CRSU में 15 दिन से मेस बंद, छात्र नेताओं ने गैस चूल्हे पर बनाईं रोटियां, कुलसचिव बोलीं- बच्चे पैसे नहीं देंगे तो कोऑपरेटिव मेस कैसे चलेगा?
punjabkesari.in Thursday, Oct 15, 2026 - 07:26 PM (IST)
जींद (अमनदीप पिलानिया) : चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय (CRSU), जींद में मेस व्यवस्था को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पिछले 15 दिनों से मेस बंद होने का आरोप लगाते हुए किसान छात्र एकता संगठन एवं NSUI के नेतृत्व में छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई।
विद्यार्थियों को भोजन की परेशानी से जूझता देख छात्र नेताओं ने खुद गैस चूल्हे पर रोटियां बनाईं और विद्यार्थियों को खाना खिलाया। वहीं, मेस सिक्योरिटी के नाम पर दोबारा राशि लेने को लेकर भी सवाल उठाए गए। दूसरी ओर, विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. सीमा गुप्ता ने कहा कि कोऑपरेटिव मेस विद्यार्थियों के सहयोग से चलता है और इसके लिए विद्यार्थियों को पैसे जमा करवाने होंगे।
15 दिन से मेस बंद होने से विद्यार्थी परेशान
छात्र नेताओं का कहना है कि विश्वविद्यालय में पिछले 15 दिनों से मेस बंद होने के कारण विद्यार्थियों को भोजन के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। घरों से दूर रहकर पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के सामने रोजाना खाने की समस्या खड़ी हो गई है। ऐसे में छात्र नेताओं ने आगे आकर गैस चूल्हे की व्यवस्था की और खुद रोटियां बनाकर विद्यार्थियों को भोजन करवाया।
छात्र संगठनों ने सवाल उठाया कि विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को भोजन जैसी बुनियादी सुविधा के लिए भी परेशान क्यों होना पड़ रहा है? उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल के साथ-साथ नियमित भोजन और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करवाना विश्वविद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी है।

मेस सिक्योरिटी के नाम पर दोबारा राशि लेने पर सवाल
छात्र नेताओं ने मेस सिक्योरिटी राशि को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि विद्यार्थियों से पहले ही मेस सिक्योरिटी के नाम पर 2,500 रुपये जमा करवाए जा चुके हैं। अब कोऑपरेटिव मेस के लिए अलग से सिक्योरिटी राशि लेने की बात सामने आ रही है।
छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से स्पष्ट करने की मांग की कि पहले जमा करवाई गई 2,500 रुपये की राशि किस मद में रखी गई है और कोऑपरेटिव मेस के लिए दोबारा सिक्योरिटी राशि लेने का क्या आधार है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों से संबंधित फीस और सिक्योरिटी राशि के मामले में पारदर्शिता होनी चाहिए, ताकि उन पर बिना स्पष्ट जानकारी के अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।
कुलसचिव बोलीं- बच्चे पैसे नहीं देंगे तो मेस कैसे चलेगा?
इस मामले में पंजाब केसरी टीवी ने चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. सीमा गुप्ता से बातचीत की। उन्होंने बताया कि फिलहाल विश्वविद्यालय में कोऑपरेटिव मेस चल रहा है, जो विद्यार्थियों के सहयोग से संचालित होता है। मेस में काम करने वाले कर्मचारी विश्वविद्यालय की ओर से नियुक्त किए गए हैं, लेकिन इसे चलाने के लिए विद्यार्थियों का आर्थिक सहयोग भी जरूरी है।
डॉ. सीमा गुप्ता ने कहा कि विश्वविद्यालय की ओर से पिछले पांच दिनों से विद्यार्थियों को पैसे जमा करवाने के लिए कहा जा रहा है, ताकि कोऑपरेटिव मेस सुचारु रूप से चलाया जा सके। उनके अनुसार, इस महीने केवल 15 विद्यार्थियों ने ही पैसे जमा करवाए हैं, जबकि बाकी विद्यार्थियों ने अभी तक राशि जमा नहीं करवाई है।
कुलसचिव ने कहा कि एक तरफ विद्यार्थी पैसे जमा नहीं करवा रहे हैं और दूसरी तरफ भोजन नहीं मिलने की शिकायत कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब विद्यार्थी अपना योगदान नहीं देंगे, तो कोऑपरेटिव मेस कैसे चल पाएगा? उन्होंने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों से पैसे जमा करवाकर अपना खाना बनवाने और कोऑपरेटिव मेस को बेहतर तरीके से चलाने के लिए कहा है।
छात्र संगठनों ने की मेस व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग
किसान छात्र एकता संगठन एवं NSUI के नेतृत्व में छात्र नेताओं ने मांग की कि विश्वविद्यालय में मेस व्यवस्था को जल्द सुचारु किया जाए और विद्यार्थियों को नियमित एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध करवाया जाए। साथ ही, मेस बंद रहने के कारणों की जानकारी सार्वजनिक की जाए तथा पहले जमा करवाई गई 2,500 रुपये की सिक्योरिटी और कोऑपरेटिव मेस के लिए ली जा रही राशि के संबंध में स्पष्ट जानकारी दी जाए।
छात्र नेताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को विद्यार्थियों की समस्याओं का स्थायी समाधान करना चाहिए। गैस चूल्हे पर खुद रोटियां बनाकर विद्यार्थियों को खिलाना छात्र एकजुटता का उदाहरण है, लेकिन नियमित भोजन उपलब्ध करवाने की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की है।
(पंजाब केसरी हरियाणा की खबरें अब क्लिक में Whatsapp एवं Telegram पर जुड़ने के लिए लाल रंग पर क्लिक करें)