे हैं। राज्यसभा चुनाव पर चर्चा करते हुए गुर्जर ने कार्तिकेय शर्मा की जीत को करिश्मा नहीं, बल्कि एक बारीकी का खेल बताया। उन्होंने बताया कि राज्यसभा चुनाव में एक विधायक की वोट की वैल्यू 100 के बराबर होती है। चुनाव में 2 वोट रद्द होने से वैलिड वोट 88 रह गए और वैल्यू 8800। कैंडिडेट तीन थे, इसलिए 8800 को 3 से भाग किया तो 2934 वाला चुनाव जीतना था।

इसमें हमारे उम्मीदवार कृष्ण लाल पंवार के सरप्लस वोट ऑटोमेटिक दूसरी चॉइस कार्तिकेय को ट्रांसफर हुई। कांग्रेस के पास कुल वोट 29 होने के कारण सेकंड चॉइस नहीं थी। उनकी वैल्यू 2900 थी और हमारी सेकंड चॉइस में कार्तिकेय 2966 वैल्यू पा गए। इसलिए कार्तिकेय शर्मा जीते हैं। गुर्जर ने कहा कि हमारा एक-एक वोट निर्दलीय कैंडिडेट कार्तिकेय को मिला, इसलिए वह चुनाव जीते हैं और वह हमारे ही कैंडिडेट हैं। उन्होंने बताया कि राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया दूसरे चुनावों से अलग होती है। इसमें अपने कैंडिडेट के सामने एक का निशान और चॉइस पर दो का निशान लगाना होता है। इसमें छोटी सी गलती से ही वोट रद्द हो जाता है। कुल वोट 90 हैं, तीन उम्मीदवार खड़े थे। एक वोट कैंसिल होने का परिणाम भयंकर हो सकता था। इसलिए भाजपा द्वारा प्रशिक्षण शिविर लगाया गया था। जिसका बहुत बड़ा लाभ भाजपा को मिला है।

कंवरपाल गुर्जर ने कहा कि इस चुनाव में कांग्रेस के किस विधायक का वोट रद्द हुआ, इसकी सही जानकारी कांग्रेस के प्रभारी जो एजेंट के रूप में उपस्थित थे, विवेक बंसल ही बता सकते हैं। भाजपा को नहीं पता किसका वोट रद्द हुआ है। उन्होंने कहा कि यह दोनों उम्मीदवार हमारे हैं। भाजपा ने समर्थन दिया जिसका बड़ा लाभ जनता को होना तय है।वह हरियाणवी है और लोग आसानी से उनसे मिलजुल सकेंगे और लोगों के काम होंगे।

गुर्जर ने कहा कि भाजपा कभी जातिगत राजनीति या जातिवाद पर कोई बात नहीं करती। भाजपा में केवल हरियाणवी और अपने कार्यकर्ता की बात होती है। देश की सभ्यता- संस्कृति को बचाने के लिए ब्राह्मणों ने बड़े त्याग और बलिदान दिए हैं और हम ब्राह्मणों के कर्जदार हैं। गुर्जर ने कहा कि आज प्रदेश में दो लोकसभा सांसद ब्राह्मण चुनाव जीत कर आए हैं और दो ही राज्यसभा के सांसद हैं। शायद आज तक के इतिहास में अब जितने ब्राह्मण सांसद कभी नहीं रहे।

 


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Content Writer

Manisha rana

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