अग्निपथ को लेकर क्या हैं रिटायर्ड ब्रिगेडियर के विचार, पढ़ें पंजाब केसरी से उनकी खास बातचीत

punjabkesari.in Monday, Jul 04, 2022 - 03:56 PM (IST)

चंडीगढ़(चंद्रशेखर धरणी): सेना में भर्ती के लिए केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना को लेकर प्रदर्शनों का सिलसिला भले ही थम गया हो, लेकिन अभी भी इस योजना को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही है। इसे लेकर रिटायर्ड ब्रिगेडियर काहलों ने कहा कि सरकार को चाहिए था, कि सभी पक्षों से बात करने के बाद यह स्कीम लागू करनी चाहिए थी। सभी पक्षों के साथ मंथन कर इस योजना को बेहतर बनाया जा सकता था। अब सरकार को चाहिए कि अग्निपथ सेवा की अवधि को 4 से 10 साल करके जवानों को सुरक्षित भविष्य की गारंटी देनी चाहिए।

पढ़िए पंजाब केसरी से उनकी एक्सक्लूसिव बातचीत के प्रमुख अंश :

 

प्रश्न : अग्निपथ को कितना सार्थक मानते हैं ?

उत्तर : सरकार ने जो स्कीम लॉन्च की वो एकदम से लागू की उसकी पहले कोई सूचना नहीं दी गई है। सरकार ने कहा के हम 2 साल से तीनों सेनाध्यक्षों से मंथन कर रहे थे  मगर जब स्कीम लॉन्च की तो एक दम ऐसा रिएक्शन हो गया।फरवरी में संसद में रिकॉर्डिंग स्टेटमेंट दी के 37000 अभ्यर्थी इंतजार में है के  कब भर्ती खुलेगी। 2  3 साल से वो उम्मीद लगाए थे लेकिन 4 साल वाली अग्निपथ स्कीम ने उनमें आक्रोश भर दिया। जब एकदम ऐसी स्कीम लाई गई तो सारे देश में प्रदर्शन हो गए। सरकार की मीटिंग में 2 साल उम्र बढ़ाने की बात रखी गई लेकिन कहा गया के शॉर्ट जॉब देंगे और अब ये सब छोटे छोटे पार्ट में हो रहा है। अगर इन्होंने पूरी तैयारी की होती तो ये हालत ना बनते। बिहार और दूसरे राज्यों में उपद्रव ना होते। इसमें कहीं कोई निश्चित नेता नहीं है और न ही कोई क्लियर लीडरशिप है। इस स्कीम को लॉन्च करते समय अच्छे से तैयारी नहीं की गई थी। लेकिन सरकार ने लॉजिक दिया की फौज को यंग रखने के लिए स्कीम है। पेंशन बजट को कम करने के लिए किया जा रहा है। मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस में 6 लाख कर्मचारी हैं जो 60 साल तक नौकरी करते हैं जबकि एक फौजी तो 17 साल नौकरी करता है तो उसमें कटौती क्यों नहीं करती सरकार। वन रैंक वन पेंशन से यह हव्वा शुरू हुआ मानता हूं तीनों सेनाओं का आधुनिकीकरण करना जरूरी है लेकिन और भी तरीके हैं खर्चे घटाने के।

प्रश्न : जवान 4 साल के लिए सेना में भर्ती किए जाएंगे, इस तर्क से आप कितना सहमत हैं ?

उत्तर : देखिए मैं 4 साल के लिए सहमत नहीं हूं उनको जो पीरियड मिलेगा वह काफी कम है। 6 महीने की ट्रेनिंग भी कम है। जब सिखलाई कम होगी तो मोर्चों पर कैसे टिकेंगे और तो और बीच बीच में छुट्टियां भी चाहिए तो डेढ़ साल ही सेवा दे पाएंगे जो गलत है। जो 4 साल के बाद 75% निकल जाएंगे उनके लिए क्या होगा ? उनका क्या होगा ? मैं समझता हूं उसमें कमी पेशी बहुत है। हमने देखा गलवान घाटी में क्या हुआ चाइना के टेंपरेरी सोल्जर के साथ वो हम नही चाहते।

प्रश्न  : वन रैंक वन पेंशन सीधे प्रभावित होगी। इसे लेकर आप क्या बताना चाहेंगे ?

उत्तर : सबसे पहले वन रैंक वन पेंशन पर बात करना चाहूंगा इनके मानयोग रक्षा मंत्री है जो कहते हैं हमने राय ली लेकिन हमने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस की ग्राउंड पर अभ्यर्थी से बात की मेरे लेख छपे है पंजाब केसरी में जिसमे आंकड़े दिए हैं। इस फैसले से वन रैंक वन पेंशन पर असर पड़ेगा। और भी बहुत सारे फैसले है जो इससे जुड़े है रिजर्वेशन भी एक मुद्दा रहेगा। 13% कोटा है पेंशन आने के बाद नौकरी में लेकिन सिर्फ 2.5% इस्तेमाल कर रहे हैं बाकी कहां जा रहा है।

इसके अलावा जो 75% नौकरी से जाएंगे उनका क्या यह सिक्योरिटी का डर भी है जो दुश्मन है वह उन्हें ट्रैक करने की कोशिश करेंगे। इस वजह से आतंकवाद, गैंगस्टरवाद भी पैदा होगा। मैं समझता हूं कि इन बातों की तरफ सरकार को ध्यान देना चाहिए।मैं तो अपने यंगस्टर को भी यही एडवाइज दूंगा कि वह जो कर रहे हैं गाड़ियां फूंक रहे हैं देश की संपत्ति नुकसान पहुंचा रहे हैं वह गलत कर रहे हैं। यह बंद होना चाहिए शांतिप्रिय तरीके से अपनी बात मनवाने चाहिए।जितने भी आंदोलन कर रहे हैं सभी भर्ती योग्य नहीं है बीच में पॉलिटिकल पार्टियां भी अपनी रोटियां सेंक रही है।

प्रश्न  :  जब देश की आजादी की लड़ाई लड़ी जा रही थी, तब सुभाष चंद्र बोस ने भी कहा था कि अनिवार्य सैनिक प्रशिक्षण लागू होना चाहिए, सैनिक प्रशिक्षण अलग चीज है जो सरकार लाई है वो अलग है ?

उत्तर : सुभाष चंद्र बोस ने जब ऐलान किया सबसे ज्यादा ब्रिटिश आर्मी से भी फौजी छोड़कर गए तो पंजाब के सबसे ज्यादा थे क्योंकि उनके अंदर जज्बा था जो पैदा किया गया था कोमी जज्बा के आजादी लेनी है। उन्होंने अच्छी तरह से उनको ट्रेनिंग दी हथियार भी दिए। लेकिन यहा वो नही है वो देश प्रेम का जज्बा था।

प्रश्न  :  जिस तरह देश में हिंसा का माहौल बना उसमें हरियाणा-पंजाब भी अछूते नहीं रहे। लोग सड़कों पर है, तो एक रिटायर्ड ब्रिगेडियर के नाते जवानों से क्या अपील करेंगे ?

उत्तर : कह सकता हूं कि जो हुआ बहुत दुखदाई है प्रदर्शनकारियों को शांतिमय ढंग से प्रदर्शन करना चाहिए लेकिन सरकार को भी चाहिए कि वो परमानेंट भर्ती को जारी रहने दे। हरियाणा हिमाचल में इन्हीं की सरकार है तो वहां पर क्यों नहीं युवाओं की आवाज उठाते। यह मसला अभी खत्म होने वाला नहीं है।

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Content Writer

Vivek Rai

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